बाल विवाह से बचाई गई 7 बेटियों को मिला शिक्षा का पहिया, उपजिलाधिकारी पवन कुमार यादव, ब्लॉक प्रमुख शम्भूनाथ यादव और तहसीलदार देवेंद्र ने बढ़ाया हौसला
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क | चकिया, चंदौली । कभी जिन मासूम आंखों के सामने कम उम्र में शादी की बेड़ियां डालने की कोशिश की जा रही थी, आज वही आंखें शिक्षा, आत्मनिर्भरता और उज्ज्वल भविष्य के सपनों से चमक रही हैं। चंदौली के चकिया तहसील परिसर में गुरुवार का दिन सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह बेटियों के सपनों को पंख देने वाला ऐतिहासिक और प्रेरणादायक अवसर बन गया।
मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान द्वारा संचालित “कवच परियोजना” के अंतर्गत बाल विवाह की रोकथाम और बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने के अभियान में एक नई मिसाल पेश की गई। परियोजना के तहत चिन्हित उन 7 बालिकाओं को साइकिल वितरित की गई, जिनका बाल विवाह समय रहते रोककर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया था।

यह सिर्फ साइकिल नहीं थी, बल्कि आत्मविश्वास, स्वाभिमान और सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक थी।
जब प्रशासन बना बेटियों का संरक्षक
कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित उपजिलाधिकारी चकिया पवन कुमार यादव, ब्लॉक प्रमुख शम्भूनाथ यादव तथा तहसीलदार देवेंद्र कुमार ने बालिकाओं को साइकिल प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने महसूस किया कि जब प्रशासन, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संस्थाएं एक मंच पर आ जाएं तो सामाजिक बदलाव की तस्वीर कितनी खूबसूरत हो सकती है।
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उपजिलाधिकारी पवन कुमार यादव ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि—

“बालिका शिक्षा किसी भी विकसित समाज की आधारशिला होती है। यदि बेटियां शिक्षित होंगी तो परिवार, समाज और देश स्वतः मजबूत होगा।”
उन्होंने कवच परियोजना की सराहना करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक योजना नहीं बल्कि समाज को नई दिशा देने वाला मिशन है। उन्होंने बालिकाओं को मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

“सपनों को मत छोड़ना” — एसडीएम का भावुक संदेश
अपने संबोधन में एसडीएम पवन कुमार यादव ने बालिकाओं से कहा कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, उन्हें अपने सपनों का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि—
“हर बेटी के अंदर असीम संभावनाएं हैं। शिक्षा ही वह शक्ति है जो जीवन को बदल सकती है। नियमित विद्यालय जाएं, मेहनत करें और अपने परिवार व समाज का नाम रोशन करें।”
उनके इन शब्दों ने वहां मौजूद बालिकाओं और अभिभावकों के मन में नई ऊर्जा का संचार कर दिया।
ब्लॉक प्रमुख शम्भूनाथ यादव ने दिया भरोसा, कहा— बेटियों के साथ खड़ी है सरकार
कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख शम्भूनाथ यादव ने बेहद आत्मीय अंदाज में बालिकाओं का उत्साह बढ़ाया।
उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और अधिकारों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यदि किसी भी बालिका को आगे बढ़ने में कोई समस्या आती है तो शासन-प्रशासन और स्थानीय स्तर पर हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब हर बेटी शिक्षित और आत्मनिर्भर बने।
तहसीलदार देवेंद्र ने जगाया आत्मविश्वास
कार्यक्रम में तहसीलदार देवेंद्र कुमार ने भी बालिकाओं से संवाद कर उन्हें जागरूकता और आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाया।
उन्होंने बेहद सरल और प्रभावशाली शब्दों में बालिकाओं को समझाया कि शिक्षा ही जीवन का सबसे बड़ा हथियार है।
उन्होंने कहा कि—
“आज की पढ़ी-लिखी बेटी कल का सशक्त समाज तैयार करेगी।”
तहसीलदार ने बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ जागरूक रहने और किसी भी प्रकार की सामाजिक बाधाओं से डरने के बजाय उनका सामना करने का संदेश दिया।
साइकिल नहीं, भविष्य की चाबी मिली
जब बालिकाओं के हाथों में साइकिल की चाबी सौंपी गई तो उनके चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी।
बालिकाओं ने कहा कि अब उन्हें विद्यालय आने-जाने में काफी सुविधा होगी और वे नियमित रूप से पढ़ाई जारी रखेंगी। उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि वे अपने आसपास की अन्य बच्चियों को भी शिक्षा के लिए प्रेरित करेंगी।
कार्यक्रम का यह दृश्य वहां उपस्थित लोगों के लिए बेहद भावुक और प्रेरणादायक था।
कवच परियोजना बन रही बदलाव की मजबूत ढाल
मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान द्वारा संचालित कवच परियोजना चंदौली जनपद में लगातार बाल विवाह रोकने, बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।
परियोजना से जुड़े कार्यकर्ताओं ने बताया कि बाल विवाह रोकने के बाद यदि बच्चों को शिक्षा और संसाधनों से नहीं जोड़ा जाए तो बदलाव अधूरा रह जाता है। इसी सोच के साथ बालिकाओं को साइकिल उपलब्ध कराई गई है ताकि उनकी शिक्षा किसी भी कारण से बाधित न हो।
समाज के लिए प्रेरणा बना चकिया
आज जब देश के कई हिस्सों में बाल विवाह जैसी कुप्रथाएं अब भी चुनौती बनी हुई हैं, ऐसे समय में चकिया की यह पहल पूरे समाज के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है।
यह कार्यक्रम यह संदेश देता है कि यदि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन मिलकर काम करें तो हर बेटी को उसका अधिकार, सम्मान और सुनहरा भविष्य मिल सकता है।
खबरी न्यूज की नजर
सात साइकिलें… सात मुस्कानें… सात सपने…
गुरुवार को चकिया में बांटी गई ये साइकिलें सिर्फ लोहे और रबर का ढांचा नहीं थीं, बल्कि उन बेटियों के सपनों की उड़ान थीं जिन्हें समय रहते बाल विवाह की अंधेरी सुरंग से निकालकर शिक्षा की रोशनी से जोड़ा गया।
उपजिलाधिकारी पवन कुमार यादव, ब्लॉक प्रमुख शम्भूनाथ यादव और तहसीलदार देवेंद्र कुमार की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि जब व्यवस्था बेटियों के साथ खड़ी हो जाए, तब बदलाव केवल नारे नहीं बल्कि जमीनी हकीकत बन जाते हैं।
“बेटी पढ़ेगी तो परिवार बढ़ेगा, बेटी बढ़ेगी तो समाज आगे बढ़ेगा,और समाज बढ़ेगा तो राष्ट्र मजबूत बनेगा।”
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