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गले में पट्टी बंधी थी, लेकिन हौसलों पर नहीं… तहसीलदार देवेन्द्र ने 72 घंटे में कर दिखाया वो, जिसकी लोग सिर्फ चर्चा करते हैं।
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तकिया महड़ौर के संवेदनशील विवाद से लेकर इलिया बाजार के अतिक्रमण और ददरा में 50 परिवारों को रास्ता दिलाने तक, लगातार तीन दिनों की कार्रवाई बनी जनचर्चा का विषय।
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रविवार से बुधवार तक गरजा प्रशासन! फावड़ा, बुलडोजर और एक्शन का ऐसा संगम कि पूरे चकिया तहसील क्षेत्र में छिड़ गई चर्चा
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खबरी न्यूज | विशेष ग्राउंड रिपोर्ट
एडिटर इन चीफ : के.सी. श्रीवास्तव (एडवोकेट)
चकिया‚चन्दौली। तहसील क्षेत्र में इन दिनों एक नाम लगातार चर्चा में है। गांव की चौपाल हो, बाजार की दुकान हो या फिर सोशल मीडिया का प्लेटफॉर्म, हर जगह एक ही सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर चकिया तहसील में ऐसा क्या हो रहा है कि लगातार तीन दिनों से प्रशासनिक कार्रवाई सुर्खियां बटोर रही है।
दरअसल बीते चार दिनों में चकिया तहसील प्रशासन ने तीन ऐसे बड़े मामलों का समाधान किया है जो लंबे समय से विवाद, तनाव और जनसमस्या का कारण बने हुए थे। सबसे खास बात यह रही कि इन तीनों मामलों में तहसीलदार चकिया देवेन्द्र स्वयं मौके पर मौजूद रहे और कई स्थानों पर तो खुद फावड़ा चलाकर रास्ता साफ कराने में जुट गए।

पहला अध्याय : रविवार को छुट्टी के दिन भी पहुंचे तकिया महड़ौर
जब अधिकांश सरकारी कार्यालयों में रविवार का अवकाश था, तब चकिया तहसील प्रशासन की गाड़ियां तकिया महड़ौर की ओर दौड़ रही थीं।
यहां एक रास्ते और भूमि विवाद को लेकर माहौल लगातार संवेदनशील होता जा रहा था। स्थानीय स्तर पर इस विवाद को लेकर तनाव की स्थिति बनने लगी थी और कुछ लोग इसे साम्प्रदायिक रंग देने का प्रयास भी कर रहे थे।
स्थिति बिगड़ने से पहले तहसीलदार देवेन्द्र ने स्वयं मोर्चा संभाला।

राजस्व टीम और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे तहसीलदार ने दोनों पक्षों को सुना, अभिलेखों की जांच कराई और मौके पर ही समाधान की दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी।
ग्रामीणों के अनुसार सबसे चौंकाने वाला दृश्य तब सामने आया जब तहसीलदार स्वयं फावड़ा लेकर रास्ते की सफाई और व्यवस्था में जुट गए।

