, बोले— “लो वोल्टेज और ट्रिपिंग से बर्बाद हो रही खेती, अब नहीं करेंगे समझौता”
10 एमवीए ट्रांसफार्मर लगाने, बिजली का रूट जंगल से हटाकर सड़क मार्ग से करने और उपकेंद्र की क्षमता बढ़ाने की मांग, ज्ञापन लेने पहुंचे विद्युत विभाग के अधिकारी
खबरी न्यूज चकिया (चंदौली)। रोपाई के व्यस्त सीजन में बिजली की लगातार कटौती, लो वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग से परेशान किसानों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। किसान विकास मंच के बैनर तले सोमवार को सैकड़ों किसानों ने विद्युत उपकेंद्र इलिया पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर बिजली व्यवस्था के खिलाफ जोरदार आवाज बुलंद की। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
“कनेक्शन बढ़ रहे, लेकिन क्षमता नहीं”— किसानों का बड़ा आरोप
धरने को संबोधित करते हुए किसान विकास मंच के प्रवक्ता जय नाथ सिंह ने कहा कि सरकार लगातार नए बिजली कनेक्शन वितरित कर रही है, लेकिन उसी अनुपात में विद्युत उपकेंद्रों की क्षमता नहीं बढ़ाई जा रही है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। खेतों में सिंचाई के समय पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिल पा रहा है, जिससे मोटरें नहीं चल रही हैं और धान की रोपाई प्रभावित हो रही है।

उन्होंने कहा कि इलिया पावर हाउस को मिलने वाली बिजली चकिया के जंगल और खेतों से होकर गुजरती है, जिसके कारण तेज आंधी, बारिश और पेड़ों की टहनियों के संपर्क में आने से आए दिन आपूर्ति बाधित हो जाती है।
जंगल से नहीं, सड़क मार्ग से लाई जाए बिजली
किसानों ने मांग उठाई कि बिजली की लाइन का रूट डायवर्ट कर सड़क मार्ग से जोड़ा जाए, ताकि प्राकृतिक बाधाओं के कारण होने वाली ट्रिपिंग और कटौती से स्थायी राहत मिल सके। किसानों का कहना था कि यदि बिजली लाइन सड़क किनारे लाई जाती है तो रखरखाव भी आसान होगा और आपूर्ति अधिक भरोसेमंद बनेगी।
“10 एमवीए ट्रांसफार्मर लगे बिना खत्म नहीं होगा आंदोलन”
संगठन मंत्री राम अवध सिंह ने कहा कि किसान अपने खेतों का जरूरी काम छोड़कर केवल इसलिए धरने पर बैठे हैं क्योंकि बिजली की समस्या अब असहनीय हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इलिया क्षेत्र में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, इसलिए नया 10 एमवीए ट्रांसफार्मर लगाया जाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक उपकेंद्र की क्षमता नहीं बढ़ेगी और किसानों को गुणवत्तापूर्ण बिजली नहीं मिलेगी, तब तक किसान विकास मंच का संघर्ष जारी रहेगा।
गूंजे नारे, बिजली व्यवस्था पर उठे सवाल
धरना स्थल पर किसानों ने पूरे जोश के साथ नारे लगाए—

“किसान एकता जिंदाबाद!”
“इलिया पावर हाउस की क्षमता बढ़ाओ!”
“लो वोल्टेज और ट्रिपिंग बंद करो!”
धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने कहा कि खेती पूरी तरह बिजली पर निर्भर हो चुकी है, लेकिन विभाग की लापरवाही से हर सीजन में उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
विद्युत विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजने का दिया भरोसा
धरने के दौरान किसानों का ज्ञापन लेने के लिए सहायक अभियंता अजय सिंह एवं अवर अभियंता विनोद यादव मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को गंभीरता से शासन तक पहुंचाया जाएगा तथा बजट आवंटन और उपकेंद्र की क्षमता वृद्धि के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।
हालांकि किसानों ने स्पष्ट कर दिया कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए।
डीएम और विधायक को भी सौंपा जाएगा ज्ञापन
प्रवक्ता जय नाथ सिंह ने बताया कि किसान विकास मंच शीघ्र ही जिलाधिकारी चंदौली, चकिया विधायक तथा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष क्षत्रबली सिंह को भी ज्ञापन देकर इस गंभीर समस्या के समाधान की मांग करेगा, ताकि किसानों को स्थायी राहत मिल सके।
बड़ी संख्या में जुटे किसान
धरने में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। प्रमुख रूप से जयनाथ सिंह, जवाहरलाल यादव, इकलाख अहमद, सुरेश मौर्य, इंद्रदेव यादव, जुल्मी तिवारी, चंद्रशेखर सिंह, मलिक चौबे, अवध नारायण सिंह, यशवंत सिंह, प्रेम गिरी, श्री प्रकाश मौर्य, बंशलोचन मौर्य, अशोक कुमार द्विवेदी, नंदलाल मौर्य, विकेश सिंह, विजय शंकर सिंह, अमन सिंह, अनिल मौर्य, वीरेंद्र कुमार मौर्य, अनिल पांडे, श्याम सुंदर, रमेश पांडेय, राघवेंद्र सिंह, पप्पू सिंह, दीनदयाल सिंह, दयाराम, लक्ष्मण सिंह, जमुना सिंह, गोकुल पांडे, जगदीश मौर्य सहित अनेक किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मुन्नन पांडेय ने की, जबकि संचालन संगठन मंत्री राम अवध सिंह ने किया।
खबरी न्यूज विश्लेषण
इलिया क्षेत्र में बिजली की समस्या लंबे समय से किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। धान की रोपाई के महत्वपूर्ण समय में लगातार बिजली कटौती, लो वोल्टेज और ट्रिपिंग से सिंचाई प्रभावित हो रही है। यदि उपकेंद्र की क्षमता बढ़ाने, 10 एमवीए ट्रांसफार्मर स्थापित करने तथा बिजली लाइन के रूट परिवर्तन जैसे मुद्दों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।
























