650 हेक्टेयर रोपण क्षेत्र की देखरेख के लिए वन कर्मियों को मिला विशेष प्रशिक्षण
वन क्षेत्राधिकारी अमित श्रीवास्तव ने थिनिंग की आधुनिक तकनीक समझाई, गुणवत्ता से समझौता न करने के दिए निर्देश
खराब मानसून को देखते हुए टैंकर से सिंचाई और नियमित गश्त पर वन विभाग का विशेष जोर
खबरी न्यूज | नौगढ‚ चन्दौली। पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण को मजबूत बनाने की दिशा में काशी वन्य जीव प्रभाग रामनगर (चन्दौली) के जयमोहनी रेंज में शनिवार को वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कैंपा एवं सामाजिक वानिकी योजना के तहत विकसित वृक्षारोपण क्षेत्रों के वैज्ञानिक अनुरक्षण के लिए वन कर्मियों का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखते हुए विकसित वृक्षों में परिवर्तित करना है।
प्रभागीय वनाधिकारी बी. शिवशंकर के निर्देशन में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में वन क्षेत्राधिकारी अमित श्रीवास्तव ने सेक्शन ऑफिसरों, वनरक्षकों एवं दैनिक श्रमिकों को थिनिंग (Thinning) और अनुरक्षण की वैज्ञानिक एवं तकनीकी विधियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वृक्षारोपण की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि पौधों की समय-समय पर वैज्ञानिक ढंग से देखभाल की जाए, ताकि प्रत्येक पौधे को पर्याप्त प्रकाश, पोषण और विकास का अवसर मिल सके।

प्रशिक्षण के बाद वन क्षेत्राधिकारी स्वयं लगभग 650 हेक्टेयर में विकसित रोपण स्थल पर पहुंचे और मौके पर कर्मियों को थिनिंग कार्य की व्यावहारिक प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि अनुरक्षण के दौरान कमजोर एवं अवांछित पौधों को हटाकर स्वस्थ पौधों के विकास को बढ़ावा देना आवश्यक है। इससे पौधों की वृद्धि तेज होती है और भविष्य में घने एवं स्वस्थ वन विकसित होते हैं।
वन क्षेत्राधिकारी अमित श्रीवास्तव ने सभी कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अनुरक्षण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता में कमी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष कमजोर मानसून को देखते हुए नवरोपित पौधों की नियमित सिंचाई टैंकरों के माध्यम से सुनिश्चित की जाए, जिससे पौधों के सूखने की संभावना समाप्त हो और उनकी जीवित रहने की दर बढ़ सके।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि रोपित क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए नियमित गश्त की जाए। अवैध कटान, पशुओं की चराई अथवा अन्य किसी भी प्रकार की क्षति से पौधों को बचाने के लिए सभी वन कर्मी पूरी सतर्कता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि पौधारोपण अभियान तभी सफल माना जाएगा जब लगाए गए पौधे सुरक्षित रहकर वृक्ष का रूप धारण करें।
वन विभाग का मानना है कि वैज्ञानिक अनुरक्षण, समयबद्ध सिंचाई और सतत निगरानी के माध्यम से कैंपा एवं सामाजिक वानिकी योजना के तहत लगाए गए पौधों की सफलता दर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे न केवल क्षेत्र का हरित क्षेत्रफल बढ़ेगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और जलवायु संतुलन को भी मजबूती मिलेगी।

हरियाली बचाने की दिशा में अहम पहल
जयमोहनी रेंज में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम वन विभाग की उस दूरदर्शी सोच का हिस्सा है, जिसमें वृक्षारोपण को केवल औपचारिक अभियान न मानकर उसके संरक्षण और दीर्घकालिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार वैज्ञानिक पद्धति से अनुरक्षण कार्य किया गया तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र घने और समृद्ध वन क्षेत्र के रूप में विकसित होगा, जिसका लाभ पर्यावरण के साथ-साथ स्थानीय समुदाय को भी मिलेगा।





















