किसकी लापरवाही से टूटी कर्मनाशा लेफ्ट नहर और सवालों के घेरे में आया करोड़ों का निर्माण?
पंचवनिया बीयर व पुल निर्माण में मानकों की अनदेखी, ग्रामीणों की शिकायतों पर आखिरकार चीफ और एसी पहुंचे मौके पर। लतीफशाह लेफ्ट कर्मनाशा नहर का किया निरीक्षण, अफसरों से पूछा—”ऐसे होगा सिंचाई का इंतजाम?” छह फीट पानी एक साथ छोड़ने से नहर टूटी, लाखों लीटर पानी हुआ बर्बाद, निर्माण गुणवत्ता पर भी उठे गंभीर सवाल।
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया‚चन्दौली।
पंचवनिया बीयर व पुल का विवाद आखिरकार सिंचाई विभाग के सबसे बड़े अधिकारियों के दरबार तक पहुंच ही गया। महीनों से ग्रामीण जिस मुद्दे को लेकर आवाज उठा रहे थे, जिस पर विरोध करने वालों को कभी मुकदमे की धमकी दी गई, जिस निर्माण कार्य को लेकर लगातार मानकों की धज्जियां उड़ाने के आरोप लग रहे थे, उसी मामले ने शुक्रवार को बड़ा मोड़ ले लिया। सोन क्षेत्र के चीफ मुख्य अभियंता (Chief Engineer) ने स्वयं पंचवनिया पहुंचकर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और मौके पर मौजूद अधिकारियों से तीखे सवाल पूछते हुए जमकर फटकार लगाई।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों के चेहरे उस समय उतर गए जब मुख्य अभियंता ने साफ शब्दों में पूछा—
“यदि निर्माण की यही गुणवत्ता रहेगी और नहरों का यही हाल रहेगा तो किसानों तक पानी आखिर पहुंचेगा कैसे?”
यह सवाल पूरे विभाग पर भारी पड़ता दिखाई दिया।
ग्रामीणों ने पहले ही खोल दी थी निर्माण की पोल
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचवनिया में बन रहे बीयर एवं पुल के निर्माण में शुरू से ही भारी अनियमितताएं बरती गईं। निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया और गुणवत्ता से समझौता करते हुए निर्माण कराया गया। जब गांव के लोगों ने इसका विरोध किया तो जिम्मेदार अधिकारियों ने शिकायत सुनने के बजाय उन्हें सरकारी कार्य में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज कराने तक की धमकी दे डाली।

इसके बावजूद ग्रामीण पीछे नहीं हटे। लगातार शिकायतें होती रहीं और मामला धीरे-धीरे उच्चाधिकारियों तक पहुंच गया।
निर्माण दोबारा शुरू हुआ… लेकिन आरोप फिर वही
ग्रामीणों का कहना है कि विरोध के बाद निर्माण कार्य दोबारा शुरू तो हुआ, लेकिन कार्यशैली नहीं बदली। पुल में डाली जा रही गिट्टी को तकनीकी मानकों के अनुरूप तैयार किए बिना ही भराव किया जा रहा था। लोगों ने इसका वीडियो और फोटो के साथ विरोध किया, लेकिन आरोप है कि संबंधित ठेकेदार ने अपने रसूख का हवाला देकर शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया।

फिर हुआ बड़ा खेल… छह फीट पानी छोड़ा और टूट गई कर्मनाशा लेफ्ट नहर
पूरा मामला तब और गंभीर हो गया जब धान की नर्सरी और रोपाई के लिए किसानों को पानी देने हेतु लतीफशाह लेफ्ट कर्मनाशा नहर में पानी छोड़ा गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय कर्मचारियों द्वारा सावधानी बरतने की सलाह देने के बावजूद एक साथ लगभग छह फीट पानी छोड़ दिया गया। जबकि सिंचाई विभाग के नियमों के अनुसार नहर में पानी चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाता है ताकि अचानक दबाव न बने।
लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
परिणाम सामने था…
तेज दबाव झेल न सकी कर्मनाशा लेफ्ट नहर कई स्थानों पर टूट गई और हजारों-लाखों लीटर पानी खेतों तक पहुंचने से पहले ही बह गया। किसानों को सिंचाई का लाभ मिलने के बजाय सरकारी पानी और सरकारी धन दोनों की बर्बादी हो गई।
चीफ मुख्य अभियंता ने मौके पर पहुंचकर लिया पूरा जायजा
शुक्रवार को सोन क्षेत्र के चीफ मुख्य अभियंता एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने पंचवनिया पहुंचकर पुल निर्माण की गुणवत्ता का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने लतीफशाह लेफ्ट कर्मनाशा नहर का भी निरीक्षण किया, जहां हाल ही में नहर टूटने की घटना हुई थी।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कई तकनीकी बिंदुओं पर जवाब मांगा। सूत्रों के अनुसार मुख्य अभियंता ने निर्माण गुणवत्ता, नहर संचालन और तकनीकी लापरवाही को लेकर नाराजगी जताई तथा स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में मानकों से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ग्रामीण बोले—अगर समय रहते सुन ली जाती बात तो नहीं टूटती नहर
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शुरुआती शिकायतों को गंभीरता से लिया गया होता तो आज न तो नहर टूटती, न पानी बर्बाद होता और न ही विभाग को इस तरह कटघरे में खड़ा होना पड़ता।
लोगों का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर शिकायतों को दबाने की कोशिश की गई। लेकिन जब मामला सीधे मुख्य अभियंता तक पहुंचा तो सच्चाई सामने आने लगी।
अब निगाहें कार्रवाई पर
मुख्य अभियंता के निरीक्षण और फटकार के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल निर्देश देकर मामला खत्म हो जाएगा, या फिर निर्माण कार्य में यदि कोई तकनीकी गड़बड़ी या विभागीय लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ ठोस कार्रवाई भी होगी?
पंचवनिया, लतीफशाह और आसपास के किसानों की निगाहें अब इसी पर टिकी हैं।
खबरी न्यूज की पड़ताल
पंचवनिया पुल निर्माण विवाद और लतीफशाह लेफ्ट कर्मनाशा नहर टूटने की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का पालन नहीं होगा तो सबसे बड़ा नुकसान आखिर किसान और आम जनता ही क्यों भुगते?
अब देखना यह होगा कि चीफ मुख्य अभियंता की सख्त फटकार के बाद विभाग केवल कागजी कार्रवाई करता है या वास्तव में दोष तय कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी होती है।





















