
???? Khabari News Exclusive |Awadhesh dwivedi / Editor-in-Chief: K.C. Shrivastava (Advocate)
“सुबह की पहली किरण भी न देख पाया वो बेटा,
जिसने मां-बाप के सपनों को हकीकत में बदलने की ठानी थी…”

[खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया‚चंदौली। भोर के तकरीबन 3:00 बजे का समय था। पूरा इलाका शांत था, पक्षियों की चहचहाहट भी अभी दूर थी। लेकिन तभी लतीफशाह रोड पर एक तेज़ आवाज़ गूंजी… और चुप्पी छा गई।
निबीया ढाले के पास जो हुआ, उसने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया। चोपन (सोनभद्र) के पारस पानी गांव का रहने वाला मानसिंह गोंड, जो एक मेहनती डंपर चालक था, अपने जीवन की आखिरी यात्रा पर निकला था। डंपर संख्या (UP…) को तेज़ी से चलाते हुए वो लतीफशाह की ओर बढ़ रहा था कि अचानक संतुलन बिगड़ा, और डंपर एक विशालकाय पेड़ से टकरा गया।
टक्कर इतनी भीषण थी कि पेड़ डंपर पर ही गिर पड़ा, जिसके कारण डंपर के परखच्चे उड़ गए। सामने से गुजरने वाले लोग ठिठक गए, कुछ की आंखों से आंसू बह निकले। और उस खौफनाक मंजर के बीच, मानसिंह की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
????♂️ कौन था मानसिंह गोंड?
- नाम: मानसिंह गोंड
- पिता का नाम: रामसेवक गोंड
- निवास: पारस पानी, चोपन, सोनभद्र
- उम्र: लगभग 28 वर्ष
- स्वभाव: मेहनती, शांत, परिवार का सहारा
- डंपर मालिक: उपेंद्र सिंह, निवासी रेणुकूट, सोनभद्र
जिस बेटे ने घर को रोशन करने का सपना देखा था, आज वो खुद अंधेरे में समा गया।

???? कुदरत का क्रूर मज़ाक या लापरवाही का नतीजा?
यह सवाल हर किसी के मन में है। तेज़ रफ्तार, रात का समय और सड़क किनारे खड़ा जर्जर पेड़ — क्या ये हादसा रोका जा सकता था? क्या वन विभाग और प्रशासन समय रहते सड़क किनारे खतरे बन चुके पेड़ों को नहीं हटा सकता?
???? मौके पर पहुंची पुलिस और वन विभाग
जैसे ही सूचना मिली, चकिया पुलिस और वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची। तुरंत JCB मशीन मंगवाकर पेड़ को हटाने का काम शुरू किया गया ताकि अवरुद्ध रास्ते को खोला जा सके। पर सवाल ये है कि क्या मानसिंह की जान बच सकती थी, अगर पहले ही ये पेड़ काटा गया होता?

???? मौत की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल
हादसे की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं। टूटे हुए डंपर के अंदर फंसे चालक की स्थिति देखकर हर आंख नम हो उठी।
“जिसे पूरा गांव ‘बचपन से बहादुर’ कहता था,
उसी का चेहरा आज खून से लथपथ था…!”
???? परिवार की चीखें और टूटा सपना
जब घर वालों को खबर मिली, तो पारस पानी गांव में कोहराम मच गया। मां बेसुध हो गईं, पिता रामसेवक गोंड की आंखें सूख चुकी हैं, और छोटे भाई का रो-रो कर बुरा हाल है।
मानसिंह ही था जो गांव से दूर जाकर रोज़ी-रोटी कमाता था और परिवार को पालता था। अब परिवार में कमाने वाला एक ही चिराग बुझ गया।
???? सवाल प्रशासन से:
- क्या सड़क किनारे खड़े जर्जर पेड़ों की नियमित जांच नहीं होती?
- क्या तेज़ रफ्तार वाहनों पर कोई निगरानी नहीं?
- क्या वन विभाग को हादसे के बाद ही जागना होगा?
????️ खबरी न्यूज़ की विनम्र श्रद्धांजलि
“तू अब भी जिंदा है मानसिंह… अपने परिवार की आंखों में, और हमारी खबरों में…”
चकिया की इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर हमें जगा दिया है कि प्रशासनिक लापरवाही, कुदरती खतरों और तेज़ रफ्तार का मेल किसी भी मासूम की जान ले सकता है।
???? खबरी न्यूज़ की ओर से मांग:
➡️ मृतक के परिवार को तत्काल मुआवजा
➡️ सड़क किनारे सभी पेड़ों की सुरक्षा जांच
➡️ रात में चलने वाले भारी वाहनों की रफ्तार पर नियंत्रण
➡️ मानसिंह को मरणोपरांत “दैनिक वीर” की उपाधि
???? आप भी शोक व्यक्त करें, और शेयर करें ताकि मानसिंह की मौत व्यर्थ न जाए।
???? Khabari News | दिल से जुड़ी हर खबर | Editor-in-Chief: K.C. Shrivastava (Advocate)


















