खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया (चंदौली)। शनिवार की दोपहर चकिया नगर के वार्ड नंबर 7, निर्भय दास स्थित सिंचाई विभाग कार्यालय के बाहर माहौल अचानक गरमा गया। वजह थी – चंद्रप्रभा सिस्टम से भारी मात्रा में अचानक छोड़ा गया पानी, जिसने निचले इलाकों में किसानों की कई एकड़ गेहूं की फसल को जलमग्न कर दिया। खेतों में खड़ी सुनहरी फसल देखते ही देखते पानी में डूब गई और किसानों का धैर्य भी।
आक्रोशित किसान सीधे सिंचाई विभाग कार्यालय पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। “किसानों के साथ अन्याय बंद करो”, “मनमानी नहीं चलेगी” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

???? चंद्रप्रभा सिस्टम: राहत का साधन या मुसीबत का कारण?
चंद्रप्रभा से जुड़ा सिंचाई तंत्र किसानों के लिए जीवनरेखा माना जाता है। लेकिन किसानों का आरोप है कि जब जरूरत होती है तब पानी नहीं मिलता, और जब खेत पहले से भरे होते हैं तब बिना सूचना भारी मात्रा में पानी छोड़ दिया जाता है।
किसानों का कहना है:
“सिंचाई के समय अधिकारी हाथ खड़े कर देते हैं, और जब फसल खड़ी होती है तब अचानक पानी छोड़कर बर्बादी कर देते हैं।”
कई किसानों की गेहूं की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई। जिन खेतों में दाने भरने की प्रक्रिया चल रही थी, वहां पानी भर जाने से उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।

✊ सिंचाई कार्यालय बना धरना स्थल
धरने में किसानों के समर्थन में पहुंचे:

- पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार (एडवोकेट)
- समाजवादी पार्टी के चकिया विधानसभा उम्मीदवार टोली खरवार
- सहकारी बैंक के पूर्व डायरेक्टर सुधाकर कुशवाहा
- प्रधान संघ अध्यक्ष रामलाल यादव
- किसान महासभा अध्यक्ष एडवोकेट वीरेंद्र पाल
दर्जनों की संख्या में किसान मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में विभागीय अधिकारियों पर “किसान विरोधी रवैया” अपनाने का आरोप लगाया।
किसान नेता एडवोकेट वीरेंद्र पाल ने कहा:

“हर साल यही कहानी दोहराई जाती है। आश्वासन मिलता है, कार्रवाई नहीं होती। चंद्रप्रभा सिस्टम किसानों की सुविधा के लिए बना था, लेकिन अब यह परेशानी का कारण बन चुका है।”
मौके पर पहुंचे एग्जीक्यूटिव इंजीनियर
चंद्रप्रभा डिवीजन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर हरेंद्र कुमार धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने किसानों को समझाने का प्रयास किया और भरोसा दिलाया कि आगे से पानी छोड़ने से पहले सूचना दी जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि:
- गेहूं की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी दिया जाएगा
- धान की रोपाई तक नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी
लेकिन किसान सवाल उठा रहे थे — “पहले हुए नुकसान का क्या?”
एसडीएम विनय कुमार मिश्रा की एंट्री से बदला माहौल
धरना स्थल पर जब स्थिति गरमाने लगी, तब सूचना पर पहुंचे विनय कुमार मिश्रा, उपजिलाधिकारी चकिया।
उनकी मौजूदगी ने माहौल को संतुलित किया। एसडीएम ने खुद किसानों से संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि:
- भविष्य में बिना सूचना पानी न छोड़ा जाए
- जलमग्न फसलों का सर्वे कराया जाए
- सिंचाई शेड्यूल पारदर्शी बनाया जाए
एसडीएम ने स्पष्ट कहा:
“किसानों की समस्या प्राथमिकता है। यदि लापरवाही पाई गई तो कार्रवाई होगी।”
उनकी सक्रिय पहल और संतुलित संवाद के बाद किसानों ने फिलहाल धरना समाप्त किया, लेकिन चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आगे उग्र प्रदर्शन होगा।

???? जलमग्न फसल, बढ़ती चिंता
निचले इलाकों में कई एकड़ गेहूं की फसल पानी में डूबी रही। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार:
- लंबे समय तक जलभराव से जड़ों में सड़न की आशंका
- दाने के विकास पर नकारात्मक प्रभाव
- उत्पादन में 20–40% तक गिरावट संभव
किसानों का कहना है कि एक तरफ लागत बढ़ रही है — खाद, बीज, डीजल — और दूसरी तरफ विभागीय लापरवाही से फसल बर्बाद हो रही है।
???? किसान बोले – “अबकी बार चुप नहीं बैठेंगे”
धरना स्थल पर मौजूद अजय राय, सोहन मौर्य, दिनेश बहेलिया, अभिनव राजेंद्र यादव, सुदामा यादव, देशराज पटेल, दिनेश सिंह, राम सिंह सहित दर्जनों किसानों ने कहा:
“यदि जल्द ठोस समाधान नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन होगा।”
किसानों की मांगें:
- नुकसान का मुआवजा
- जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
- पानी छोड़ने का पूर्व सूचना सिस्टम
- सिंचाई प्रबंधन में पारदर्शिता
???? प्रशासन बनाम विभाग – जिम्मेदारी किसकी?
यह सवाल अब उठ रहा है कि:
- क्या जल प्रबंधन की कोई समन्वित योजना है?
- क्या जलस्तर और मौसम का पूर्व आकलन किया गया था?
- क्या निचले इलाकों की मैपिंग हुई है?
यदि नहीं, तो यह केवल “तकनीकी गलती” नहीं बल्कि प्रबंधन की विफलता है।
???? आगे क्या?
एसडीएम विनय कुमार मिश्रा ने आश्वासन दिया है कि:
- फसलों का सर्वे होगा
- रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी
- सिंचाई विभाग से समन्वय बैठाकर समाधान निकाला जाएगा
अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।
???? चंद्रप्रभा सिस्टम, जो किसानों के लिए जीवनरेखा माना जाता है, वही इस बार संकट का कारण बन गया। किसानों का गुस्सा सिर्फ पानी भरने पर नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही अनदेखी पर है।
फिलहाल धरना समाप्त हो चुका है, लेकिन किसानों की चेतावनी साफ है —
“यदि न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन और तेज होगा।”
चकिया की यह घटना केवल स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में सिंचाई प्रबंधन की गंभीरता पर सवाल खड़ा करती है।




















