जिसे लोग समझ रहे थे छोटे शहर के बच्चे, उन्होंने नेशनल मंच पर उड़ाए बड़े-बड़ों के होश”
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया‚चन्दौली।
हरिद्वार के गुर्जर सम्राट धर्मशाला में जब देशभर के 12 राज्यों से आए खिलाड़ी अपनी-अपनी ताकत दिखा रहे थे…
जब एसएसबी के जवानों की मौजूदगी से पूरा हॉल “वार जोन” में बदल चुका था…
तभी यूपी के छोटे से नगर पंचायत चकिया से पहुंचे पांच बच्चों ने ऐसा “कराटे तूफान” खड़ा किया कि पूरा स्टेडियम कुछ देर के लिए सन्न रह गया…!

किसी ने सोचा भी नहीं था कि साधारण परिवारों से निकले ये बच्चे नेशनल चैंपियनशिप में ऐसा खेल दिखाएंगे कि बड़े-बड़े कोच तक दंग रह जाएंगे।
लेकिन कहते हैं ना…
“जब हौसले आग बन जाएं, तब छोटे शहर इतिहास लिखते हैं…!”
16 और 17 मई 2026 को आयोजित 8वीं आईएसएफ नेशनल कराटे चैंपियनशिप में चकिया के खिलाड़ियों ने सिर्फ हिस्सा नहीं लिया…
बल्कि मेडल टेबल पर “कब्जा” जमा दिया..!
🥇 20 वर्षीय कृतिका कुमारी ने ऐसा दमदार प्रदर्शन किया कि विरोधी खिलाड़ियों के चेहरे उतर गए… और गोल्ड मेडल सीधे चकिया की झोली में आ गिरा।
🥈 12 वर्षीय आयुष यादव ने रजत जीतकर बता दिया कि “चकिया का बच्चा किसी से कम नहीं!”
🥉 वहीं वैष्णवी कुमारी, सिमरन कुमारी और देवांश प्रताप सिंह ने कांस्य पदक जीतकर पूरे यूपी का सीना चौड़ा कर दिया।
लेकिन रुकिए…!
ये सिर्फ मेडल जीतने की कहानी नहीं है…
ये उन संघर्षों की कहानी है जहां किसी के घर में महंगे स्पोर्ट्स शूज़ नहीं थे…
किसी ने टूटी मैट पर प्रैक्टिस की…
तो किसी ने गर्मी और गरीबी से लड़ते हुए अपने सपनों को जिंदा रखा…!
बताया जा रहा है कि मुकाबले के दौरान जब चकिया के खिलाड़ियों ने लगातार जीत दर्ज करनी शुरू की तो दूसरे राज्यों के खिलाड़ी और कोच भी हैरान रह गए।
लोग पूछने लगे —
“ये चकिया आखिर है कहां…?”
प्रतियोगिता में उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री Madan Kaushik मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे।
उन्होंने खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए कहा कि “ऐसे बच्चे देश का भविष्य हैं।”

इधर चकिया में जैसे ही कराटे में जीत की खबर पहुंची, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई।
सोशल मीडिया पर बच्चों की फोटो और वीडियो आग की तरह वायरल होने लगे।
हर कोई बस यही कह रहा है —
“ये सिर्फ जीत नहीं…
चकिया की नई पहचान है!”

कराटे के सभी खिलाड़ियों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और कोच नीरज गुप्ता को दिया।
वहीं अब चकिया के लोग मांग कर रहे हैं कि इन खिलाड़ियों को सरकारी स्तर पर सम्मान और बेहतर सुविधाएं दी जाएं ताकि ये बच्चे आने वाले समय में इंटरनेशनल मंच पर भारत का नाम रोशन कर सकें।
क्योंकि अब चकिया सिर्फ नक्शे पर नहीं…
नेशनल कराटे चैम्पियनशिप के इतिहास में दर्ज हो चुका है…!
🖋️ खबरी न्यूज | एडिटर इन चीफ के.सी. श्रीवास्तव एडवोकेट ने कहा
“चकिया के इन बच्चों ने साबित कर दिया कि प्रतिभा बड़े शहरों की मोहताज नहीं होती। सीमित संसाधनों के बावजूद नेशनल मंच पर मेडल जीतना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। ये बच्चे आने वाले भारत की असली ताकत हैं।” — के.सी. श्रीवास्तव, एडिटर इन चीफ, Khabari News.com





















