चकिया, चंदौली। बिजली विभाग की लापरवाही का खामियाजा आखिर आम ग्रामीण कब तक भुगतेंगे? क्या विभाग किसी बड़ी जनहानि के बाद ही अपनी जिम्मेदारी समझेगा? चंदौली जनपद के चकिया तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम अर्जी-कृष्णाअर्पण पुर की दलित बस्ती में रहने वाले परिवार इन दिनों ऐसे ही गंभीर सवालों के बीच जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। बस्ती के ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन विद्युत लाइन ग्रामीणों के लिए किसी खुले खतरे से कम नहीं है। घरों के बेहद करीब और कम ऊंचाई पर गुजर रहे खुले बिजली के तारों को लेकर लोगों में दहशत का माहौल है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग की उदासीनता के चलते यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर अलग-अलग वर्षों में दो बार हादसे हो चुके हैं। वर्ष 2023 में दो ग्रामीण करंट से झुलसे थे, जबकि वर्ष 2026 में भी दो युवक इसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गए। इसके बावजूद ग्रामीणों को अब तक सुरक्षित माहौल नहीं मिल सका है।

बस्ती के ऊपर मौत बनकर गुजर रही 11 हजार वोल्ट की लाइन
अर्जी-कृष्णाअर्पण पुर की दलित बस्ती के लोगों के अनुसार उनके घरों के ऊपर से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन विद्युत लाइन गुजरती है। तारों की कम ऊंचाई और घरों से नजदीकी के कारण लोगों को हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति सामान्य जीवन को भी जोखिम भरा बना रही है।
बस्ती में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को इन तारों के बीच सावधानी बरतकर रहना पड़ता है। घरों की छतों पर जाने, आसपास के खुले स्थानों में काम करने और अन्य घरेलू गतिविधियों के दौरान भी लोगों के मन में डर बना रहता है। अभिभावकों को सबसे अधिक चिंता अपने बच्चों की है, क्योंकि खेलते-कूदते बच्चे अनजाने में किसी खतरे के करीब पहुंच सकते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की आपूर्ति के लिए लगाए गए तारों से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए, लेकिन यहां स्थिति इसके उलट नजर आ रही है। जिस विद्युत लाइन से घरों को रोशन होना चाहिए, वही अब परिवारों की चिंता का कारण बन गई है।
2023 में विंदा और सरीवन झुलसे, फिर भी नहीं हुआ स्थायी समाधान
ग्रामीणों के मुताबिक इस खतरनाक विद्युत लाइन का खतरा कोई नया नहीं है। वर्ष 2023 में ही बस्ती के निवासी विंदा और सरीवन हाईटेंशन तार की चपेट में आकर करंट से झुलस गए थे। इस घटना के बाद बस्ती में भय का माहौल पैदा हो गया था। ग्रामीणों ने बिजली विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर तारों की ऊंचाई बढ़ाने और सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम करने की मांग की थी।

लोगों को उम्मीद थी कि पहली दुर्घटना के बाद विभाग इस समस्या को गंभीरता से लेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
ग्रामीणों के मन में आज भी यह सवाल है कि जब वर्ष 2023 में ही इस लाइन से लोगों की जान पर बन आई थी, तब विभाग ने भविष्य में होने वाले हादसों को रोकने के लिए समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?

