Khabari News Chandauli । एशिया के व्यस्ततम रेलवे जंक्शनों में शुमार पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर इन दिनों अवैध वेंडरिंग का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्मों और ट्रेनों में खुलेआम बाहरी लोगों द्वारा खानपान और अन्य सामानों की बिक्री किए जाने से रेलवे व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह पूरा खेल कथित तौर पर लाइसेंस की आड़ में संचालित किया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं।
सूत्रों की मानें तो स्टेशन पर संचालित कुछ अधिकृत स्टॉल संचालक ही इस पूरे नेटवर्क की मुख्य कड़ी बने हुए हैं। आरोप है कि लाइसेंसधारी अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए बड़ी संख्या में बाहरी लोगों को प्लेटफॉर्मों और ट्रेनों में वेंडरिंग के लिए भेज रहे हैं। इन लोगों के पास न तो कोई अधिकृत पहचान होती है और न ही रेलवे की वैध अनुमति, इसके बावजूद स्टेशन परिसर में इनकी आवाजाही बेखौफ जारी है।

यात्रियों का कहना है कि प्लेटफॉर्मों पर अवैध वेंडरों की बढ़ती संख्या के कारण भारी भीड़ और अव्यवस्था का माहौल बना रहता है। कई बार यात्रियों को आने-जाने में परेशानी होती है। इसके अलावा ट्रेनों में बिना पहचान वाले लोगों की लगातार आवाजाही सुरक्षा की दृष्टि से भी चिंता का विषय बनती जा रही है। यात्रियों का आरोप है कि कई बार ये वेंडर जबरन सामान बेचने का दबाव भी बनाते हैं।
सबसे बड़ा सवाल रेलवे की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहा है। प्लेटफॉर्मों पर दिनभर घूमते अवैध वेंडर क्या रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को दिखाई नहीं देते? क्या कमर्शियल विभाग को यह जानकारी नहीं कि लाइसेंस किसके नाम पर है और कारोबार कौन चला रहा है? आखिर स्टेशन प्रशासन की निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर कैसे हो गई कि खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
रेलवे सूत्रों के बीच यह चर्चा भी आम है कि बिना किसी विभागीय संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर अवैध वेंडरिंग संभव नहीं हो सकती। यही वजह है कि अब आरपीएफ, कमर्शियल विभाग, स्टेशन प्रशासन और कैटरिंग व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। लोगों का कहना है कि यदि नियमित जांच और सख्ती से कार्रवाई की जाए तो अवैध वेंडरिंग पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि स्टेशन पर अवैध वेंडरिंग के कारण साफ-सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। प्लेटफॉर्मों पर जगह-जगह गंदगी दिखाई देती है और ट्रेनों में भी अव्यवस्था बढ़ रही है। कई बार बिना गुणवत्ता जांच के खाद्य सामग्री बेची जाती है, जिससे यात्रियों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडराता है।

विडंबना यह है कि रेलवे प्रशासन समय-समय पर अवैध वेंडरों के खिलाफ अभियान चलाने और कार्रवाई करने का दावा करता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आती है। कुछ दिनों की कार्रवाई के बाद फिर वही हालात लौट आते हैं और अवैध वेंडरिंग पहले की तरह जारी रहती है। ऐसे में लोगों के बीच यह धारणा बनती जा रही है कि कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।
स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही जिन लोगों और अधिकारियों की मिलीभगत सामने आए, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे की व्यवस्था दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

डीडीयू जंक्शन देश के महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों में शामिल है, जहां प्रतिदिन हजारों यात्री आते-जाते हैं। ऐसे में स्टेशन पर पारदर्शी व्यवस्था और सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी है। अब देखना यह होगा कि रेलवे प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और अवैध वेंडरिंग के इस नेटवर्क पर कब तक प्रभावी कार्रवाई होती है।


















