डॉ. रामकिशोर शर्मा ‘बेहद’ स्मृति काव्य एवं सम्मान समारोह में संघर्ष, साहित्य, समाज और राजनीति का संगम; मंत्री हंसराज विश्वकर्मा का बड़ा संदेश, पर्यावरणविद् डॉ. परशुराम सिंह ने दिया प्रकृति और संस्कृति बचाने का मंत्र
विनय राय
खबरी न्यूज एक्सक्लूसिव | चकिया (चंदौली)
“पोछा लगाने वाला आज मंत्री है, आपकी बेटी की शादी के लिए सरकार देगी ₹1 लाख”
चकिया की साहित्यिक धरती रविवार को उस समय कविता, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों की गवाह बनी, जब स्थानीय जयगुरुदेव वाटिका में हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित हस्ताक्षर ख्यातिप्राप्त स्वर्गीय डॉ. रामकिशोर शर्मा ‘बेहद’ की स्मृति में भव्य काव्य एवं सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में साहित्यकारों, कवियों, पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों और समाज के विभिन्न वर्गों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। समारोह ने यह संदेश दिया कि साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने की शक्ति भी है।
स्वागत गान से हुआ आगाज, ‘मधुर’ की प्रस्तुति ने बांधा समां
कार्यक्रम का शुभारंभ चकिया के प्रतिष्ठित कवि मनोज कुमार द्विवेदी ‘मधुर’ द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण स्वागत गान से हुआ। इसके बाद स्व. डॉ. रामकिशोर शर्मा ‘बेहद’ के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। समारोह में मौजूद साहित्यकारों ने ‘बेहद’ जी के साहित्यिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी लेखनी आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

“मैं पोछा लगाता था… आज मंत्री हूं”— हंसराज विश्वकर्मा
मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने अपने जीवन संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा,
“मैं कभी पोछा लगाने का काम करता था। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मुझे मंत्री बनने का अवसर मिला। जब चाय बेचने वाला देश का प्रधानमंत्री बन सकता है और पोछा लगाने वाला मंत्री बन सकता है, तो मेहनत और ईमानदारी से कोई भी व्यक्ति अपनी मंजिल हासिल कर सकता है।”
उनके इस वक्तव्य पर सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
गरीब बेटियों के लिए ₹1 लाख की सहायता का जिक्र
अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए मिलने वाली सहायता राशि ₹50 हजार से बढ़ाकर ₹1 लाख कर दी है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि आर्थिक अभाव किसी बेटी के सम्मानजनक विवाह में बाधा न बने।

उन्होंने लोगों से सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और पात्र परिवारों तक योजनाओं को पहुंचाने की अपील भी की।
“दूसरे को उठाइए, तभी खुद आगे बढ़ पाएंगे”
मंत्री ने अपने भाषण में जीवन का सार बताते हुए कहा कि समाज में आगे बढ़ने का सबसे बड़ा रास्ता दूसरों को आगे बढ़ाना है।

उन्होंने कहा,
“जो व्यक्ति केवल अपने बारे में सोचता है, वह सीमित रह जाता है। लेकिन जो दूसरों का हाथ पकड़कर उन्हें आगे बढ़ाता है, वही समाज में स्थायी पहचान बनाता है।”
मोदी से लेकर कैलाश आचार्य तक का किया उल्लेख, 2027 का भी किया दावा
हंसराज विश्वकर्मा ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं और नेतृत्व की सराहना करते हुए स्थानीय विधायक कैलाश आचार्य के कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में फिर प्रचंड बहुमत से सरकार बनेगी।

पर्यावरणविद् डॉ. परशुराम सिंह का दमदार संदेश— “पेड़ और पुस्तक, दोनों जीवन देते हैं”
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पर्यावरणविद् एवं वृक्ष बंधु डॉ. परशुराम सिंह ने अपने प्रेरक संबोधन से कार्यक्रम को नई दिशा दी।
उन्होंने कहा,
“साहित्य केवल शब्दों की सजावट नहीं, बल्कि समाज की आत्मा है। जिस समाज की कविता जीवित रहती है, उसकी संस्कृति और संवेदनाएं भी जीवित रहती हैं। लेकिन यदि प्रकृति नहीं बचेगी तो साहित्य भी अधूरा रह जाएगा।”
डॉ. सिंह ने कहा,
“पेड़ और पुस्तक—दोनों जीवन देते हैं। एक हमें सांस देता है, दूसरा विचार देता है। इसलिए हर साहित्यकार, हर विद्यार्थी और हर जागरूक नागरिक को कलम के साथ एक पौधा भी अपनाना चाहिए।”
उन्होंने ‘एक कवि-एक पौधा’ अभियान चलाने का आह्वान करते हुए कहा कि साहित्य और पर्यावरण का रिश्ता अटूट है। आने वाली पीढ़ियों को विरासत में केवल किताबें ही नहीं, हरियाली भी मिलनी चाहिए। उनके संबोधन को श्रोताओं ने खूब सराहा।

