शिकारगंज, चंदौली | खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क
शिकारगंज क्षेत्र की भोका बंधी इन दिनों चर्चा में है—कारण, पानी की मौजूदगी नहीं बल्कि उसका समय से पहले बहाया जाना। जब अभी किसानों को सिंचाई के लिए पानी की तत्काल जरूरत नहीं है, तब बंधी से जोगिया माइनर की ओर पानी छोड़े जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्राउंड पर स्थिति यह है कि भोका बंधी में चार गेट हैं और सभी गेट तकनीकी रूप से पूरी तरह दुरुस्त नहीं बताए जा रहे।

- गेट नंबर 1 से पानी छोड़ा जा रहा है
- गेट नंबर 3 और 4 पर पानी का प्रवाह नहीं है
किसानों का कहना है कि ऐसी स्थिति में मरम्मत कार्य प्राथमिकता के साथ पहले उन गेटों पर होना चाहिए जहां पानी पहुंच ही नहीं रहा।
निरीक्षण के दौरान उठी कई अहम मांगें
बंधी डिवीजन के सहायक अभियंता मनोज पटेल के निरीक्षण के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं सीधे रखीं।
किसान विकास मंच के प्रतिनिधियों ने मांग की कि—
✔️ शिकारगंज माइनर की पश्चिमी पटरी की पैमाइश कर उसे मजबूत किया जाए
✔️ नहरों में आवश्यक कुलावों (आउटलेट) की व्यवस्था की जाए
स्थानीय किसानों के अनुसार, आउटलेट की कमी के कारण अस्थायी कटाव करना पड़ता है, जिससे पटरी कमजोर होती है और सिंचाई प्रक्रिया प्रभावित होती है।

उचेहरा माइनर की स्थिति चिंताजनक
उचेहरा माइनर को लेकर भी कई मुद्दे सामने आए हैं।
- कुछ गांवों तक पानी नियमित रूप से नहीं पहुंचता
- अंतिम छोर के करीब 500 मीटर हिस्से में माइनर की स्थिति स्पष्ट नहीं है
इससे यह संकेत मिलता है कि मरम्मत और रखरखाव की जरूरत लंबे समय से बनी हुई है।


मुख्य सवाल: समय से पहले पानी क्यों छोड़ा गया ?
किसानों का कहना है कि इस समय बंधी में पर्याप्त जल स्तर मौजूद है, जो आने वाले रोपाई सीजन में उपयोगी हो सकता है।
ऐसे में उनकी मांग है कि—
- पानी का अनावश्यक बहाव रोका जाए
- पहले सभी गेटों की मरम्मत सुनिश्चित की जाए
- जल संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए
आगे की रणनीति
किसान विकास मंच ने संकेत दिया है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे प्रशासन के समक्ष अपनी बात औपचारिक रूप से रखेंगे और उचित कार्रवाई की मांग करेंगे।
खबरी विश्लेषण
यह मुद्दा केवल एक बंधी तक सीमित नहीं है। यह जल प्रबंधन और संसाधनों के संतुलित उपयोग का सवाल है।
जब जरूरत के समय पानी नहीं पहुंचता और बिना जरूरत के बहाया जाता है, तो इससे पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
शिकारगंज की यह स्थिति बताती है कि सिर्फ संसाधन होना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनका सही समय पर सही उपयोग ही असली चुनौती है।
आपकी राय क्या है?
क्या जल प्रबंधन में स्थानीय स्तर पर और सुधार की जरूरत है? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें।

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