🚨 BREAKING NEWS | चंदौली से उठी हरित क्रांति की हुंकार!
‘वृक्ष बंधु’ डॉ. परशुराम सिंह बने आकर्षण का केंद्र, किसानों को दिया प्रकृति बचाने का मंत्र
केंद्र सरकार के 12 वर्ष के सुशासन पर भव्य आयोजन, 500 किसानों ने लिया प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प
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“500 किसानों का संकल्प: अब खेतों में नहीं बहेगा जहर, प्राकृतिक खेती बनेगी पहचान”

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“केंद्र सरकार के 12 साल पूरे, चंदौली में प्रकृति बचाने का महाअभियान शुरू”
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“धरती मां को बचाने निकले किसान, चंदौली में गूंजा प्राकृतिक खेती का मंत्र”
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“जब भारत माता ने सुनाई धरती की पीड़ा, भावुक हो उठे किसान और अधिकारी”
खबरी न्यूज | चंदौली ब्यूरो

चंदौली की धरती पर गुरुवार को एक ऐसी हरित क्रांति का शंखनाद हुआ, जिसने खेती, पर्यावरण और किसानों के भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगा दी। केंद्र सरकार के “सेवा, सुशासन एवं गरीब कल्याण” के गौरवशाली 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, चंदौली में आयोजित दो दिवसीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं जन-जागरूकता अभियान का शुभारंभ अभूतपूर्व उत्साह और जनभागीदारी के बीच हुआ।
कार्यक्रम केवल एक सरकारी आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह किसानों, वैज्ञानिकों, जनप्रतिनिधियों और पर्यावरण प्रेमियों के बीच भविष्य की खेती को लेकर एक सामूहिक संकल्प का मंच बन गया।

“प्राकृतिक खेती ही भविष्य का आधार” — प्रभारी मंत्री संजीव गोंड
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं जनपद प्रभारी मंत्री संजीव कुमार गोंड ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“प्राकृतिक खेती केवल खेती नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ जीवन देने का संकल्प है।”
उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती से बढ़ती लागत और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बीच प्राकृतिक खेती ही किसानों और देश दोनों के लिए सुरक्षित विकल्प बनकर उभर रही है।
500 किसानों की मौजूदगी ने दिया बड़ा संदेश
“अब खेतों में नहीं बहेगा जहर, प्रकृति के साथ बढ़ेगा किसान”
कार्यक्रम में जनपद के लगभग 400 से 500 किसानों की सहभागिता ने यह साबित कर दिया कि अब किसान भी खेती की नई दिशा तलाश रहे हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र का परिसर किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और जनप्रतिनिधियों से खचाखच भरा नजर आया।
कार्यक्रम के सबसे बड़े आकर्षण बने ‘वृक्ष बंधु’ डॉ. परशुराम सिंह
“प्रकृति के साथ संतुलन ही समृद्धि का आधार”
जब पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक खेती की बात चली तो सबकी निगाहें प्रदेश और देश में हरित चेतना के प्रतीक बन चुके ‘वृक्ष बंधु’ डॉ. परशुराम सिंह पर टिक गईं।
अपने प्रेरणादायी संबोधन में उन्होंने कहा—
“यदि धरती बचानी है, जल बचाना है और आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ भविष्य देना है तो प्राकृतिक खेती को जन आंदोलन बनाना होगा।”
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर जैविक एवं प्राकृतिक संसाधनों का अधिकाधिक उपयोग करें।
डॉ. परशुराम सिंह ने कहा कि आज पर्यावरणीय संकट, जलवायु परिवर्तन और मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति के बीच प्राकृतिक खेती ही सबसे प्रभावी समाधान है।
उनके विचारों को सुनकर उपस्थित किसानों ने जोरदार तालियों के साथ समर्थन व्यक्त किया।
वैज्ञानिकों ने खोले प्राकृतिक खेती के रहस्य
बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत से लेकर ब्रह्मास्त्र तक की जानकारी
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने किसानों को बदलती जलवायु और सुपर एलनीनो जैसी चुनौतियों से निपटने के उपाय बताए।
कार्यशाला में किसानों को सिखाया गया—
✅ बीजामृत निर्माण
✅ जीवामृत निर्माण
✅ घनजीवामृत निर्माण
✅ ब्रह्मास्त्र प्राकृतिक कीटनाशक
✅ अग्नास्त्र
✅ नीमास्त्र
वैज्ञानिकों ने बताया कि इन तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी खेती की लागत को लगभग शून्य तक ला सकते हैं।
भारत माता बनीं जागरूकता की आवाज
कठपुतली नाटक ने झकझोर दिया हर दिल
कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरक क्षण तब आया जब कठपुतली नाटक के माध्यम से भारत माता ने धरती की पीड़ा और पर्यावरणीय संकट की कहानी सुनाई।
नाटक में दिखाया गया कि कैसे रासायनिक खेती धरती को कमजोर बना रही है और प्राकृतिक खेती ही उसका उपचार है।
इस प्रस्तुति ने किसानों और उपस्थित लोगों को गहराई से प्रभावित किया।
एक मंच पर दिखी राजनीति, प्रशासन और किसान की ताकत
इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे—
🔹 प्रभारी मंत्री संजीव कुमार गोंड
🔹 विधायक मुगलसराय रमेश जायसवाल
🔹 विधायक चकिया कैलाश खरवार (आचार्य)
🔹 विधायक प्रतिनिधि सुशील सिंह
🔹 भाजपा जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह
🔹 जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग
🔹 मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत साई
🔹 उपनिदेशक कृषि भीमसेन
🔹 जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव
🔹 जिला उद्यान अधिकारी शैलेन्द्र दुबे
चंदौली ने लिया बड़ा संकल्प
“प्राकृतिक खेती अपनाएंगे, पर्यावरण बचाएंगे”
कार्यक्रम के समापन पर किसानों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देंगे, मिट्टी की उर्वरता बचाएंगे और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत साई ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए पहले दिन के सफल आयोजन की घोषणा की।
खबरी न्यूज का ब्यू
चंदौली की धरती से निकला यह संदेश अब पूरे पूर्वांचल के लिए प्रेरणा बन सकता है।
जब एक ओर जलवायु परिवर्तन और रासायनिक खेती की चुनौतियां बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर ‘वृक्ष बंधु’ डॉ. परशुराम सिंह जैसे पर्यावरण योद्धा और कृषि वैज्ञानिक किसानों को प्रकृति की ओर लौटने का रास्ता दिखा रहे हैं।
यह केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि “हरित भारत – स्वस्थ भारत – आत्मनिर्भर किसान” की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।





















