लक्ष्मी चैरिटेबल सेंटर पर लापरवाही का आरोप, शव रखकर परिजनों का प्रदर्शन, अस्पताल सील करने और एफआईआर की मांग
ऑपरेशन के बाद बिगड़ी तबीयत, वाराणसी रेफर, इलाज के दौरान मौत… अब पूरे मामले की जांच पर टिकी निगाहें
चकिया/चंदौली | खबरी न्यूज | BREAKING DESK
चकिया क्षेत्र में रविवार को उस समय सनसनी फैल गई जब सोनहुल स्थित लक्ष्मी चैरिटेबल सेंटर में पथरी के ऑपरेशन के बाद एक महिला की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया। 60 वर्षीय महिला की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के बाहर शव रखकर जोरदार प्रदर्शन किया और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल को तत्काल सील करने, जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा मृतका के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की।

कुछ देर के लिए सोनहुल-नंदूपुर मार्ग पर जाम जैसी स्थिति भी बन गई, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही चकिया पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार चकिया कोतवाली क्षेत्र के नेवाजगंज निवासी मालती देवी (60 वर्ष), पत्नी स्वर्गीय राम निहोर को पथरी की समस्या के चलते 9 जुलाई को सोनहुल स्थित लक्ष्मी चैरिटेबल सेंटर में भर्ती कराया गया था। 10 जुलाई को उनका ऑपरेशन किया गया।
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के कुछ ही समय बाद मालती देवी की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। उनका कहना है कि अस्पताल में समय रहते न तो पर्याप्त चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई गई और न ही स्थिति की गंभीरता के अनुरूप उपचार किया गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें वाराणसी रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान 11 जुलाई की रात उनकी मौत हो गई।

रविवार को अस्पताल के बाहर फूटा गुस्सा
महिला का शव लेकर रविवार शाम परिजन सीधे अस्पताल पहुंचे। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग भी वहां एकत्र हो गए। परिजनों ने अस्पताल के बाहर शव रखकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए सोनहुल-नंदूपुर मार्ग बाधित हो गया। सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

पुलिस ने संभाला मोर्चा
स्थिति की जानकारी मिलते ही चकिया पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे लोगों से वार्ता की और उन्हें उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसके बाद सड़क से जाम हटवाया गया और स्थिति सामान्य कराई गई।
थानाध्यक्ष अर्जुन सिंह ने बताया कि यदि परिजनों की ओर से तहरीर दी जाती है तो मामले की जांच कर नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है।
अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों से किया इनकार
दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया है। अस्पताल का कहना है कि मरीज की हालत गंभीर होने पर समय रहते उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर कर दिया गया था और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार आवश्यक उपचार किया गया। प्रबंधन का कहना है कि किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई।
अब जांच पर टिकी सबकी नजर
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी अस्पताल में गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही हुई है तो निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि अस्पताल पर लगाए गए आरोप जांच में सही नहीं पाए जाते हैं तो तथ्य भी स्पष्ट रूप से सामने आने चाहिए।
फिलहाल पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
खबरी न्यूज का बड़ा सवाल
- क्या ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति के अनुरूप तत्काल और पर्याप्त चिकित्सा उपलब्ध कराई गई थी?
- क्या रेफर करने में किसी प्रकार की देरी हुई?
- क्या अस्पताल निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो रहा है?
- क्या स्वास्थ्य विभाग नियमित निरीक्षण करता रहा है?
- यदि लापरवाही सिद्ध होती है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
- क्या मृतका के परिजनों को न्याय और उचित मुआवजा मिलेगा?
- और सबसे बड़ा सवाल—क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी या यह मामला भी समय के साथ फाइलों में दब जाएगा?
खबरी न्यूज स्पष्ट करता है कि अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है। चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों की जांच के बाद ही मानी जाएगी।























