चंदौली | खबरी न्यूज़ वेव पोर्टल
सायं ठीक 4 बजे… आसमान ने ऐसा रंग बदला कि लोगों को लगा जैसे दिन अचानक रात में बदल गया हो। वैसे तो पूरा क्षेत्र में बुधवार की शाम आई तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। सूरज बादलों के पीछे इस तरह गायब हुआ कि चारों तरफ घुप्प अंधेरा छा गया—एक ऐसा मंजर, जिसने लोगों को भीतर तक हिला दिया।

तेज हवाओं की रफ्तार इतनी खतरनाक थी कि पेड़ जड़ों समेत उखड़कर सड़कों पर गिर गए, टीन शेड उड़कर हवा में गायब हो गए और आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। लोग घरों में कैद हो गए, और जो बाहर थे, वे सुरक्षित जगह की तलाश में भागते नजर आए। करीब एक घंटे तक चली इस भीषण बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया।
किसानों पर टूटा कहर, मेहनत पर फिरा पानी
इस प्राकृतिक कहर का सबसे बड़ा झटका किसानों को लगा। गेहूं की मढ़ाई के दौरान खुले में रखी फसल का 30-35% हिस्सा बारिश में भींग गया। कई किसानों की महीनों की मेहनत कुछ ही मिनटों में बर्बाद हो गई। खेतों में बंधे गेहूं के बोझ पानी में डूब गए—यह सिर्फ फसल का नुकसान नहीं, बल्कि किसानों के सपनों का टूटना है।
कमालपुर में मौत, कई घायल
वहीं कमालपुर क्षेत्र में इस तूफान ने और भी भयावह रूप दिखाया। ढोढ़ीया गांव में तेज हवा से पेड़ गिरने के कारण एक खड़ी बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। एक गुमटी पलटने से अमरदेव राजभर (55 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गए।
सबसे दर्दनाक खबर इनायतपुर गांव से आई, जहां लल्लू राम (55 वर्ष) के ऊपर पेड़ गिरने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा पूरे इलाके को सन्न कर गया। एक परिवार ने अपना सहारा खो दिया, और गांव में मातम पसर गया।

दिन में रात” का खौफ…-विधायक प्रतिनिधि की कार पर गिरा पेड़
तूफान की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सैयादराजा विधायक प्रतिनिधि अन्नू सिंह की कार पर भी पेड़ गिर गया। हालांकि वे बाल-बाल बच गए, लेकिन वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
दिन में रात” का खौफ…-घरों की छतें उड़ीं, शादी के पंडाल भी नहीं बचे
दर्जनों घरों की करकट (टीन छतें) उड़ गईं। ढोढ़ीया गांव के सैफुल इस्लाम खान और तजम्मूल अंसारी के मकानों पर पेड़ गिरने से भारी नुकसान हुआ। शादी-विवाह के पंडाल भी तूफान की चपेट में आ गए—खुशियों के बीच अचानक मातम और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

दिन में रात” का खौफ…राहत भी, लेकिन कीमत बहुत भारी
इस तूफान ने जहां एक ओर भीषण गर्मी से राहत दी, वहीं दूसरी ओर भारी तबाही भी मचाई। मौसम की इस दोहरी मार ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया—क्या अब प्रकृति का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है?
✍️ Editor’s Opinion | एड० के.सी. श्रीवास्तव
“प्रकृति जब चेतावनी देती है, तो संकेत छोटे नहीं होते। चंदौली की यह घटना सिर्फ एक मौसमीय बदलाव नहीं, बल्कि climate imbalance का साफ संदेश है। किसानों की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की preparedness अब विकल्प नहीं—जरूरत बन चुकी है। अगर आज नहीं चेते, तो कल ये ‘दिन में रात’ स्थायी अंधेरा बन सकता है।”
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