साहित्य भवन की मांग ने खींचा ध्यान
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के साहित्यकारों ने मंत्री के सामने चकिया में एक स्थायी साहित्य भवन के निर्माण की मांग रखी। उनका कहना था कि जिले में साहित्यिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन उनके लिए कोई स्थायी मंच या भवन उपलब्ध नहीं है।
मंत्री ने इस मांग पर सकारात्मक विचार करने का भरोसा दिया।
‘बेहद’ जी के नाम पर सम्मान बढ़ाने का आश्वासन, लेकिन नई घोषणा का इंतजार
कार्यक्रम में लोगों को उम्मीद थी कि स्व. डॉ. रामकिशोर शर्मा ‘बेहद’ के नाम पर कोई नई योजना, स्मारक या साहित्यिक पुरस्कार की घोषणा होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
हालांकि मंत्री ने आश्वासन दिया कि आने वाले समय में ‘बेहद’ जी के साहित्यिक योगदान को व्यापक स्तर पर सम्मान दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
पत्रकारों का सम्मान, लाभार्थियों को मिली योजनाओं की सौगात
समारोह में स्व. डॉ. रामकिशोर शर्मा ‘बेहद’ के परिजनों ने मंत्री सहित सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र और पुष्पहार भेंट कर सम्मानित किया।
मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने भी पत्रकार बंधुओं को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।
इसी दौरान विश्वकर्मा ग्राम सम्मान योजना के अंतर्गत महिलाओं को नाई किट एवं दर्जी किट वितरित की गई। वहीं सिकंदरपुर निवासी अमीर अहमद और किशन कुमार को ऑटोमोबाइल शॉप स्थापित करने के लिए ₹5 लाख तक के ब्याज मुक्त ऋण का स्वीकृति प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।
कवियों ने बांधा समां
कवि सम्मेलन में क्षेत्र के अनेक कवियों ने ओज, वीर, श्रृंगार, हास्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं का पाठ किया। श्रोताओं ने हर प्रस्तुति का तालियों से स्वागत किया और पूरा परिसर देर तक साहित्यिक वातावरण में डूबा रहा।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
समारोह में विधायक कैलाश आचार्य, काशीनाथ सिंह, ब्लॉक प्रमुख शंभूनाथ सिंह, गौरव श्रीवास्तव, उमाशंकर सिंह, बुद्धू लाल विश्वकर्मा (पिछड़ा मोर्चा अध्यक्ष), मंटू सिंह, राघवेंद्र सिंह, कुंदन गोंड‚ रामदुलार गोंड‚ राममूरत कुश्वाहा‚प्रमोद कुश्वाहा‚शिवरतन गुप्ता‚ विजयानन्द द्विवेदी ‚ शिवरतन गुप्ता सहित अनेक जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, पत्रकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन कवि राजेश कुमार ʺराजू‘ ने किया।
खबरी न्यूज विश्लेषण एडिटर इन चीफ के०सी०श्रीवास्तव एड०
डॉ. रामकिशोर शर्मा ‘बेहद’ स्मृति काव्य एवं सम्मान समारोह केवल एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह साहित्य, सामाजिक चेतना, पर्यावरण संरक्षण और सरकारी योजनाओं को एक मंच पर जोड़ने वाला आयोजन साबित हुआ। मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने अपने संघर्ष, सरकारी योजनाओं और सामाजिक संदेशों से लोगों को प्रेरित किया, वहीं पर्यावरणविद् वृक्ष बंधु डॉ. परशुराम सिंह ने साहित्य और प्रकृति के अटूट संबंध को रेखांकित करते हुए हर नागरिक को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का संदेश दिया। साहित्यकारों द्वारा साहित्य भवन की मांग ने स्थानीय सांस्कृतिक जरूरतों को सामने रखा। कुल मिलाकर यह आयोजन चकिया की साहित्यिक विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला यादगार समारोह बन गया।





















