गुरैनी गंगा कटान को लेकर भाजपा सरकार पर बरसे मनोज सिंह डब्लू, किसानों के धरने में पहुंचकर उठाए गंभीर सवाल: Guraini Ganga Katan
Khabari News, चंदौली। चंदौली जिले के गुरैनी गांव में गंगा कटान की समस्या को लेकर चल रहे भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के अनिश्चितकालीन धरने को उस समय नया राजनीतिक बल मिला जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू धरनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने किसानों के समर्थन में आवाज बुलंद करते हुए भाजपा सरकार और संबंधित विभागों पर कटान रोकने के नाम पर करोड़ों रुपये के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
धरने को संबोधित करते हुए मनोज सिंह डब्लू ने कहा कि गुरैनी क्षेत्र में गंगा कटान की समस्या वर्षों से किसानों और ग्रामीणों के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है, लेकिन सरकार और विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कटान रोकने के लिए आवंटित धनराशि का सही उपयोग नहीं किया गया, जिसके कारण करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।

पंप कैनाल बचाने के नाम पर करोड़ों खर्च करने का आरोप
सपा नेता ने कहा कि लगभग 1.5 करोड़ रुपये मूल्य की पंप कैनाल को सुरक्षित रखने के लिए करीब 7.5 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया गया। इसके बावजूद कटान रुकने के बजाय और अधिक बढ़ गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतना बड़ा बजट खर्च किया गया तो उसका वास्तविक लाभ जमीन पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा है।
मनोज सिंह डब्लू ने आरोप लगाया कि अब बिना किसी स्पष्ट वित्तीय स्वीकृति के भी ठेकेदारों से कार्य कराया जा रहा है। उनके अनुसार यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता से दूर दिखाई देती है और इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका बढ़ती है।
तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप
धरनास्थल पर मौजूद किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गंगा कटान रोकने के लिए लगाए गए पत्थरों और सुरक्षा संरचनाओं में तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया। परिणामस्वरूप नदी में जलस्तर बढ़ते ही सुरक्षा कार्य बह गया और कटान रोकने की पूरी व्यवस्था विफल साबित हुई।
उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति यह है कि जिन पत्थरों और संरचनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, उनका अधिकांश हिस्सा अब मौके पर दिखाई भी नहीं देता। इससे स्पष्ट होता है कि कार्य की गुणवत्ता और निगरानी दोनों में गंभीर कमी रही है।

किसानों की जमीन और घरों पर मंडरा रहा खतरा
गुरैनी गांव के किसानों का कहना है कि लगातार हो रहे कटान के कारण उनकी कृषि भूमि तेजी से गंगा में समा रही है। कई परिवारों के सामने आवासीय संकट भी खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन को कई बार अवगत कराने के बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही मजबूत और वैज्ञानिक तरीके से कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया तो गांव के कई हिस्से गंभीर खतरे में पड़ सकते हैं।

भाकियू ने आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी
भारतीय किसान यूनियन के नेता दीनानाथ श्रीवास्तव ने कहा कि गुरैनी में कटान रोकने के लिए कराया गया सुरक्षा कार्य लगभग पांच वर्ष पहले शुरू हुआ था। उस समय बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन आज अधिकांश कार्य धरातल से गायब हो चुका है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को स्वयं गांव का दौरा कर वास्तविक स्थिति का आकलन करना चाहिए। किसानों की सुरक्षा, पंप कैनाल की रक्षा और ग्रामीणों के घरों को बचाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।
प्रशासन और सरकार से कार्रवाई की मांग
धरने में शामिल किसानों और सपा नेताओं ने सरकार से मांग की कि गुरैनी गंगा कटान मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही अब तक हुए कार्यों का तकनीकी ऑडिट कराया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खर्च की गई धनराशि का उपयोग किस प्रकार हुआ।
धरनास्थल पर मौजूद लोगों ने कहा कि जब तक कटान रोकने के लिए स्थायी और प्रभावी समाधान नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
Guraini Ganga Katan का मुद्दा अब केवल किसानों की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा प्रश्न बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है।



















