डीडीयू नगर/चंदौली। जिले के सकलडीहा कस्बा चौकी क्षेत्र से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। भोजपुर ग्राम सभा के रतनपुरा निवासी एक परिवार से जुड़े घटनाक्रम में कस्बा चौकी प्रभारी पर एक महिला को लाठी से पीटने का आरोप लगाया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में महिला की पीठ पर चोट के निशान दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वहीं, इसी प्रकरण से जुड़ा एक दूसरा वीडियो भी सामने आया है, जिसमें संबंधित महिला पुलिस द्वारा मारपीट से इनकार करती नजर आ रही है। विरोधाभासी वीडियो सामने आने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, भोजपुर ग्राम सभा के रतनपुरा निवासी मिंटू सोनकर अपनी पत्नी कुंती और अन्य लोगों के साथ खुले में सूअर का मांस बेच रहे थे। सावन माह में खुले स्थान पर मांस की बिक्री को लेकर लागू प्रतिबंध और शासन के निर्देशों का पालन कराने के उद्देश्य से पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी।

बताया जा रहा है कि पुलिस के पहुंचते ही मांस बेच रहा व्यक्ति मौके से चला गया। इसके बाद वहां मौजूद महिला और पुलिसकर्मियों के बीच किसी बात को लेकर तीखी कहासुनी होने लगी। आरोप है कि विवाद बढ़ने के दौरान कस्बा चौकी प्रभारी ने महिला पर लाठी चला दी, जिससे उसकी पीठ पर चोटें आईं।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वायरल वीडियो में महिला की पीठ पर चोट के निशान दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो महिला के साथ बल प्रयोग और कार्रवाई की परिस्थितियों की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों और कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के समय मौके पर महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। इसे लेकर भी चर्चाएं तेज हैं और लोगों ने पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा महिला के साथ कथित रूप से की गई मारपीट पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों और घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब सोशल मीडिया पर एक दूसरा, करीब 13 सेकंड का वीडियो वायरल हुआ। इस वीडियो में संबंधित महिला स्वयं यह कहती हुई नजर आ रही है कि पुलिस ने उसके साथ कोई मारपीट नहीं की है और वह इस संबंध में किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं चाहती है।

दोनों वायरल वीडियो के अलग-अलग दावों ने पूरे मामले को उलझा दिया है। एक ओर महिला की पीठ पर चोट के निशान दिखाए जाने वाला वीडियो पुलिस पर गंभीर आरोपों को जन्म दे रहा है, तो दूसरी ओर महिला का कथित बयान पुलिस द्वारा मारपीट नहीं किए जाने की बात कह रहा है।
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों ने यह भी आशंका जताई है कि महिला का दूसरा वीडियो दबाव में बनवाया गया हो सकता है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही जांच पूरी होने से पहले इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है। ऐसे में वायरल वीडियो और घटनाक्रम की वास्तविक परिस्थितियों की जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पूरे प्रकरण का संज्ञान सकलडीहा के क्षेत्राधिकारी ने लिया है। क्षेत्राधिकारी के अनुसार, मामला उनके संज्ञान में आ चुका है और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की सत्यता की जांच कराई जा रही है। घटना के सभी पहलुओं की गहन और निष्पक्ष पड़ताल की जाएगी।
जांच के दौरान वायरल वीडियो की प्रमाणिकता, घटना का समय, मौके पर मौजूद लोगों के बयान और पुलिस टीम की भूमिका समेत अन्य तथ्यों की पड़ताल की जा सकती है। इसके साथ ही महिला को लगी चोटों और उनके कारणों की भी जांच अहम मानी जा रही है।
क्षेत्राधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे मामले में आगे की उचित कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल प्रशासन का कहना है कि बिना जांच किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
सकलडीहा का यह मामला एक बार फिर पुलिस कार्रवाई के दौरान महिलाओं के साथ व्यवहार और नियमों के पालन को लेकर चर्चा में आ गया है। अब सभी की निगाहें सीओ स्तर पर चल रही जांच पर टिकी हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि महिला को चोट कैसे लगी और पुलिस पर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।



















