????स्थान: चकिया, जिला चंदौली — एक ऐतिहासिक विरासत की शर्मनाक मौत की कहानी

???? “रानी की बावली”: जहां इतिहास रोता है और प्रशासन सोता है!
चार सौ साल पुरानी रानी की बावली, जो कभी रानियों के स्नान और शाही विलास का केन्द्र हुआ करती थी, आज झाड़-झंखाड़ में घिरी एक खंडहर बनकर रह गई है। एक नहीं, दो नहीं, पूरे एक करोड़ रुपए का बजट आया था। पर नतीजा? दो पक्के घाट, कुछ हेरिटेज पोल और चहारदीवारी पर लिखे गए स्लोगन!
क्या वाकई इतने में एक करोड़ खर्च हो गया…? या फिर इसे ‘विकास’ के नाम पर लूटा गया…?
???? इतिहास जो मिटा दिया गया…
18वीं सदी में बनारस स्टेट के राजा बलवंत सिंह ने चकिया किले का निर्माण कराया था। उसी किले के पास बनी रानी की बावली – रानियों की स्नानागार और मन की शांति का स्थान। यह केवल एक बावली नहीं, संस्कृति का स्मारक है। आज़ादी के बाद जब दिलकुशा डाकबंगले में बदल गया, तब भी बावली राजपरिवार से जुड़ी रही। मगर यही रिश्ता, इस विरासत के विनाश का कारण भी बना।

???? 2018 से 2023 तक की ‘विकास’ यात्रा – एक सरकारी ड्रामा!

???? अधूरा काम, पूरा भुगतान
- 2018: तत्कालीन चेयरमैन अशोक बागी ने 50 लाख की पहली किस्त से काम शुरू कराया।
- 2020: कोविड में चेयरमैन की मौत, काम रुक गया।
- 2023: एसडीएम ज्वाला प्रसाद के समय 50 लाख की दूसरी किस्त निकली।
- फिर क्या हुआ…?
???? काम का सच:
- केवल दो पक्के घाट
- चहारदीवारी और दो गेट
- कुछ हेरिटेज पोल लाइट
- स्लोगन से सजा दीवार
जनता पूछ रही है: ये एक करोड़ गया कहां?
???? सवालों की बौछार:
- क्या ये पैसे सिर्फ ‘गेट और पोल’ के लिए थे?
- क्या विकास के नाम पर धन की बंदरबांट नहीं हुई?
- क्या प्रशासन और ठेकेदारों की मिलीभगत नहीं थी?
- और सबसे बड़ा सवाल – जांच क्यों नहीं हो रही?


????️ “हमारी भी सुनो” – जनता का गुस्सा फूटा
1️⃣ अजय मध्देशिया:
“बावली के नाम पर लूट हुई है। एक करोड़ का हिसाब दो! जांच हुई तो बड़े-बड़ों की गर्दन फंसेगी।”
2️⃣ संदीप गुप्ता:
“ये विरासत हम सबकी है। प्रशासन राजपरिवार से बात करे और दोबारा विकास शुरू करे।”
3️⃣ मीना विश्वकर्मा:
“झाड़-झंखाड़ हटाओ, सफाई कराओ, और आम लोगों को टहलने के लिए प्रवेश दो!”
4️⃣ सुरेश सोनकर:
“बावली के रास्ते पर बसे लोगों को PM आवास योजना से पुनर्स्थापित करो, रास्ता साफ करो।”
5️⃣ तहसीन खान:
“अतिक्रमण हटाओ, रंग-रोगन कराओ, और अधूरे घाट का निर्माण पूरा करो।”
6️⃣ राकेश कुमार:
“बावली के अंदर पाथवे बनाओ, बेंच लगाओ, और छायादार पौधों से इसे एक पर्यटन स्थल बनाओ।”
???? न्याय की राह में रोड़ा: कोर्ट का स्टे – किसने कराया, क्यों कराया?
वर्तमान चेयरमैन गौरव श्रीवास्तव का कहना है कि काशीराज परिवार ने कोर्ट से स्टे लिया है, इसलिए विकास कार्य नहीं हो पा रहा।
प्रश्न ये उठता है – क्या इससे पहले अनुमति ली गई थी?
अगर हां, तो स्टे क्यों?
अगर नहीं, तो पहला पैसा खर्च कैसे हो गया?
???? ये सिर्फ विरासत नहीं, एक पूरा आंदोलन है!
चकिया की जनता अब जाग चुकी है। सोशल मीडिया पर #BawliScam और #JusticeForHeritage ट्रेंड कर रहा है।
यह सिर्फ एक बावली की बात नहीं, यह प्रशासनिक भ्रष्टाचार के उस सिस्टम की पोल खोलता है, जिसमें इतिहास और जनता दोनों हाशिये पर खड़े हैं।
???? “सवाल तो बनता है…”
- ✔️ किसके इशारे पर एक करोड़ की योजना आधी छोड़ दी गई?
- ✔️ क्या वाकई कोई टेंडर हुआ था?
- ✔️ कार्य की गुणवत्ता की मॉनिटरिंग किसने की?
- ✔️ क्या नगर पंचायत के अधिकारियों ने कोई निरीक्षण रिपोर्ट सौंपी?
- ✔️ क्या किसी RTI में ये सच सामने आएगा?
???? अब नहीं तो कब? उठो चकिया, बोलो जनता!
???? हम मांग करते हैं:

- तत्काल प्रभाव से बावली घोटाले की CAG या SIT जांच हो।
- काशीराज परिवार और प्रशासन के बीच वार्ता कर स्टे हटाने की पहल की जाए।
- नगर पंचायत बावली की सफाई और सुरक्षा कार्य तत्काल शुरू करे।
- PM आवास योजना के तहत विस्थापन और पुनर्वास योजना लागू की जाए।
- बावली को राजकीय धरोहर घोषित कर पर्यटन नक्शे पर लाया जाए।
???? आंदोलन की तैयारी – अब जनता बनाएगी इतिहास!
???? अगर प्रशासन नहीं जागा, तो ‘खबरी न्यूज़’ चुप नहीं बैठेगा।
???? हम आवाज़ उठाएंगे, सड़कों पर उतरेंगे, कैमरे लेकर जाएंगे।
???? ‘रानी की बावली’ अब सिसकते इतिहास की नहीं, इंसाफ की हुंकार बनेगी।
????️ चकिया की जनता की इस लड़ाई में हम साथ हैं।
???? चकिया रानी की बावली, एक करोड़ घोटाला
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???? Ajay Madhesiya: “It’s a scam. ₹1 crore vanished. Not a single inquiry.”
???? Sandeep Gupta: “Talk to the royal family. Begin again. We owe it to history.”
???? Meena Vishwakarma: “Clear the wild growth. Let families walk there again.”
???? Suresh Sonkar: “Resettle the marginalized respectfully. Clear the access path.”
???? Taseen Khan: “Rebuild the ghats. Paint the history with honour.”
???? Rakesh Kumar: “Make it green. Make it walkable. Make it live again.”
✍️ लेखनी का सच
Editor-in-Chief के.सी. श्रीवास्तव (Advocate) और खबरी न्यूज़ की टीम द्वारा प्रस्तुत
???? सिर्फ खबर नहीं, पूरा सबूत और सच्चाई का दस्तावेज
Editor-in-Chief के.सी. श्रीवास्तव (Advocate) और खबरी न्यूज़ की टीम के साथ अब जल्द आ रहा है गॉवों की जीरो ग्राउंड रिर्पोट का सच प्रस्तुत करने खबरी न्यूज की पूरी टीम



















