सपा नेता विजय गोंड ने अखिलेश यादव को सौंपा ज्ञापन, 2027 में पीडीए सरकार बनने पर प्रतिमाएं स्थापित कराने का मिला आश्वासन
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क डीडीयू नगर/चंदौली। आजादी की लड़ाई में अपने प्राणों की आहुति देने वाले चंदौली के छह अमर शहीदों को अब तक वह सम्मान नहीं मिल सका, जिसके वे वास्तविक हकदार हैं। इसी ऐतिहासिक अन्याय को समाप्त करने की मांग को लेकर समाजवादी अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष विजय गोंड एडवोकेट ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में धानापुर स्थित ऐतिहासिक शहीद उद्यान में वर्ष 1942 के धानापुर कांड के छह अमर क्रांतिकारियों की प्रतिमाएं स्थापित कराने की मांग की गई। यह मांग केवल प्रतिमा लगाने की नहीं, बल्कि उन वीर सपूतों के त्याग, बलिदान और राष्ट्रभक्ति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प भी है।

1942 का धानापुर कांड: जब चंदौली की धरती ने दिए छह अमर शहीद
विजय गोंड ने बताया कि 16 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान हुए ऐतिहासिक धानापुर कांड में चंदौली के छह वीर क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे।
इन अमर शहीदों में—
- आंगनु बिंद (ग्राम विशुनपुरा)
- चिंगानु चमार (ग्राम वीरना)
- पुरुषोत्तम कोयरी (ग्राम इनायतपुर)
- विश्वनाथ गोंड (ग्राम कवई पहाड़पुर)
- राजकुमार गिरी (ग्राम मठिया)
- शिवमंगल चौधरी (ग्राम कवई पहाड़पुर)
शामिल थे, जिन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया।

“शहीद उद्यान में सभी का सम्मान हो, किसी के साथ भेदभाव नहीं”
विजय गोंड ने कहा कि धानापुर स्थित शहीद उद्यान में कई स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं स्थापित हैं, लेकिन आश्चर्य की बात है कि धानापुर कांड के इन छह अमर शहीदों की प्रतिमाएं आज तक नहीं लगाई गईं। इससे स्थानीय लोगों और शहीद परिवारों में वर्षों से उपेक्षा की भावना बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि यदि देश की आजादी के लिए प्राण देने वाले इन वीरों को उचित सम्मान नहीं मिलेगा तो इतिहास के साथ न्याय नहीं हो सकेगा। नई पीढ़ी को उनके बलिदान से परिचित कराने के लिए उनकी प्रतिमाओं का स्थापित होना अत्यंत आवश्यक है।

अखिलेश यादव का बड़ा आश्वासन
ज्ञापन प्राप्त करने के बाद अखिलेश यादव ने विजय गोंड को आश्वस्त करते हुए कहा कि यदि वर्ष 2027 में प्रदेश में पीडीए सरकार बनती है तो धानापुर कांड के सभी शहीदों की प्रतिमाएं सम्मानपूर्वक स्थापित कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि शहीदों का सम्मान करना समाजवादी पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल है और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
इतिहास को जीवित रखने की जरूरत
इतिहासकारों का मानना है कि भारत की आजादी केवल बड़े शहरों के आंदोलनों से नहीं मिली, बल्कि गांव-गांव के अनगिनत गुमनाम वीरों के बलिदान ने आजादी की नींव मजबूत की। धानापुर कांड भी उसी गौरवशाली इतिहास का हिस्सा है, जिसने चंदौली को स्वतंत्रता संग्राम के मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाई।
जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन छह शहीदों की प्रतिमाएं शहीद उद्यान में स्थापित होती हैं तो यह केवल स्मारक निर्माण नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति, साहस और बलिदान की प्रेरणा देने वाला ऐतिहासिक केंद्र भी बनेगा।
खबरी न्यूज की बात
शहीद कभी किसी दल या विचारधारा के नहीं होते, वे पूरे राष्ट्र की अमूल्य धरोहर होते हैं। धानापुर कांड के अमर बलिदानियों का सम्मान केवल प्रतिमाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके संघर्ष और बलिदान को शिक्षा, इतिहास और सामाजिक चेतना का स्थायी हिस्सा बनाया जाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो यह उन वीर सपूतों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी, जिन्होंने आजाद भारत का सपना अपने लहू से सींचा था।
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