“सिर्फ गंगा स्नान करने आया था चिंटू… लेकिन लौटकर आई उसकी लाश”
आफताब आलम की रिर्पोट
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क वाराणसी।
वाराणसी का चर्चित नमो घाट अब सिर्फ पर्यटन और खूबसूरती की वजह से नहीं, बल्कि एक सनसनीखेज हत्याकांड को लेकर पूरे प्रदेश में सुर्खियों में है। 24 मई 2026 को नमो घाट पर हुई युवक राजेश जायसवाल उर्फ चिंटू की दर्दनाक मौत ने अब बड़ा कानूनी और मानवाधिकार मोड़ ले लिया है। मामले में मानवाधिकार आयोग की सक्रियता के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

सोनभद्र निवासी 19 वर्षीय राजेश जायसवाल उर्फ चिंटू अपने चार दोस्तों के साथ वाराणसी घूमने और गंगा स्नान के लिए नमो घाट पहुंचा था। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। आरोप है कि घाट पर मामूली कहासुनी के बाद वहां तैनात निजी सुरक्षा कर्मियों ने युवकों पर लाठी-डंडों से हमला बोल दिया। इस हमले में चिंटू की मौत हो गई, जबकि उसके अन्य साथी गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
घटना के बाद से सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों तक गुस्से की लहर दौड़ गई है। अब इस पूरे मामले में अधिवक्ता एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ० खालिद वकार आबिद की एंट्री ने केस को और भी हाईप्रोफाइल बना दिया है।
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मानवाधिकार आयोग पहुंचा मामला, दर्ज हुआ वाद
डॉ० खालिद वकार आबिद ने राज्य मानवाधिकार आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कर इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और फॉरेंसिक जांच की मांग उठाई है। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वाद संख्या 10119/24/72/2026 पंजीकृत कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नमो घाट की सुरक्षा व्यवस्था अवैध तरीके से संचालित की जा रही थी और बिना वैध लाइसेंस के निजी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई थी। अगर यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ हत्या का मामला नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही का भी बड़ा खुलासा माना जाएगा।

“यह सिर्फ हत्या नहीं, मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन”
डॉ० खालिद वकार आबिद ने अपने प्रार्थना पत्र में साफ कहा है कि यह घटना कानून-व्यवस्था की साधारण विफलता नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने दोषी निजी सुरक्षा कर्मियों, सिक्योरिटी एजेंसी संचालकों और संबंधित अधिकारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
साथ ही उन्होंने मृतक परिवार को आर्थिक सहायता, सरकारी मुआवजा, घायलों का मुफ्त इलाज और नमो घाट की पूरी सुरक्षा व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग भी उठाई है।

SIT और फॉरेंसिक जांच की मांग से बढ़ा दबाव
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि आखिर नमो घाट पर ऐसा क्या हुआ कि एक युवक की जान चली गई? क्या यह सिर्फ विवाद था या फिर सुरक्षा के नाम पर बर्बरता?
इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए डॉ० खालिद वकार आबिद ने विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच के बिना सच सामने नहीं आएगा और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।
नमो घाट की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
घटना के बाद सबसे ज्यादा सवाल नमो घाट की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खड़े हो रहे हैं। आखिर निजी सुरक्षा कर्मियों को इतनी शक्ति किसने दी? क्या उनके पास वैध लाइसेंस था? क्या प्रशासन को इसकी जानकारी थी? और सबसे बड़ा सवाल—क्या एक मामूली विवाद में किसी की जान ले लेना सुरक्षा का हिस्सा है?
इन सवालों का जवाब अब सिर्फ वाराणसी ही नहीं, पूरा प्रदेश जानना चाहता है। मानवाधिकार आयोग की एंट्री के बाद यह मामला अब और ज्यादा संवेदनशील और गंभीर हो चुका है।
“नमो घाट की चमक के पीछे छिपा खौफ?”
गंगा किनारे बना नमो घाट आधुनिकता और पर्यटन का प्रतीक माना जाता था, लेकिन चिंटू की मौत ने उसकी चमक पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। अब लोगों की नजरें आयोग की कार्रवाई, पुलिस जांच और प्रशासनिक फैसलों पर टिकी हैं।
अगर जांच निष्पक्ष हुई तो कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं… और अगर नहीं हुई, तो यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।
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