रविवार की छुट्टी में हुई इस कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में संदेश दे दिया कि प्रशासन अब विवाद बढ़ने का इंतजार नहीं करेगा बल्कि मौके पर पहुंचकर समाधान करेगा।
दूसरा अध्याय : मंगलवार को इलिया बाजार में चला बुलडोजर
रविवार की कार्रवाई की चर्चा अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि मंगलवार को इलिया बाजार में प्रशासन का एक और बड़ा एक्शन देखने को मिला।
इलिया बाजार में लंबे समय से सार्वजनिक भूमि और सड़क किनारे बने अवैध अतिक्रमणों को लेकर शिकायतें मिल रही थीं।
मंगलवार सुबह प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ बाजार पहुंचा।
जेसीबी मशीनें गरजीं।
अवैध निर्माणों पर कार्रवाई शुरू हुई।
कुछ ही देर में पूरे बाजार में हलचल मच गई।
लोग अपने-अपने प्रतिष्ठानों के बाहर खड़े होकर कार्रवाई देखने लगे।
कई वर्षों से कब्जे में चली आ रही जगहों को खाली कराया गया और सार्वजनिक रास्तों को अतिक्रमण मुक्त कराया गया।
इलिया की कार्रवाई ने साफ संदेश दिया कि सरकारी भूमि और सार्वजनिक रास्तों पर कब्जे की अब कोई गुंजाइश नहीं बची है।
तीसरा अध्याय : बुधवार को ददरा में खुला 50 परिवारों की जिंदगी का रास्ता
मंगलवार की कार्रवाई के अगले ही दिन बुधवार को प्रशासन बबुरी थाना क्षेत्र के ददरा गांव पहुंच गया।
यहां आराजी संख्या 426, रकबा 0.65 हेक्टेयर देवस्थान भूमि तथा उससे सटे रास्ते को लेकर वर्षों पुराना विवाद चला आ रहा था।
बगल में प्राथमिक विद्यालय भवन और बंजर भूमि स्थित है।
ग्रामीणों की मांग थी कि बंजर भूमि से होकर लगभग 10 फीट चौड़ा सार्वजनिक रास्ता कायम किया जाए ताकि दर्जनों परिवारों को आवागमन की सुविधा मिल सके।
बुधवार सुबह तहसीलदार देवेन्द्र, नायब तहसीलदार आलोक निषाद, हल्का लेखपाल गोपाल तथा बबुरी पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
और फिर जो दृश्य सामने आया उसने सभी को हैरान कर दिया।
गले में पट्टी, सिर पर हेलमेट और हाथ में फावड़ा
सर्वाइकल की समस्या से जूझ रहे तहसीलदार देवेन्द्र गले में पट्टी लगाए हुए थे।
लेकिन इसके बावजूद उन्होंने केवल निगरानी नहीं की।
उन्होंने खुद फावड़ा उठाया और रास्ते की मिट्टी हटाने लगे।
उनके साथ बबुरी थानाध्यक्ष भी फावड़ा चलाते दिखाई दिए।
ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने पहली बार किसी तहसीलदार और थाना प्रभारी को इस तरह जमीन पर उतरकर रास्ता बनवाते देखा है।
सिर्फ 10 मिनट में खत्म हुआ वर्षों पुराना विवाद
प्रशासनिक टीम ने मौके पर स्थिति स्पष्ट की।
अतिक्रमण हटाया गया।
रास्ता साफ कराया गया।
और महज 10 मिनट में वह रास्ता कायम हो गया जिसके लिए ग्रामीण वर्षों से संघर्ष कर रहे थे।
बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई से लगभग 50 परिवारों को सीधा लाभ मिला है।
अब गांव के लोगों को खेतों, घरों और मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
आखिर क्यों चर्चा में है यह पूरा अभियान?
रविवार – तकिया महड़ौर में संवेदनशील विवाद का समाधान।
मंगलवार – इलिया बाजार में अवैध अतिक्रमण पर बुलडोजर कार्रवाई।
बुधवार – ददरा में 50 परिवारों के लिए रास्ता कायम।
लगातार तीन बड़े एक्शन ने पूरे चकिया तहसील क्षेत्र में प्रशासनिक सक्रियता की नई मिसाल पेश कर दी है।
लोगों के बीच चर्चा का विषय केवल अतिक्रमण हटाना नहीं बल्कि अधिकारियों का स्वयं मौके पर उतरना भी बना हुआ है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर जारी है अभियान
सूत्रों के अनुसार जिलाधिकारी के निर्देश पर सार्वजनिक भूमि, सरकारी संपत्तियों, बंजर भूमि और आम रास्तों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
चकिया तहसील प्रशासन इस अभियान को पूरी गंभीरता के साथ आगे बढ़ा रहा है।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि जनहित से जुड़ी भूमि पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
🖋️ एडिटर व्यू | के.सी. श्रीवास्तव (एडवोकेट)
“रविवार की छुट्टी में तकिया महड़ौर पहुंचकर संवेदनशील विवाद का समाधान करना, मंगलवार को इलिया बाजार में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कठोर कार्रवाई करना और बुधवार को ददरा में स्वयं फावड़ा चलाकर 50 परिवारों को रास्ता दिलाना केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि जनसमस्याओं के प्रति जवाबदेही का संकेत है। प्रशासन की असली पहचान फाइलों में नहीं बल्कि जमीन पर दिखती है। यदि जनहित सर्वोपरि रखकर इसी प्रकार कार्रवाई जारी रही तो निश्चित रूप से आम जनता का विश्वास और मजबूत होगा।”
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