“आंधी ने खोली बिजली विभाग की पोल”
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चंदौली:
तेज आंधी-बारिश ने एक बार फिर पूरे सिस्टम की असलियत सामने ला दी है। अमड़ा विद्युत उपकेंद्र से जुड़े 140 से ज्यादा गांव पिछले 55-60 घंटों से घोर अंधेरे में डूबे हैं। हालात इतने खराब हैं कि लोगों के घरों में न पानी की व्यवस्था है, न मोबाइल चार्जिंग, और न ही बच्चों की पढ़ाई का कोई रास्ता बचा है। सवाल सीधा है—हर साल वही तबाही, लेकिन तैयारी जीरो क्यों?
“अंधेरा ही मिला सरकारी तोहफा?”
अमड़ा गांव की सुनीता देवी का गुस्सा फूट पड़ा—
“बच्चों की पढ़ाई ठप, फ्रिज का सारा सामान खराब, और हैंडपंप भी जवाब दे चुके हैं। 60 घंटे का अंधेरा अब सहन नहीं हो रहा।”

वहीं धीना के किसान रामप्रकाश सिंह ने दर्द बयां किया—
“धान की नर्सरी सूख रही है, मोटरें बंद हैं, पंखा तक नहीं चल रहा। खेती कैसे चलेगी? सरकार सिर्फ वादे करती है, जमीन पर कुछ नहीं।”
थाना भी बना ‘ब्लैकआउट जोन’
स्थिति इतनी भयावह है कि धीना थाना तक अंधेरे में डूबा है। पुलिसकर्मी टॉर्च की रोशनी में काम करने को मजबूर हैं। यह सिर्फ बिजली संकट नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था पर भी खतरे का संकेत है।
हर साल वही कहानी, जिम्मेदारी कौन लेगा?
- हर साल आंधी में 40-60 बिजली खंभे गिरते हैं
- 100+ गांव प्रभावित होते हैं
- जिले में 500 किमी जर्जर तार, लेकिन बदले गए सिर्फ 30%
- पेड़ों की छंटाई नाममात्र—फाल्ट पर फाल्ट
- हेल्पलाइन 191 पर सैकड़ों शिकायतें—लेकिन समाधान नदारद
विशेषज्ञ मानक कहता है कि 24 घंटे में बिजली बहाल होनी चाहिए, लेकिन यहां 60 घंटे बीतने के बाद भी कोई ठोस एक्शन नहीं दिख रहा।
प्रशासन का पुराना बहाना—मौसम सुधरने दो”
जिला प्रशासन और बिजली विभाग का रटा-रटाया जवाब—मौसम ठीक होते ही बिजली बहाल कर दी जाएगी।”
लेकिन जनता पूछ रही है—क्या हर बार मौसम ही जिम्मेदार है, या विभाग की लापरवाही?

समाधान क्या है? या सिर्फ दिखावा?
अगर सिस्टम सच में सुधारना है तो ये कदम जरूरी हैं—
✔️ जर्जर तारों को अंडरग्राउंड केबल में बदला जाए
✔️ डिजिटल फाल्ट मॉनिटरिंग सिस्टम लगे
✔️ आंधी से पहले पेड़ों की अनिवार्य छंटाई अभियान
✔️ “उज्ज्वल भारत” योजना को कागज से जमीन पर उतारा जाए
जनता का अल्टीमेटम
अब ग्रामीणों का सब्र जवाब दे रहा है। लोग सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। उनका साफ संदेश—
“बिजली दो, वरना जवाब दो!”

खबरी न्यूज का सीधा सवाल
क्या सरकार का नया तोहफा यही है—
👉 “फ्री अंधेरा और वाटर सेविंग योजना?”
या फिर जिम्मेदार अधिकारी अब भी नींद में हैं?
✍️ खबरी न्यूज वेव पोर्टल की ग्राउंड रिपोर्ट
यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि सिस्टम को आईना है। अगर अब भी सुधार नहीं हुआ, तो अगली आंधी सिर्फ तार ही नहीं, भरोसा भी गिरा देगी।




















