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जर्जर मगरौर पुल पर धड़ल्ले से दौड़ रहे ओवरलोड वाहन, हादसे का खतरा बढ़ा

चकिया-सैदूपुर मार्ग से बिहार जाने का प्रमुख रास्ता, गिट्टी-बालू लदे भारी वाहनों की आवाजाही से पुल की सुरक्षा पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों ने उठाई तकनीकी जांच और ओवरलोडिंग पर रोक लगाने की मांग, जिम्मेदार विभागों की निगरानी पर भी सवाल

 खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क। चकिया, चंदौली। चकिया से सैदूपुर होते हुए बिहार की ओर जाने वाले प्रमुख मार्ग पर स्थित मगरौर पुल की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पुल की जर्जर हालत के बावजूद इस पर गिट्टी और बालू लदे भारी वाहनों की आवाजाही लगातार जारी है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहनों के गुजरने से पुल की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते पुल की स्थिति का तकनीकी आकलन और आवश्यक सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में गंभीर दुर्घटना का खतरा पैदा हो सकता है।

जर्जर पुल पर भारी वाहनों का लगातार दबाव

मगरौर पुल चकिया-सैदूपुर मार्ग पर आवागमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसी रास्ते से बिहार की ओर आने-जाने वाले वाहनों का संचालन होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर गिट्टी और बालू लदे भारी वाहनों की संख्या काफी अधिक रहती है। ऐसे में पुल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए वाहनों के भार और उनकी आवाजाही पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।

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यदि पुल की संरचना पहले से कमजोर है, तो निर्धारित क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों का लगातार गुजरना उसकी सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। हालांकि, पुल की वास्तविक तकनीकी स्थिति और उसकी भार-वहन क्षमता की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।

ओवरलोडिंग पर नियंत्रण को लेकर सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि भारी और कथित तौर पर ओवरलोड वाहनों की आवाजाही के बावजूद प्रभावी निगरानी नजर नहीं आ रही है। लोगों का सवाल है कि यदि पुल की स्थिति संवेदनशील है, तो वहां से गुजरने वाले वाहनों के भार की जांच और यातायात नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

ओवरलोडिंग केवल सड़क और पुल को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं है, बल्कि यह दूसरे वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय आवश्यक है, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके और संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

तकनीकी जांच और सुरक्षा उपाय जरूरी

मगरौर पुल को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच सबसे जरूरी कदम इसकी तकनीकी जांच कराना है। संबंधित विभाग को पुल के पिलर, स्लैब, जोड़, सतह और अन्य संरचनात्मक हिस्सों की स्थिति का परीक्षण कराना चाहिए। जांच में यदि कोई गंभीर खामी सामने आती है, तो उसके अनुरूप मरम्मत, भार प्रतिबंध अथवा वैकल्पिक यातायात व्यवस्था पर निर्णय लिया जाना चाहिए।

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इसके साथ ही, निर्धारित सीमा से अधिक भार लेकर चलने वाले वाहनों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। जरूरत पड़ने पर पुल के दोनों ओर भार सीमा और सुरक्षा संबंधी सूचना बोर्ड लगाने के साथ नियमित निगरानी की व्यवस्था भी की जा सकती है।

हादसे से पहले जागेगा प्रशासन या इंतजार रहेगा?

मगरौर पुल से प्रतिदिन गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा को देखते हुए इस मामले को केवल सामान्य यातायात समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन पुल की स्थिति का तत्काल आकलन कराए और सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए।

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अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि संबंधित विभाग पुल की वास्तविक स्थिति की जांच कब कराते हैं और कथित ओवरलोडिंग पर नियंत्रण के लिए क्या कार्रवाई होती है। समय रहते जांच, निगरानी और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाना इसलिए जरूरी है, ताकि किसी संभावित हादसे से पहले ही जोखिम को कम किया जा सके।

खबरी न्यूज का जनहित सवाल: क्या मगरौर पुल की भार-वहन क्षमता की तकनीकी जांच कराई गई है? यदि हां, तो उसकी रिपोर्ट के आधार पर भारी वाहनों के संचालन को लेकर क्या निर्णय लिया गया है? संबंधित विभागों की स्पष्ट जानकारी और समयबद्ध कार्रवाई से ही इस मामले में स्थिति सामने आ सकेगी।

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