कब जागेगा सिस्टम? सड़क निर्माण के नाम पर रोज बिछ रही हैं लाशें, लेकिन जिम्मेदारों की नींद नहीं टूट रही
ब्रेकिंग न्यूज़ | खबरी नेशनल न्यूज नेटवर्क | चकिया ,चंदौली
चकिया से विनय राय की रिर्पोट
करनौल चौराहा एक बार फिर खून से लाल हो गया। सड़क निर्माण कार्य के बीच दौड़ रहे बेलगाम डम्फरों ने एक और घर का चिराग बुझा दिया। शाहबगंज थाना क्षेत्र के करनौल चौराहे पर तेज रफ्तार डम्फर की चपेट में आने से बाइक सवार एक युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और युवक को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। देखते ही देखते मौके पर सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था—”आखिर कब तक?”
मौत बनकर दौड़ रहे डम्फर, सड़क पर हर दिन दहशत
स्थानीय लोगों के अनुसार करनौल चौराहा और आसपास का इलाका इन दिनों भारी वाहनों और डम्फरों की मनमानी का शिकार बना हुआ है। सड़क निर्माण कार्य के चलते दिन-रात डम्फरों की आवाजाही जारी है। हालत यह है कि कई चालक बिना किसी नियम-कानून के तेज रफ्तार में वाहन दौड़ा रहे हैं।
बुधवार को भी बाइक सवार युवक सामान्य रूप से अपने गंतव्य की ओर जा रहा था। इसी दौरान तेज गति से आ रहे एक डम्फर ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर भारी वाहनों की रफ्तार नियंत्रित होती तो शायद एक और परिवार उजड़ने से बच जाता।
रोड बन रही है या मौत का रास्ता तैयार हो रहा है?
ग्रामीणों में इस हादसे को लेकर भारी गुस्सा है। लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ी है। आए दिन कहीं न कहीं डम्फर, ट्रक और भारी वाहन लोगों को कुचल रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सड़क बनने से पहले कितनी और जानें जाएंगी?
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसियां केवल काम पूरा करने की जल्दबाजी में लगी हैं, जबकि सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। न पर्याप्त चेतावनी बोर्ड हैं, न स्पीड कंट्रोल की व्यवस्था और न ही कहीं ट्रैफिक प्रबंधन दिखाई देता है।

पहले भी हो चुके हैं कई हादसे, लेकिन कार्रवाई शून्य
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहला हादसा नहीं है। करनौल चौराहे और आसपास के क्षेत्र में पिछले कई महीनों में डम्फरों से जुड़े अनेक हादसे हो चुके हैं। कई लोग घायल हुए, कई परिवारों ने अपनों को खोया, लेकिन हर बार कुछ दिन चर्चा होती है और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार विभाग और प्रशासन केवल हादसों के बाद औपचारिक कार्रवाई करते हैं। जब तक किसी बड़े जनआंदोलन या विरोध की स्थिति नहीं बनती, तब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
हादसे के बाद चालक फरार, पुलिस जांच में जुटी
घटना की सूचना मिलते ही शाहबगंज पुलिस मौके पर पहुंच गई। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। वहीं हादसे के बाद डम्फर चालक वाहन समेत मौके से फरार हो गया।
पुलिस का कहना है कि चालक और वाहन की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं तथा जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हालांकि स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि हर हादसे के बाद चालक कैसे फरार हो जाता है और आखिर ऐसे वाहनों की निगरानी कौन करेगा?
ग्रामीणों की मांग: स्पीड ब्रेकर लगाओ, जान बचाओ
घटना के बाद क्षेत्रीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि करनौल चौराहे पर स्पीड ब्रेकर, चेतावनी संकेतक, ट्रैफिक पुलिस की तैनाती और भारी वाहनों की गति सीमा तय की जानी चाहिए।
लोगों का साफ कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं।
खबरी न्यूज की सीधी बात
करनौल चौराहा अब केवल एक चौराहा नहीं रहा, बल्कि लोगों के लिए दहशत का दूसरा नाम बनता जा रहा है। सड़क निर्माण विकास की पहचान हो सकता है, लेकिन यदि उसी सड़क पर लोगों की जानें जाने लगें तो विकास का यह मॉडल गंभीर सवालों के घेरे में आ जाता है।
आज एक युवक की मौत हुई है, कल किसी और का बेटा, भाई या पिता इस लापरवाही का शिकार हो सकता है। सवाल यह नहीं है कि हादसा कैसे हुआ, सवाल यह है कि लगातार हो रहे हादसों के बावजूद आखिर जिम्मेदार कब जागेंगे?
कहीं ऐसा न हो कि सड़क पूरी बनने से पहले ही यह परियोजना दर्जनों परिवारों की खुशियां निगल जाए और प्रशासन केवल हादसों की गिनती करता रह जाए।






















