डीडीयू नगर/चंदौली। जनपद में पिछले दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही लगातार तेज बारिश ने नगर निकायों और संबंधित विभागों की जल निकासी तथा नाला सफाई व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। जगह-जगह जलभराव से आम जनजीवन प्रभावित है। सड़कों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर पानी जमा होने से लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के बीच सबसे खराब स्थिति पंडित कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला चिकित्सालय परिसर की देखने को मिली, जहां चारों तरफ पानी भरने से पूरा परिसर ताल-तलैया में तब्दील नजर आया।
अस्पताल परिसर में जलभराव का असर सीधे मरीजों और उनके तीमारदारों पर पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी पर्ची काउंटर के आसपास देखने को मिली, जहां चारों ओर पानी जमा हो गया। इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को पर्ची बनवाने के लिए घुटनों तक भरे पानी से होकर गुजरना पड़ा। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इतने महत्वपूर्ण संस्थान में इस तरह के जलभराव ने व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बुधवार को अवकाश का दिन होने के कारण अस्पताल में मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। इससे भीड़ और अव्यवस्था का स्तर कुछ हद तक नियंत्रित रहा। लोगों का कहना है कि यदि सामान्य कार्यदिवस पर इतनी ही मात्रा में जलभराव होता, तो बड़ी संख्या में मरीजों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और तीमारदारों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था।
बारिश और जलभराव की समस्या केवल जिला अस्पताल तक सीमित नहीं रही। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय परिसर में भी पानी घुस गया, जिससे कार्यालयीन कार्य प्रभावित होने की बात सामने आई। परिसर में पानी भरने से कर्मचारियों को भी आने-जाने और नियमित कामकाज में परेशानियों का सामना करना पड़ा।
अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे एक दिव्यांग मरीज के अटेंडेंट छब्बन यादव ने जलभराव की समस्या पर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि अस्पताल परिसर में पानी भर जाने से मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। विशेष रूप से दिव्यांग, बुजुर्ग और गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए घुटनों तक पानी से होकर गुजरना बेहद कठिन है। उन्होंने प्रशासन से अस्पताल परिसर में जल निकासी की स्थायी और प्रभावी व्यवस्था कराने की मांग की।
लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी इलाकों से मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर में बार-बार होने वाला जलभराव केवल असुविधा का विषय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। बरसात के गंदे पानी में संक्रमण फैलने की आशंका भी लोगों को परेशान कर रही है।

तेज बारिश का असर शहर तक ही सीमित नहीं है। जिले के ग्रामीण इलाकों में भी जलभराव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई गांवों में खेतों में पानी भर जाने से धान और अन्य खरीफ फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि लगातार बारिश और खेतों में जमा पानी जल्द नहीं निकला तो फसलों को नुकसान हो सकता है।
ग्रामीणों के अनुसार, निचले इलाकों के खेतों में जल निकासी की व्यवस्था कमजोर होने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। यदि आने वाले दिनों में बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो खरीफ की फसलें प्रभावित हो सकती हैं। किसानों ने प्रशासन और सिंचाई से जुड़े विभागों से नालों, नहरों और जल निकासी मार्गों की सफाई तथा पानी की निकासी के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सालय प्रशासन ने जलभराव से निपटने के लिए तत्काल प्रयास शुरू कर दिए हैं। अस्पताल परिसर से पानी निकालने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि मरीजों और तीमारदारों को राहत मिल सके।
इस संबंध में बाबा कीनाराम स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य अमित सिंह ने बताया कि लगातार बारिश के कारण अस्पताल परिसर में जलजमाव की स्थिति बनी है और पर्ची काउंटर के आसपास पानी भरने से परेशानी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि जल निकासी के लिए तत्काल व्यवस्था की जा रही है और स्थिति को सामान्य करने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।
लगातार बारिश ने एक बार फिर शहरी जल निकासी व्यवस्था और नाला सफाई की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण परिसर में जलभराव की स्थिति ने जिम्मेदार विभागों के सामने स्थायी समाधान की चुनौती खड़ी कर दी है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बारिश थमने के बाद केवल पानी निकालने तक कार्रवाई सीमित रहती है या भविष्य में दोबारा ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए कोई ठोस व्यवस्था भी की जाती है।



