2026 में फिर हुआ हादसा, चुनमुन और अंकुर करंट से झुलसे
पहली घटना के बाद भी हालात नहीं सुधरे और वर्ष 2026 में एक बार फिर इस हाईटेंशन लाइन ने दो परिवारों को दहशत में डाल दिया। ग्रामीणों के अनुसार इस बार सरीवन के पुत्र चुनमुन और मुन्ना के पुत्र अंकुर बिजली के करंट की चपेट में आकर झुलस गए।
दोबारा हुई इस घटना ने पूरी बस्ती को झकझोर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों युवकों की जान बच गई, लेकिन इस हादसे ने भविष्य को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
लोगों का सवाल है कि जब एक ही बस्ती में एक ही हाईटेंशन लाइन से दो अलग-अलग वर्षों में हादसे हो चुके हैं, तो फिर भी विभागीय स्तर पर स्थायी सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या किसी तीसरी घटना के बाद ही अधिकारियों की नींद खुलेगी?
ग्रामीणों का मानना है कि समय रहते विद्युत लाइन की स्थिति का तकनीकी निरीक्षण कराकर उचित व्यवस्था की जाती तो दोबारा ऐसी दुर्घटना की आशंका को कम किया जा सकता था।
बच्चों और परिवारों की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चिंता
बस्ती के लोगों के लिए यह समस्या केवल बिजली के तारों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके रोजमर्रा के जीवन और परिवारों की सुरक्षा से जुड़ गई है। ग्रामीणों के अनुसार घरों के ऊपर से गुजरते तारों के कारण छतों पर जाना भी जोखिम भरा महसूस होता है। बच्चों को बार-बार समझाना पड़ता है कि वे बिजली के तारों के आसपास न जाएं।
बरसात और नमी के मौसम में भी लोगों की चिंता बढ़ जाती है। परिवार के सदस्य हर समय सतर्क रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी अप्रिय घटना के बाद मुआवजे या जांच से ज्यादा जरूरी है कि पहले ही खतरे को दूर कर दिया जाए।
उनका कहना है कि बिजली विभाग का दायित्व केवल विद्युत आपूर्ति करना नहीं, बल्कि विद्युत व्यवस्था को सुरक्षित बनाए रखना भी है। यदि किसी बस्ती के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन लोगों की जान के लिए खतरा बन रही है, तो उसकी जांच और समाधान प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।
डीएम और अधिशासी अभियंता से लगाई न्याय और सुरक्षा की गुहार
लगातार बनी समस्या और पूर्व में हो चुकी दुर्घटनाओं से परेशान ग्रामीणों ने अब जिलाधिकारी चंदौली तथा बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करें और तकनीकी मानकों के अनुरूप विद्युत लाइन को सुरक्षित बनवाएं।
ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि बस्ती के ऊपर से गुजर रही खतरनाक हाईटेंशन लाइन को वहां से हटाकर किसी सुरक्षित मार्ग से स्थानांतरित किया जाए। यदि तकनीकी रूप से संभव हो तो लाइन को भूमिगत करने की व्यवस्था भी की जाए। इसके साथ ही तारों की ऊंचाई, उनकी स्थिति और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच कर आवश्यक सुधार कराया जाए।
लोगों का कहना है कि जब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक बस्ती के परिवारों के सिर पर खतरे की तलवार लटकती रहेगी। इसलिए प्रशासन को मामले में केवल आश्वासन देने के बजाय मौके पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
क्या तीसरे हादसे का इंतजार कर रहा है बिजली विभाग?
अर्जी-कृष्णाअर्पण पुर की दलित बस्ती में हाईटेंशन लाइन से जुड़ा मामला अब विभागीय कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वर्ष 2023 में दो लोगों के झुलसने और वर्ष 2026 में फिर दो युवकों के करंट की चपेट में आने के बाद भी यदि ग्रामीणों को सुरक्षा की चिंता सता रही है, तो यह स्थिति निश्चित रूप से गंभीर है।
ग्रामीणों की मांग है कि उनकी शिकायत को सामान्य आवेदन समझकर फाइलों में सीमित न रखा जाए। यह मामला सीधे लोगों की जिंदगी से जुड़ा हुआ है। बिजली विभाग के अधिकारियों को तत्काल स्थलीय निरीक्षण कर तकनीकी खामियों को दूर करना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने सदस्य को खोने का दर्द न झेलना पड़े।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिलाधिकारी और बिजली विभाग के अधिकारी ग्रामीणों की पुकार सुनकर समय रहते कार्रवाई करेंगे या फिर इस बस्ती को किसी बड़े हादसे का इंतजार करना पड़ेगा? फिलहाल ग्रामीण प्रशासन की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं।


















