“केवल अगली कक्षा में नहीं, जीवन में भी एक स्तर ऊपर जाइए” — डॉ. विनय प्रकाश तिवारी
खबरी न्यूज | चंदौली
गर्मी की लंबी छुट्टियों के बाद जैसे ही विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है, वैसे ही विद्यार्थियों के मन में नई उम्मीदें, नए सपने और नई चुनौतियां भी दस्तक दे रही हैं। इसी अवसर पर डैडीज़ इंटरनेशनल स्कूल, बिशुनपुरा कांटा, चंदौली के संस्थापक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने विद्यार्थियों के नाम एक ऐसा प्रेरणादायी संदेश जारी किया है, जो केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं बल्कि जीवन को सफल, अनुशासित और संस्कारित बनाने का मंत्र देता है।
डॉ. तिवारी ने अपने संदेश में कहा कि “स्कूल का पहला दिन केवल नई कक्षा का पहला दिन नहीं होता, बल्कि जीवन के अगले अध्याय का पहला पन्ना होता है।” उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे इस वर्ष केवल अगली कक्षा में जाने का लक्ष्य न रखें, बल्कि स्वयं को हर क्षेत्र में बेहतर इंसान बनाने का संकल्प लें।

उन्होंने विद्यार्थियों को पहले ही दिन से पढ़ाई के प्रति गंभीर रहने की सलाह देते हुए कहा कि जो छात्र पूरे वर्ष अनुशासन और निरंतर मेहनत के साथ आगे बढ़ते हैं, वही अंत में सफलता का इतिहास रचते हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन केवल एक प्रतिशत सुधार भी यदि लगातार किया जाए तो वर्ष के अंत तक उसका परिणाम असाधारण होता है।
“प्रश्न पूछने से मत डरिए, यही सफलता की पहली सीढ़ी है”
अपने संदेश में डॉ. तिवारी ने विद्यार्थियों को जिज्ञासु बनने की प्रेरणा देते हुए कहा कि प्रश्न पूछने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए। जो विद्यार्थी अपनी शंकाओं का समाधान खोजते हैं, वही ज्ञान की वास्तविक ऊंचाइयों तक पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ क्षणों के लिए अनजान कहलाना बेहतर है, बजाय इसके कि जीवनभर अज्ञानता बनी रहे।
मोबाइल नहीं, किताबें बनें आपकी सबसे अच्छी दोस्त
आज के डिजिटल युग में मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि तकनीक को सीखने का माध्यम बनाएं, समय बर्बाद करने का साधन नहीं। उन्होंने प्रतिदिन कम से कम तीस मिनट पुस्तक पढ़ने की सलाह दी और कहा कि पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ जीवनी, विज्ञान, इतिहास और प्रेरणादायक साहित्य का अध्ययन बच्चों के व्यक्तित्व को नई दिशा देता है।
शिक्षकों का सम्मान और अच्छे संस्कार ही असली पूंजी
डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने कहा कि शिक्षक केवल विषय नहीं पढ़ाते बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने गुरुजनों का सम्मान करने, माता-पिता का आदर करने तथा प्रतिदिन कम से कम एक अच्छा कार्य करने का संकल्प लेने का आग्रह किया। उनके अनुसार किसी मित्र की सहायता करना, जरूरतमंद की मदद करना या परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाना ही महान व्यक्तित्व की पहचान है।

हार अंत नहीं, सीखने का अवसर है
उन्होंने विद्यार्थियों को परीक्षा या प्रतियोगिता में असफल होने पर निराश न होने की सलाह देते हुए कहा कि अंक कम आ सकते हैं, लेकिन यदि सीखना नहीं छोड़ा जाए तो सफलता निश्चित है। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य को भी शिक्षा जितना ही महत्वपूर्ण बताते हुए नियमित व्यायाम, पौष्टिक भोजन और पर्याप्त नींद लेने की सलाह दी।
“Marks नौकरी दिला सकते हैं, Character सम्मान दिलाता है”
अपने प्रेरणादायक संदेश के अंत में डॉ. तिवारी ने विद्यार्थियों को जीवन का मूल मंत्र देते हुए कहा—

“अंक (Marks) आपको नौकरी दिला सकते हैं, लेकिन आपका चरित्र (Character) आपको सम्मान दिलाता है। ज्ञान आपको सफल बनाता है और अनुशासन आपको महान बनाता है।”
उन्होंने विद्यार्थियों से अपने सपनों को लिखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रतिदिन ईमानदारी से प्रयास करने का आह्वान किया। साथ ही ईश्वर से सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य और निरंतर सफलता की कामना करते हुए नए शैक्षणिक सत्र की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
डॉ. विनय प्रकाश तिवारी का यह संदेश केवल विद्यार्थियों के लिए नहीं, बल्कि अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी एक सकारात्मक प्रेरणा है। शिक्षा तभी सार्थक होती है जब वह पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ श्रेष्ठ संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और मानवीय मूल्यों का भी निर्माण करे। नए सत्र की शुरुआत में दिया गया यह संदेश निश्चित रूप से हजारों विद्यार्थियों को नई ऊर्जा, नई दिशा और नई सोच प्रदान करेगा।





















