चंदौली का वह हत्याकांड जिसने पूरे जिले को हिला दिया… 24 घंटे में खुली ऐसी परतें कि सुनकर पुलिस भी रह गई सन्न!
✍️ विशेष रिपोर्ट : KHABARI NEWS
एडिटर इन चीफ : के.सी. श्रीवास्तव (एडवोकेट)
दोपहर की तपती सड़क..साइकिल पर एक आदमीऔर कुछ ही सेकंड में खत्म हो गई जिंदगी!
6 जून 2026…
चंदौली का एक सामान्य दिन।

मनोज कुमार रोज की तरह घर से निकले थे। परिवार को क्या पता था कि यह उनका आखिरी सफर होगा।
पत्नी को शायद उम्मीद रही होगी कि शाम को वापस आएंगे…
बच्चों ने सोचा होगा कि पिता कुछ सामान लेकर लौटेंगे…
लेकिन नियति ने कुछ और ही लिख रखा था।

दोपहर होते-होते एक फोन आता है…
और फिर शुरू होती है मौत की वह पटकथा, जिसे कई दिनों से बेहद शातिर तरीके से लिखा जा रहा था।

ब्रेकिंग न्यूज़: चंदौली में मर्डर के बाद महा-मुठभेड़!दोनों पैरों में लगी गोली!
एक फोन कॉल जिसने सब कुछ बदल दिया
कोयला मंडी के धर्मकांटे पर काम करने वाले मनोज कुमार उस दिन अचानक काम छोड़कर निकल पड़े।
सहकर्मियों से कहा—
“एक जानने वाले का एक्सीडेंट हो गया है, अस्पताल जा रहा हूं…”
किसी को क्या पता था कि वह अस्पताल नहीं…
मौत के दरवाजे की ओर जा रहे हैं।
वह फोन जिसने उन्हें बुलाया था, दरअसल उनकी जिंदगी का आखिरी बुलावा साबित होने वाला था।
मौत पहले से घात लगाए बैठी थी
जांच में जो खुलासा हुआ, उसने हर किसी को चौंका दिया।
पुलिस के अनुसार रेलवे के लोको पायलट कृष्ण भगवान सिंह कई वर्षों से मनोज कुमार के कर्ज में डूबे थे।
वर्ष 2020 में लिया गया लगभग 3 लाख रुपये का कर्ज ब्याज के साथ बढ़कर करीब 7 लाख रुपये पहुंच चुका था।
तकादा बढ़ रहा था…
तनाव बढ़ रहा था…
और इसी तनाव के बीच जन्म ले रही थी एक खतरनाक साजिश।
“अब इसे रास्ते से हटाना ही होगा”
जांच में सामने आया कि कृष्ण भगवान सिंह के मन में मनोज कुमार के प्रति गहरा आक्रोश पैदा हो चुका था।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने पूछताछ में बताया कि लगातार पैसों की मांग और अन्य व्यक्तिगत कारणों से वह मानसिक रूप से परेशान था।
फिर उसने वह फैसला लिया…
जो किसी भी इंसान को अपराधी बना देता है।
“मनोज को खत्म करना होगा…”
बिहार से बुलाए गए मौत के सौदागर
यहीं से शुरू हुआ डेढ़ लाख की सुपारी का खेल।
बक्सर और भोजपुर (बिहार) से संपर्क किया गया।
भरत सिंह और सूरज उर्फ राजेश को जिम्मेदारी सौंपी गई।
रकम तय हुई—
₹1,50,000
हत्या से पहले ही हजारों रुपये खाते में भेजे गए।हथियार खरीदने के लिए अलग से पैसा दिया गया।
शूटरों को चंदौली बुलाया गया।सरकारी आवास के आसपास ठहराया गया।
रहने-खाने का इंतजाम किया गया।और फिर कई दिनों तक मौत का रूटमैप तैयार किया गया।
मौत के साथ चल रही थी दूसरी साइकिल
6 जून…मुगलसराय के पास एक मिठाई की दुकान।
कृष्ण भगवान सिंह ने अपना मोबाइल खराब होने का बहाना बनाया।दुकानदार के कर्मचारी का मोबाइल लिया।
मनोज कुमार को फोन किया।कहा—
“रुपया तैयार है, आ जाओ…” मनोज पहुंच गए। उन्हें क्या पता था कि यह रुपये लेने का नहीं…जान देने का बुलावा है।
सड़क पर चल रही थी जिंदगी और पीछे दौड़ रही थी मौत
एक तरफ साइकिल पर मनोज कुमार। दूसरी तरफ साइकिल पर कृष्ण भगवान।
और पीछे मोटरसाइकिल पर दो शूटर। पूरा रास्ता मौत उनके पीछे-पीछे चल रही थी।
लेकिन मनोज कुमार को इसका अंदाजा तक नहीं था।
फिर आया वह खौफनाक क्षण…
पटपरा गांव के पास सुनसान इलाका। चारों ओर सन्नाटा।
कृष्ण भगवान ने कहा— “शायद रास्ता गलत हो गया…”
कुछ दूर जाकर फिर कहा— “जरा पेशाब करके आता हूं…” साइकिल रुक गई। मनोज भी रुक गए।
और अगले कुछ सेकंड में… सब कुछ खत्म हो गया।
पहली गोली सिर में…
मोटरसाइकिल अचानक वापस लौटी। शूटर सूरज उर्फ राजेश ने निशाना साधा। धांय….!!!
गोली सीधे सिर में लगी।मनोज कुमार सड़क पर गिर पड़े। लेकिन हमलावर यहीं नहीं रुके।
मौत सुनिश्चित करने के लिए दूसरी गोली
जमीन पर तड़प रहे मनोज कुमार को देखकर दूसरी गोली चलाई गई। इस बार निशाना था सीना।
धांय….!!! और कुछ ही पलों में सब खत्म हो गया। एक परिवार उजड़ गया।
एक घर का सहारा छिन गया।और सड़क पर बिखर गया एक इंसान का जीवन।
चंदौली पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती
न कोई चश्मदीद। न कोई पहचान। न कोई स्पष्ट सुराग।
हत्या स्थल भी ऐसा जहां मृतक का कोई सीधा संबंध नहीं था।
लेकिन यहीं से शुरू हुआ पुलिस का असली ऑपरेशन।
15 घंटे तक पुलिस बूथ में बैठे रहे एसपी
चंदौली पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने मामले को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया।
सूत्रों के अनुसार चकिया तिराहे स्थित पुलिस बूथ से लगातार लगभग 15 घंटे तक पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग की गई।
हर सीसीटीवी फुटेज। हर कॉल डिटेल। हर लोकेशन। हर मूवमेंट।
एक-एक कड़ी जोड़कर पुलिस आगे बढ़ती रही।
CCTV ने उगला सच
जब सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए तो एक चौंकाने वाला दृश्य सामने आया।
मनोज अकेले नहीं जा रहे थे। एक दूसरी साइकिल भी साथ चल रही थी।
और पीछे एक संदिग्ध मोटरसाइकिल। यहीं से पुलिस को पहला बड़ा सुराग मिला।
CDR ने खोल दिया राज
फिर मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले गए। एक संदिग्ध कॉल सामने आई।
कॉल और CCTV का मिलान हुआ। और पुलिस सीधे पहुंच गई कृष्ण भगवान सिंह तक।
इसके बाद कहानी तेजी से खुलती चली गई।

