Pachvaniya Chhalka Height Increase : चार दिन के आंदोलन के बाद किसानों की बड़ी जीत, पचवनिया छलका की ऊंचाई बढ़ाने का कार्य शुरू
चकिया, चंदौली। जनपद चंदौली के चकिया तहसील अंतर्गत ग्राम पचवनिया के किसानों का लंबा संघर्ष आखिरकार रंग लाता दिखाई दे रहा है। निर्माणाधीन पुल पर बने छलका (ओवरफ्लो संरचना) की कम ऊंचाई के कारण महीनों से सिंचाई संकट झेल रहे किसानों को बड़ी राहत मिली है। जिला प्रशासन के निर्देश पर शनिवार, 18 जुलाई को छलका की ऊंचाई बढ़ाने के लिए लोहे की प्लेट लगाकर अस्थायी व्यवस्था का कार्य शुरू करा दिया गया।
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र के किसानों में खुशी का माहौल है। उनका कहना है कि यदि कार्य समय पर पूरा हो गया तो नहर का पानी आसानी से खेतों तक पहुंचेगा और धान की रोपाई के साथ-साथ खरीफ फसलों की सिंचाई में राहत मिलेगी।

कम ऊंचाई बना रही थी सिंचाई में सबसे बड़ी बाधा
पचवनिया में निर्माणाधीन पुल पर बने छलका की ऊंचाई अपेक्षाकृत कम होने के कारण नहर का पानी आगे नहीं बढ़ पा रहा था। परिणामस्वरूप नहर से जुड़े दर्जनों गांवों के खेत सूखे पड़े थे और किसान सिंचाई के लिए वैकल्पिक साधनों पर निर्भर होने को मजबूर थे।
किसानों का आरोप था कि निर्माण के दौरान तकनीकी खामियों की ओर कई बार ध्यान दिलाया गया, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने समय रहते इस पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।
चार दिन तक चला धरना, फिर प्रशासन ने किया हस्तक्षेप
समस्या के समाधान की मांग को लेकर किसानों ने लगातार चार दिनों तक धरना-प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान किसानों ने स्पष्ट कहा कि जब तक सिंचाई व्यवस्था बहाल नहीं होगी, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
धरना स्थल पर पहुंचे चकिया तहसीलदार देवेंद्र कुमार ने किसानों से वार्ता की और उन्हें भरोसा दिलाया कि एक सप्ताह के भीतर अस्थायी समाधान के तौर पर छलका की ऊंचाई बढ़ाने का कार्य शुरू करा दिया जाएगा। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद किसानों ने अपना आंदोलन समाप्त किया।

डीएम के सामने रखा गया पूरा मामला
किसानों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखा। वे उपजिलाधिकारी (SDM), जिलाधिकारी (DM) चंदौली और सिंचाई मंत्री तक अपनी बात पहुंचा चुके थे।
किसान दिवस के अवसर पर किसानों ने जिलाधिकारी चंदौली के समक्ष दस्तावेजों और तकनीकी तथ्यों के साथ अपनी समस्या रखी। किसानों ने बताया कि छलका की कम ऊंचाई के कारण नहर का जलस्तर खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे खेती बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल समाधान के निर्देश दिए, जिसके बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और सिंचाई व्यवस्था बहाल करने की दिशा में कार्रवाई शुरू कराई गई।
सिंचाई विभाग पर किसानों ने लगाए गंभीर आरोप
आंदोलन के दौरान किसानों ने सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) और एसडीओ पर भी गंभीर आरोप लगाए। किसानों का कहना था कि अधिकारियों ने उनकी मांग को गंभीरता से लेने के बजाय यह कह दिया कि “छलका की ऊंचाई नहीं बढ़ेगी, आप लोग लिफ्ट लगाकर पानी खेतों तक ले जाइए।”
इस बयान से किसानों में भारी नाराजगी फैल गई थी। उनका कहना था कि जब नहर सिंचाई के लिए बनाई गई है, तो किसानों को अतिरिक्त खर्च कर लिफ्ट सिंचाई करने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है।
लोहे की प्लेट से शुरू हुआ अस्थायी समाधान
जिलाधिकारी के निर्देश और तहसील प्रशासन की निगरानी में शनिवार को लोहे की प्लेट लगाकर छलका की ऊंचाई बढ़ाने का कार्य प्रारंभ कराया गया। प्रशासन का कहना है कि यह फिलहाल एक अस्थायी व्यवस्था है, जिससे तत्काल सिंचाई की समस्या दूर की जा सके।
किसानों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह उनके लंबे संघर्ष की पहली सफलता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे स्थायी तकनीकी समाधान की मांग पर कायम रहेंगे ताकि भविष्य में दोबारा ऐसी समस्या उत्पन्न न हो।
स्थायी समाधान की उम्मीद
क्षेत्र के किसानों का मानना है कि यदि नहर प्रणाली को तकनीकी मानकों के अनुसार स्थायी रूप से दुरुस्त किया जाता है तो हजारों बीघा कृषि भूमि को नियमित सिंचाई का लाभ मिलेगा। फिलहाल प्रशासन द्वारा शुरू किया गया कार्य किसानों के लिए राहत लेकर आया है, लेकिन अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि स्थायी समाधान कब तक धरातल पर उतरता है।
























