युवाओं ने, संवेदनहीन समाज को दिया बड़ा संदेश
घंटों तक दर्द से तड़पती रही बेजुबान नीलगाय,
लोग देखते रहे तमाशा…

फिर अधिवक्ता विनय चौहान और साथियों ने बनकर फरिश्ता बचाई जान
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क
चकिया‚चन्दौली। वह बार-बार बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन हर कोशिश नाकाम हो रही थी। घायल शरीर, कांपते पैर, आंखों में दर्द और मदद की उम्मीद। नहर के ठंडे पानी में फंसी वह बेजुबान नीलगाय घंटों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करती रही। आसपास से गुजरने वाले लोग उसे देखते रहे, कुछ ने चर्चा की, कुछ ने तस्वीरें खींचीं, लेकिन उसकी पीड़ा को कम करने के लिए कोई आगे नहीं आया।
यह मार्मिक घटना चकिया क्षेत्र की है, जहां एक घायल नीलगाय नहर में गिरकर बुरी तरह फंस गई थी। चोटों से कराह रही नीलगाय बार-बार बाहर निकलने का प्रयास कर रही थी, लेकिन नहर की गहराई और फिसलन उसके हर प्रयास को नाकाम कर रही थी। समय बीतता गया और उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

घंटों तक वह बेजुबान जानवर मदद की आस लगाए लोगों की ओर देखता रहा। उसकी आंखों में दर्द था, बेबसी थी और शायद यह सवाल भी कि आखिर इंसानियत कहां चली गई?
लेकिन कहते हैं कि दुनिया में संवेदनाएं अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।

शाम के समय अधिवक्ता विनय कुमार चौहान अपने मित्रों रामपुकार चौहान, विकास चौहान, राजू चौहान, अक्षय चौहान, विजय चौहान, रिंकू चौहान, प्रद्युम चौहान और नितिन चौहान के साथ टहलने निकले थे। तभी उन्हें सूचना मिली कि एक घायल नीलगाय नहर में फंसी हुई है और बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रही है।
सूचना मिलते ही सभी युवाओं ने बिना एक पल गंवाए घटनास्थल की ओर दौड़ लगा दी।
जब वे मौके पर पहुंचे तो दृश्य बेहद दर्दनाक था। नीलगाय पूरी तरह थक चुकी थी। शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे और लगातार संघर्ष करने के कारण उसकी ताकत जवाब देने लगी थी। ऐसा लग रहा था कि यदि कुछ देर और मदद नहीं मिली तो शायद उसकी सांसें भी थम सकती थीं।
युवाओं ने स्थिति की गंभीरता को समझा और किसी सरकारी मदद का इंतजार करने के बजाय खुद रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया। नहर की फिसलन भरी दीवारें, गहराई और घायल वन्यजीव की हालत उनके सामने बड़ी चुनौती थी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
काफी देर तक चले संघर्ष, साहस और सामूहिक प्रयास के बाद आखिरकार वह क्षण आया जब सभी युवाओं ने मिलकर घायल नीलगाय को सुरक्षित नहर से बाहर निकाल लिया।
नीलगाय के बाहर आते ही वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। मानो एक जिंदगी फिर से लौट आई हो।
इसके बाद तत्काल वन विभाग को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घायल नीलगाय को अपने संरक्षण में लेकर उपचार की व्यवस्था शुरू कर दी।
यह घटना केवल एक वन्य जीव के बचाव की कहानी नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक आईना भी है। आज जब लोग अक्सर किसी मुसीबत को देखकर नजरें फेर लेते हैं, तब कुछ युवाओं ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत अभी जिंदा है।
बेजुबान जानवर बोल नहीं सकते, अपना दर्द शब्दों में नहीं बता सकते, लेकिन उनकी पीड़ा भी उतनी ही सच्ची होती है जितनी किसी इंसान की। जरूरत सिर्फ इतनी है कि कोई उनके दर्द को समझने वाला हो।
आज अधिवक्ता विनय कुमार चौहान और उनके साथियों ने न केवल एक घायल नीलगाय की जान बचाई, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश भी दिया कि मानवता बड़े-बड़े भाषणों से नहीं, बल्कि ऐसे छोटे-छोटे नेक कार्यों से जीवित रहती है।
जब लोग तमाशा देख रहे थे, तब कुछ युवा नहर में उतरकर इंसानियत की नई इबारत लिख रहे थे। और शायद यही वह तस्वीर है, जो समाज को बेहतर बनाने की सबसे बड़ी उम्मीद भी है।
— खबरी न्यूज
“जहां खबर चलती है, वहां असर दिखता है”





















