खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क
चकिया (चंदौली)। पचवनियां फाल पर बन रहे निर्माणाधीन छलका (बीयर) की ऊंचाई को लेकर किसानों का विरोध अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। रविवार को धरना स्थल पर किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आया, जब भारतीय किसान मंच के नेता लालचंद एडवोकेट और भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष सतीश चौहान ने आंदोलन को समर्थन देते हुए स्पष्ट घोषणा की कि यदि बीयर की ऊंचाई का मानक के अनुरूप संशोधन नहीं किया गया तो यह धरना मांग पूरी होने तक अनिश्चितकाल जारी रहेगा।

‘अब आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए’
धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने कहा कि वर्षों से सिंचाई की समस्या झेल रहे क्षेत्र के किसानों के धैर्य की परीक्षा अब समाप्त हो चुकी है। अब केवल वादों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर समाधान चाहिए। किसान नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि किसानों के हक और उनकी फसलों को बचाने की लड़ाई है।
डीएम को सौंपा ज्ञापन, रखी तकनीकी समस्या
धरना स्थल पर किसानों ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि यह मामला कर्मनाशा सिस्टम की लेफ्ट कैनाल के पचवनियां फाल से जुड़ा हुआ है। ज्ञापन में कहा गया कि यदि वर्तमान डिजाइन में संशोधन नहीं किया गया तो टेल क्षेत्र के किसानों तक पर्याप्त पानी पहुंचाना मुश्किल होगा।
1390 क्यूसेक की क्षमता, लेकिन 400 क्यूसेक पर सिमटी व्यवस्था
किसानों ने बताया कि कर्मनाशा सिस्टम की लेफ्ट कैनाल की डिजाइन क्षमता 1390 क्यूसेक जल प्रवाह की है, लेकिन नहर की जर्जर स्थिति के कारण सिंचाई विभाग महज 400 क्यूसेक पानी ही छोड़ पा रहा है। उनका कहना है कि यदि पूरी क्षमता से पानी छोड़ा गया तो मोहम्मदाबाद क्षेत्र के दक्षिण की कमजोर संरचना के कारण नहर टूटने का खतरा बना रहेगा।
16 करोड़ की योजना फाइलों में, किसान परेशान
धरना दे रहे किसानों ने बताया कि नहर को मजबूत बनाने के लिए सिंचाई विभाग शासन से लगभग 16 करोड़ रुपये की मांग पहले ही कर चुका है, लेकिन अभी तक धनराशि स्वीकृत नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि जब तक पूरी लेफ्ट कैनाल का सुदृढ़ीकरण नहीं होगा, तब तक सिंचाई संकट का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

हजारों किसानों की सिंचाई इस फाल पर निर्भर
किसानों ने बताया कि पचवनियां फाल से गौरी रजवाहा तथा केराडीह माइनर संचालित होती हैं, जिनके माध्यम से ठेकहा, बड़गांव, शिवपुर, इसरौलिया सहित अनेक गांवों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचता है। यदि फाल की ऊंचाई पर्याप्त नहीं रही तो टेल क्षेत्र के किसानों को समय पर पानी नहीं मिल सकेगा और खेती गंभीर रूप से प्रभावित होगी।
तत्काल राहत का भी सुझाया रास्ता
किसान नेताओं ने कहा कि स्थायी समाधान के लिए शासन को शीघ्र धन आवंटित कर पूरी लेफ्ट कैनाल को मजबूत कराना होगा। फिलहाल तत्काल राहत के रूप में फाल पर ऊंचे पटरे लगाकर पानी का स्तर बढ़ाया जाए, ताकि टेल तक पानी पहुंच सके और किसानों की फसलें सूखने से बच सकें।

किसान नेताओं का दो टूक संदेश
भारतीय किसान मंच के नेता लालचंद एडवोकेट और भाकियू (टिकैत) के जिलाध्यक्ष सतीश चौहान ने कहा कि किसानों की मांग पूरी तरह जनहित और तकनीकी आधार पर है। यदि प्रशासन ने समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा तथा धरना मांग पूरी होने तक जारी रहेगा।
अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी निगाहें
धरना समाप्त होने के बाद भी किसानों का रुख स्पष्ट रहा कि अब वे केवल आश्वासन पर भरोसा नहीं करेंगे। पूरे क्षेत्र की निगाहें जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो पचवनियां फाल का यह आंदोलन जिले के सबसे बड़े किसान आंदोलनों में शामिल हो सकता है। किसानों का कहना है कि उनका संघर्ष केवल पानी के लिए नहीं, बल्कि अपनी खेती, भविष्य और अधिकारों की रक्षा के लिए है।






















