FACT CHECK –अधूरी टंकी, रिकॉर्ड में जलापूर्ति और उठते गंभीर सवाल
रामयश चौबे की रिपोर्ट
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क डीडीयू नगर (चंदौली)। बरहनी विकासखंड के नूरी गांव की पेयजल परियोजना को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। समाजवादी पार्टी के नेता एवं सैयदराजा के पूर्व विधायक मनोज कुमार सिंह ‘डब्लू’ ने दावा किया है कि लगभग ₹3.79 करोड़ की लागत से बन रही पानी की टंकी का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है, जबकि विभागीय अभिलेखों में परियोजना पूर्ण दर्शाकर 294 घरों में पेयजल आपूर्ति शुरू दिखा दी गई है।

यह एक गंभीर आरोप है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे अभी सत्यापित तथ्य नहीं माना जा सकता। इस समय यह आरोप और विभागीय रिकॉर्ड के बीच संभावित विसंगति का मामला है, जिसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
तथ्य क्या हैं?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार:
- पूर्व विधायक ने स्थल निरीक्षण के बाद परियोजना को अधूरा बताया।
- उन्होंने आरोप लगाया कि रिकॉर्ड में जलापूर्ति शुरू दिखा दी गई है।
- ग्रामीणों ने भी निर्माण की गुणवत्ता और प्रगति की जांच की मांग की है।
- जलकल विभाग के अधिशासी अभियंता अमित कुमार रघुवंशी ने कहा है कि यदि काम पूरा होने से पहले रिकॉर्ड में सप्लाई दर्शाई गई है तो यह गंभीर लापरवाही होगी और जांच कराई जाएगी।
अब सबसे बड़े सवाल
- क्या विभागीय पोर्टल या अभिलेखों में वास्तव में योजना को पूर्ण दिखाया गया है?
- क्या 294 घरों के कार्यात्मक नल कनेक्शन (FHTC) दर्ज हैं या केवल कनेक्शन स्वीकृत हुए हैं?
- क्या पानी की टंकी तकनीकी रूप से अधूरी होने के बावजूद किसी वैकल्पिक स्रोत से जलापूर्ति की जा रही थी?
- परियोजना की वर्तमान भौतिक प्रगति कितने प्रतिशत है?
- निर्माण एजेंसी, निगरानी अधिकारी और भुगतान की स्थिति क्या है?
- क्या कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र (Completion Certificate) जारी हुआ है?
किन दस्तावेजों की जांच जरूरी है?
इस मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए निम्न दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे:
- स्वीकृत डीपीआर (Detailed Project Report)
- कार्यादेश (Work Order)
- माप पुस्तिका (Measurement Book)
- भुगतान विवरण
- कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र
- गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट
- जल जीवन मिशन पोर्टल का रिकॉर्ड
- ग्राम पंचायत एवं संबंधित विभाग के निरीक्षण अभिलेख
FACT CHECK निष्कर्ष
स्थिति: जांच लंबित (Not Yet Verified)

अब तक उपलब्ध तथ्यों से इतना स्पष्ट है कि पूर्व विधायक ने गंभीर आरोप लगाए हैं और विभाग ने भी जांच की बात स्वीकार की है। लेकिन यह निष्कर्ष निकालना कि “भ्रष्टाचार सिद्ध हो गया” या “रिकॉर्ड फर्जी है”, अभी उचित नहीं होगा। इसकी पुष्टि केवल आधिकारिक दस्तावेजों, तकनीकी निरीक्षण और निष्पक्ष जांच के बाद ही की जा सकती है।
खबरी न्यूज की ओर से यह मामला सार्वजनिक हित से जुड़ा है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी धन के उपयोग और पेयजल योजनाओं की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करेगा। वहीं यदि विभाग दस्तावेजों के आधार पर अपने दावों को सही साबित करता है, तो स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी। इसलिए अंतिम निष्कर्ष से पहले तथ्यों, दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट का इंतजार करना ही जिम्मेदार पत्रकारिता की पहचान है।























