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जागेश्वरनाथ धाम से उठी हरित क्रांति की हुंकार, चकिया बना पर्यावरण संरक्षण का केंद्र

विधायक कैलाश आचार्य, जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह और वृक्षबंधु डॉ. परशुराम सिंह ने दिया हरियाली का संदेश, विश्व पर्यावरण दिवस पर गूंजा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान

खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क  | चकिया (चंदौली)

विश्व पर्यावरण दिवस पर जहां पूरे जनपद में पौधारोपण कार्यक्रमों की धूम रही, वहीं चकिया का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आस्था का केंद्र जागेश्वरनाथ धाम, हेतिमपुर पर्यावरण संरक्षण के संकल्प का सबसे बड़ा मंच बनकर उभरा। मंदिर परिसर में आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम ने केवल पौधे लगाने का संदेश नहीं दिया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली बचाने की एक नई चेतना भी जगाई।

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चन्द्रप्रभा रेंज द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में धर्म, समाज और पर्यावरण का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की अध्यक्षता महंत अनूप गिरी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में चकिया विधायक कैलाश खरवार, भाजपा जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह तथा संघ चालक वीरेन्द्र सिंह मौजूद रहे।

जागेश्वरनाथ धाम का परिसर पौधारोपण के साथ “हरित संकल्प” का साक्षी बना। जनप्रतिनिधियों, वन विभाग के अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और उनके संरक्षण का संकल्प भी लिया।

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चकिया विधायक कैलाश खरवार बोले— प्रकृति बची तो भविष्य बचेगा

विधायक कैलाश खरवार ने कहा कि चकिया की पहचान केवल विकास कार्यों से नहीं, बल्कि उसकी प्राकृतिक धरोहरों से भी है। चन्द्रप्रभा की वादियां, जंगल और धार्मिक स्थल इस क्षेत्र की आत्मा हैं। यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।

उन्होंने लोगों से अपील की कि पौधारोपण को केवल सरकारी कार्यक्रम न समझें, बल्कि इसे अपने परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी के रूप में देखें।

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जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह ने दिया सामाजिक भागीदारी का संदेश

भाजपा जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल वन विभाग का विषय नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से ही यह अभियान सफल होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया “एक पेड़ मां के नाम” अभियान भावनात्मक रूप से भी लोगों को प्रकृति से जोड़ने का कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मां जीवन देती है, उसी प्रकार वृक्ष जीवन को सुरक्षित रखने का कार्य करते हैं।

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जब वृक्षबंधु डॉ. परशुराम सिंह ने छेड़ी हरियाली की अलख

कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक क्षण तब आया जब पर्यावरणविद और वृक्षबंधु डॉ. परशुराम सिंह ने मंच से लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और प्रदूषण की चुनौती से जूझ रही है। ऐसे समय में वृक्षारोपण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की आवश्यकता बन चुका है। बाबा के धाम में विश्व को बचाने की याचना की गई है।

उन्होंने अपनी बात चार पंक्तियों में इस अंदाज से रखी कि पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा—

“पेड़ लगेंगे तो जीवन मुस्काएगा,हर आंगन में हरियाली आएगी।
धरती मां का ऋण चुकाना है अगर,तो हर हाथ एक पौधा जरूर लगाएगा।”

डॉ. परशुराम सिंह ने कहा कि पौधों को बचाना और बड़ा करना ही सच्ची पर्यावरण सेवा है। केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें पेड़ बनाना ही अभियान की असली सफलता होगी।

वन विभाग की पहल को मिला जनसमर्थन

कार्यक्रम का आयोजन चन्द्रप्रभा एवं राजदरी वन क्षेत्र के अधिकारियों के नेतृत्व में किया गया। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में भागीदारी करते हुए पौधारोपण किया।

मेला प्रभारी अनिल सिंह “बबलू” ने कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि प्रधान संघ अध्यक्ष रामलाल सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

जिले में 6 लाख पौधों का लक्ष्य, चकिया ने दिखाई अगुवाई

उधर जिला मुख्यालय पर राज्यसभा सांसद साधना सिंह और दर्शना सिंह ने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान का शुभारंभ किया। वन विभाग ने जनपद में छह लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

वहीं चकिया विकासखंड में एडीओ पंचायत नारायण दत्त के नेतृत्व में जागरूकता रैली निकाली गई और सभी ग्राम पंचायतों में कुल 2444 पौधों का रोपण किया गया।

लेकिन यदि कहीं सबसे अधिक उत्साह और जनभागीदारी दिखाई दी तो वह था जागेश्वरनाथ धाम का कार्यक्रम, जहां धर्मस्थल से पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचा।

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एडीओ पंचायत नारायण दत्त बोले- वृक्षारोपण नहीं, वृक्ष संरक्षण बने जनआंदोलन

 विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर चकिया विकासखंड में पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने के उद्देश्य से व्यापक जागरूकता अभियान एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। विकासखंड की सभी ग्राम पंचायतों में एक साथ पौधारोपण कर हरित चकिया के निर्माण का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम के तहत एडीओ पंचायत नारायण दत्त के नेतृत्व में एक भव्य जागरूकता रैली निकाली गई, जिसने नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाया। रैली में “एक पेड़ मां के नाम”, “हरियाली ही खुशहाली” और “पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा।

एडीओ पंचायत नारायण दत्त का दमदार बयान

“आज पर्यावरण बचाने की लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। पौधारोपण तभी सार्थक होगा जब लगाया गया हर पौधा जीवित रहकर पेड़ बने। आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, शुद्ध वातावरण और हरियाली देने के लिए हमें वृक्षारोपण के साथ-साथ वृक्ष संरक्षण को भी जनआंदोलन बनाना होगा।”

खबरी का सवाल नहीं… अब यह आमजन का सवाल है!

हर वर्ष करोड़ों पौधे लगाने के लक्ष्य पूरे होते हैं। हर साल नए रिकॉर्ड बनते हैं। इस वर्ष भी चंदौली में लाखों पौधे लगाए जाएंगे।

लेकिन चकिया की जनता अब एक नया सवाल पूछ रही है—

क्या अब समय केवल पौधे लगाने का नहीं, बल्कि उन्हें बचाने का है?

क्योंकि यदि पिछले वर्षों में लगाए गए सभी पौधे जीवित रहते, तो शायद आज गांव-गांव, सड़क-सड़क और खेत-खेत हरियाली की चादर बिछी होती।

45 डिग्री की तपिश, घटता भूजल स्तर और बढ़ता प्रदूषण यह संकेत दे रहा है कि अब आंकड़ों की नहीं, संरक्षण की जरूरत है।

जागेश्वरनाथ धाम से निकला संदेश भी यही है—

“एक पौधा लगाइए जरूर, लेकिन उसे पेड़ बनाकर दिखाइए।”

और शायद यही विश्व पर्यावरण दिवस की सबसे बड़ी सफलता भी होगी।

अंतिम बात

पौधे लगाना आसान है… फोटो खिंचवाना उससे भी आसान है…

लेकिन एक पौधे को दस साल तक बचाकर पेड़ बनाना सबसे कठिन काम है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर चकिया, जागेश्वरनाथ धाम और पूरे चंदौली ने हरियाली का संकल्प लिया है।

अब निगाहें अगले मानसून पर नहीं, अगले विश्व पर्यावरण दिवस पर होंगी।

तब पता चलेगा कि इस वर्ष लगाए गए पौधों में कितने पौधे सचमुच पेड़ बनने की राह पर हैं।

क्योंकि धरती को आंकड़े नहीं…

पेड़ चाहिए।और जनता को घोषणाएं नहीं…छांव चाहिए।

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