“जहाँ शिक्षा के साथ सेवा भी हो… वही असली विद्यालय होता है”
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया‚चन्दौली। एक तरफ बच्चों की खिलखिलाहट, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों से गूंजता तीन दिवसीय समर कैंप… दूसरी तरफ पैरेंट्स टीचर मीटिंग में अभिभावकों का विश्वास… और अब “जय श्रीराम” के उद्घोष के बीच अयोध्या धाम के लिए रवाना होती मुफ्त तीर्थयात्रा बस। डैडीज इंटरनेशनल School & Hostel, बिशुनपुरा का यह दृश्य सिर्फ एक स्कूल कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को भावनात्मक रूप से जोड़ने वाली ऐसी तस्वीर बन चुका है जिसे देखकर लोग कह उठते हैं— “आज भी सेवा जिंदा है…”
शनिवार 16 मई 2026 की सुबह विद्यालय परिसर एक बार फिर श्रद्धा, उत्साह और भावनाओं से भर उठा। वातानुकूलित ट्रैवलर बस जैसे ही अयोध्या धाम के लिए तैयार हुई, श्रद्धालुओं की आंखों में चमक साफ दिखाई दी। कोई हाथ जोड़कर बस को प्रणाम कर रहा था, तो कोई इस खास पल को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर रहा था।
बिना किसी लाभ-हानि के… हर महीने अयोध्या भेज रहे हैं श्रद्धालु
आज के दौर में जहाँ छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए भी भारी शुल्क वसूला जाता है, वहीं LTP Calculator के आविष्कारक और शेयर मार्केट विशेषज्ञ डॉ. विनय प्रकाश तिवारी लगातार अपने निजी संसाधनों से लोगों को मुफ्त तीर्थयात्रा करा रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह कि इस पूरी पहल के पीछे न कोई राजनीतिक मंच है, न कोई दिखावा और न ही किसी प्रकार का व्यावसायिक लाभ।
क्षेत्र में लोग अब यह कहने लगे हैं कि— “कुछ लोग स्कूल चलाते हैं… लेकिन डॉ. विनय तिवारी संस्कारों की पाठशाला चला रहे हैं।”
जब बस रवाना हुई… कई आंखें हो गईं नम
बस रवाना होने से पहले कई बुजुर्ग यात्रियों के चेहरे पर ऐसी खुशी दिखाई दी मानो वर्षों पुराना सपना पूरा हो रहा हो। एक वृद्ध महिला ने भावुक होकर कहा—
“बेटा… सोचे भी नहीं थे कि बिना पैसे अयोध्या जाना नसीब होगा।”
यही वह पल था जिसने पूरे माहौल को भावनात्मक बना दिया। विद्यालय परिसर में मौजूद कई लोग कुछ देर तक बस को जाते हुए सिर्फ देखते रहे। शायद इसलिए क्योंकि यह सिर्फ यात्रा नहीं थी… यह लोगों की आस्था, विश्वास और भावनाओं की यात्रा थी।
डॉ. विनय तिवारी बोले— “राम केवल धर्म नहीं, जीवन का अनुशासन हैं”
इस अवसर पर डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने कहा—
“मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम त्याग, अनुशासन और परिवार के प्रति समर्पण के सबसे बड़े उदाहरण हैं। समाज को आज फिर राम के आदर्शों को समझने की जरूरत है।”
उन्होंने साफ कहा कि डैडीज स्कूल केवल किताबों तक सीमित शिक्षा देने वाला संस्थान नहीं बनना चाहता, बल्कि ऐसा केंद्र बनाना चाहता है जहाँ शिक्षा के साथ संस्कार, समाज सेवा और मानवीय संवेदनाएं भी विकसित हों।
कक्षा 6 से Financial Education… स्कूल की सोच बना रही अलग पहचान
विद्यालय के प्रधानाचार्य एम डी डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि स्कूल में कक्षा 6 से ही Structured Financial Education दी जा रही है ताकि बच्चे छोटी उम्र से ही पैसे, निवेश और आर्थिक जिम्मेदारी को समझ सकें। उन्होंने कहा—
“आज सिर्फ किताबी शिक्षा काफी नहीं है। बच्चों को जीवन की वास्तविक समझ भी जरूरी है।”
शायद यही वजह है कि डैडीज स्कूल की पहचान अब केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि आधुनिक शिक्षा और भारतीय संस्कारों के संतुलन के रूप में उभर रही है।
एक श्लोक… जो डॉ. विनय तिवारी की सेवा भावना को परिभाषित करता है
डॉ. विनय तिवारी की इस पहल पर संस्कृत का यह श्लोक बिल्कुल सटीक बैठता है—
अर्थात — वृक्ष, नदियाँ और गायें हमेशा दूसरों के लिए अपना सब कुछ देती हैं, उसी प्रकार मानव जीवन भी परोपकार के लिए होना चाहिए।
अब अयोध्या ही नहीं… आगे और भी धार्मिक यात्राओं की तैयारी
गौरतलब है कि डैडीज स्कूल की यह मुफ्त तीर्थयात्रा बस पहले अयोध्या के अलावा मथुरा भी जा चुकी है। आने वाले समय में अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए भी यात्राएं प्रस्तावित हैं। आलम यह है कि आने वाले कई महीनों तक की सीटें पहले ही आधार कार्ड की छायाप्रति जमा कराकर बुक हो चुकी हैं।
यह दृश्य बताता है कि समाज में आज भी लोग सिर्फ सुविधाएं नहीं, बल्कि संवेदनाएं तलाश रहे हैं… और शायद यही कारण है कि डैडीज स्कूल की यह पहल अब लोगों के दिलों में जगह बनाती जा रही है।
अंत में बस इतना ही—
“कुछ लोग पैसा कमाते हैं… और कुछ लोग दुआएं। डॉ. विनय तिवारी शायद उन्हीं लोगों में शामिल हो चुके हैं जिनकी पहचान अब सेवा से होती है…”