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???? सिस्टम का खेल: बिना नॉलेज के टीचर, फिर छात्र कैसे निकलेंगे?

बहराइच के मदरसे में 92 हजार वेतन पाने वाले टीचर को नहीं पता ‘बृहस्पतिवार’ कैसे लिखते हैं, ज़िला अल्पसंख्यक अधिकारी भी रह गए हैरान!

खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क बहराइच

???? जिस टीचर को खुद ही नहीं पता सही शब्दों की वर्तनी, वो बच्चों को क्या सिखाएगा?”

SRVS Sikanderpur

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से सामने आई इस शर्मनाक हकीकत ने न सिर्फ मदरसा शिक्षा प्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि पूरे शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठा दिए हैं। जिले के महसी क्षेत्र स्थित दारुल उलूम अशरफिया हस्मतुरर्जा मदरसे में शिक्षा का जो चेहरा सामने आया है, वह न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि शिक्षा के नाम पर हो रही ‘तनख्वाह की लूट’ का सबूत भी है।

????️‍♂️ जांच में हुआ खुलासा: छात्र को नहीं पता सप्ताह के दिन, शिक्षक ने दी ‘सही’ की मुहर!

जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी श्री संजय मिश्रा ने हाल ही में जब उक्त मदरसे का औचक निरीक्षण किया, तो उन्हें बच्चों की कॉपियों में चौंकाने वाली गलतियाँ देखने को मिलीं। कक्षा 7 के छात्र ने अपनी हिंदी कॉपी में सप्ताह के सातों दिनों के नाम भी सही से नहीं लिखे थे। खासतौर पर शब्द “बृहस्पतिवार” की वर्तनी इतनी गलत थी कि उसे देखकर कोई भी व्यक्ति सहज ही जान सकता था कि छात्र को उचित मार्गदर्शन नहीं मिला है।

लेकिन हैरानी की बात यह थी कि जिस मौलवी शिक्षक ने इस कॉपी की जांच की थी, उन्होंने इस गलत शब्द पर ‘सही’ का निशान लगा दिया। जब अधिकारी ने सवाल किया कि “क्या बृहस्पतिवार की वर्तनी सही है?”, तो मौलवी बगले झांकने लगे। जब बार-बार सवाल किया गया, तो उन्होंने उंगली से कुछ मात्रा इशारे में समझाने की कोशिश की — और वह भी गलत!

???? 92 हज़ार रुपये वेतन! लेकिन योग्यता का ये स्तर?

जब ज़िला अधिकारी ने शिक्षक से पूछा कि उन्हें कितना वेतन मिलता है, तो मौलवी ने बताया — ₹92,000 प्रति माह। यह सुनते ही अधिकारी हतप्रभ रह गए।

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“जिसे खुद हिंदी के मूलभूत शब्द भी ठीक से नहीं आते, वह शिक्षक बनकर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है।”

???? मौलवी को चेतावनी, लेकिन सवाल अभी बाकी हैं…

इस निरीक्षण के बाद अधिकारी ने टीचर को सख्त चेतावनी जारी की और कहा कि इस स्तर की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गुणवत्ता युक्त शिक्षण कार्य के लिए आवश्यक सुधार लागू करने के निर्देश दिए गए। लेकिन सवाल सिर्फ एक शिक्षक पर नहीं रुकता।

बड़ा सवाल: सिस्टम में बैठे ऐसे ‘पात्र’ कैसे नियुक्त हो जाते हैं?

इस पूरे प्रकरण ने भर्ती प्रक्रिया, निगरानी व्यवस्था, और मदरसा बोर्ड की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

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  1. ✅ क्या ऐसे टीचर की नियुक्ति सिर्फ कागजी अंकों के आधार पर हो रही है?
  2. ✅ क्या राजनीतिक या धर्मिक प्रभाव से बचा नहीं जा सकता?
  3. ✅ क्या शिक्षक योग्यता की जांच केवल नियुक्ति के समय होनी चाहिए या समय-समय पर मूल्यांकन जरूरी है?

???? बच्चों का क्या कसूर?

एक कक्षा सात का छात्र, जो सीखने के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर है, अगर उसे हफ्ते के सात दिनों के नाम तक नहीं सिखाए जा सके, तो यह न केवल शिक्षा की विफलता है, बल्कि पूरे समाज के भविष्य पर खतरा है।

“Teacher is the builder of a Nation, but when the builder forgets the basics — the nation trembles.”

???? मदरसा शिक्षा या मदरसा मज़ाक?

यह घटना मदरसा शिक्षा प्रणाली की मौलिक कमजोरियों को उजागर करती है। जहां एक ओर सरकार मदरसों के आधुनिकीकरण की दिशा में करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं ऐसे शिक्षक उस प्रयास को मज़ाक बनाकर पेश कर रहे हैं।

मदरसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ धार्मिक ज्ञान तक सीमित नहीं हो सकता। बच्चों को हिंदी, अंग्रेज़ी, गणित, विज्ञान जैसे विषयों में भी मजबूत आधार देना आवश्यक है — वरना ये संस्थान छात्रों को समाज की मुख्यधारा से और दूर कर देंगे।

???? वेतन बनाम योग्यता: एक सच्चाई जो झकझोरती है

विषयआंकड़े
टीचर का वेतन₹92,000/माह
छात्र की कक्षा7वीं
जांच में गलती‘बृहस्पतिवार’ की वर्तनी गलत
शिक्षक की प्रतिक्रियागलती को ‘सही’ बताया

???? क्या यह सिर्फ एक मामला है? या पूरी व्यवस्था ही ढीली है?

कई शिक्षकों की नियुक्ति बिना कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया के की जाती है, और एक बार नियुक्त हो जाने के बाद उनकी कार्यशैली पर कोई ठोस निगरानी नहीं रहती। यह घटना एक उदाहरण है, मगर इसका असर पूरे सिस्टम पर पड़ेगा अगर इसे नजरअंदाज किया गया।

Khabari News की मांग:

  1. ???? सभी मदरसों की तत्काल शैक्षणिक गुणवत्ता जांच हो।
  2. ????‍???? योग्यता आधारित मूल्यांकन प्रणाली लागू हो।
  3. ???? ट्रेनिंग और शिक्षक क्षमता निर्माण पर ज़ोर दिया जाए।
  4. ???? जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाए।
  5. ???? छात्रों और अभिभावकों से फीडबैक लिया जाए।

???? समाप्ति नहीं, एक शुरुआत है ये सवालों की!

जब शिक्षक खुद अशिक्षा की मिसाल बन जाएं, तो छात्र सिर्फ अंधकार की ओर बढ़ते हैं। ये सिर्फ बहराइच की घटना नहीं, ये एक राष्ट्रीय चेतावनी है — अब वक्त है कि हम शिक्षा को ‘सेवा’ समझें, ना कि केवल ‘सरकारी तनख्वाह’ का साधन।

????️ रिपोर्ट: Khabari News Wave Portal

???? स्थान: बहराइच, उत्तर प्रदेश

????‍⚖️ संपादन: के.सी. श्रीवास्तव (एडवोकेट)

#SystemExpose #MadarsaEducation #TeacherScam #EducationCrisis #KhabariNewsBharosaKaNaam

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