मुठभेड़ में दबोचा गया शूटर
पुलिस ने सूरज उर्फ राजेश को गिरफ्तार कर लिया।
जब उसे हथियार बरामद कराने ले जाया गया तो उसने झाड़ियों से पिस्टल निकालकर पुलिस टीम पर फायर झोंक दिया।
कुछ सेकंड के लिए माहौल युद्धभूमि में बदल गया। गोली चली। जवाबी कार्रवाई हुई।
और फिर… सरकारी गोली ने आरोपी के दोनों पैरों को चीर दिया।
वह जमीन पर गिर पड़ा। खेल खत्म हो चुका था।
बरामद हुआ मौत का हथियार
पुलिस ने बरामद किया—
✅ .32 बोर पिस्टल
✅ दो खोखा कारतूस
✅ दो जिंदा कारतूस
यही वह हथियार था जिसने मनोज कुमार की जिंदगी छीन ली।
पुलिस टीम को मिला सम्मान
इस उल्लेखनीय सफलता पर उत्तर प्रदेश पुलिस के अपर पुलिस महानिदेशक द्वारा पुलिस टीम को ₹50,000 नकद पुरस्कार देने की घोषणा की गई।
KHABARI NEWS | संपादकीय दृष्टिकोण
के.सी. श्रीवास्तव (एडवोकेट), प्रधान संपादक, KHABARI NEWS का कहना है—
“यह घटना केवल एक हत्या की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि आर्थिक विवाद, अविश्वास और बढ़ती कटुता किस प्रकार समाज को अपराध की ओर धकेल सकती है। एक व्यक्ति की जान चली गई, कई परिवार प्रभावित हुए और अंततः कानून ने अपना काम किया। यह मामला समाज के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है कि विवादों का समाधान कानून और संवाद से होना चाहिए, हिंसा से नहीं।”
आखिर में एक सवाल…
यदि उस दिन वह फोन नहीं आया होता… यदि मनोज कुमार उस बुलावे पर नहीं गए होते…
यदि कर्ज और रंजिश इतनी गहरी न हुई होती… तो क्या आज एक परिवार उजड़ने से बच सकता था?
इस सवाल का जवाब शायद किसी के पास नहीं।
लेकिन इतना जरूर है कि चंदौली का यह हत्याकांड आने वाले लंबे समय तक लोगों की यादों में एक खौफनाक मिसाल बनकर दर्ज रहेगा।
KHABARI NEWS EXCLUSIVE | सबसे पहले, सबसे सटीक, सबसे प्रभावी
#Chandauli #CrimeStory #KhabariNews #MurderMystery #UPPolice #BreakingNews #ExclusiveReport






















