ब्लैक राइस, मिर्च और मेहनत अब बनाएगी गांवों को ‘ग्लोबल ब्रांड’
चंदौली | खबरी न्यूज वेव पोर्टल
जिस मिट्टी में किसान पसीना बहाता है…
जिस खेत में मां अपने बेटे के साथ धान रोपती है…
जिस गांव में सुबह बैलों की घंटियों और शाम को सिंचाई की आवाज गूंजती है…
अब वही गांव दुनिया के बाजार में अपनी पहचान बनाने जा रहा है।

सोमवार को कृषि विज्ञान केंद्र चंदौली में आयोजित “कृषि निर्यात की संभावनाओं” पर संगोष्ठी सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं थी… बल्कि यह चंदौली के किसानों के सपनों, संघर्ष और भविष्य की नई पटकथा थी।
कार्यक्रम में जब वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने “ब्लैक राइस” का नाम लिया, तो किसानों की आंखों में उम्मीद चमक उठी। वही काला चावल, जो कभी गांवों तक सीमित था, आज विदेशों के बाजार में अपनी जगह बना रहा है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र रघुवंशी ने जब कहा कि “अगर किसान गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक अपनाएं तो चंदौली कृषि निर्यात का बड़ा हब बन सकता है”, तो सभागार तालियों से गूंज उठा।
यह वही चंदौली है…
जहां किसान कभी फसल का सही दाम पाने के लिए मंडियों के चक्कर काटता था।
आज वही किसान एक्सपोर्ट, ब्रांडिंग और इंटरनेशनल मार्केट की बातें कर रहा है।
मुख्य अतिथि डॉ सी. बी. सिंह ने साफ कहा कि सरकार चाहती है कि गांव का युवा शहरों की भीड़ में मजदूरी करने न जाए, बल्कि अपने गांव में ही उद्योग लगाए, रोजगार पैदा करे और आत्मनिर्भर बने।

उनकी बातों में सिर्फ भाषण नहीं था…
बल्कि गांव की बदहाल तस्वीर बदलने का विजन था।
कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा।
60 महिला किसानों की मौजूदगी इस बात का संकेत थी कि अब गांव की महिलाएं सिर्फ खेत तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग में भी अपनी पहचान बनाना चाहती हैं।

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डॉ विवेक कुमार ने धान की नई प्रजातियों और डीएसआर तकनीक की जानकारी दी, जबकि डॉ अभयदीप गौतम ने कम लागत में अधिक उत्पादन का मंत्र दिया।
जिला उद्यान अधिकारी डॉ शैलेंद्र देव दुबे ने मिर्च निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि चंदौली की मिट्टी में “ग्लोबल मार्केट” की ताकत छिपी है।
वहीं एलडीएम सुनील कुमार भगत ने किसानों को भरोसा दिलाया कि बैंकिंग क्षेत्र उद्योग और स्वरोजगार के लिए हर संभव वित्तीय सहयोग देगा।
इस पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी तस्वीर यह रही कि किसान अब सिर्फ “उत्पादक” नहीं रहना चाहता…
वह “ब्रांड” बनना चाहता है।
वह चाहता है कि उसके खेत की फसल गांव की चौपाल से निकलकर दुबई, लंदन और अमेरिका के बाजार तक पहुंचे।
जब कार्यक्रम खत्म हुआ, तब कई किसानों के चेहरे पर मुस्कान थी…
क्योंकि पहली बार उन्हें लगा कि खेती सिर्फ गुजारे का जरिया नहीं, बल्कि सम्मान, रोजगार और समृद्धि का रास्ता भी बन सकती है।
चंदौली की मिट्टी अब सिर्फ अनाज नहीं उगाएगी…
यहां से अब सपने उगेंगे, उद्योग उगेंगे और दुनिया तक पहुंचेगी गांव की खुशबू।
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