“मेरे बेटे को जिस दर्द से मारा गया, अपराधियों को भी वही दर्द महसूस होना चाहिए”
खबरी न्यूज | विशेष रिपोर्ट
गाजियाबाद। कभी-कभी अपराध इतना क्रूर होता है कि पूरा समाज सन्न रह जाता है। बकरीद के दिन खोड़ा इलाके में 17 वर्षीय सूर्या चौहान की निर्मम हत्या ने न केवल गाजियाबाद बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर दिया था। एक मां की गोद सूनी हुई, एक परिवार का भविष्य उजड़ गया और पूरे इलाके में गुस्से की लहर दौड़ गई। अब इस सनसनीखेज हत्याकांड में एक बड़ा मोड़ आया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी असद को इंदिरापुरम क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में मार गिराया है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या एक एनकाउंटर से उस मां का दर्द खत्म हो जाएगा जिसने अपना जवान बेटा खो दिया? शायद नहीं।
खूनी खेल का अंत, लेकिन दर्द बाकी है
गाजियाबाद पुलिस को सूचना मिली थी कि सूर्या हत्याकांड का मुख्य आरोपी असद अपने एक साथी के साथ खोड़ा इलाके में किसी दोस्त से पैसे लेने आने वाला है। सूचना मिलते ही पुलिस ने पूरे इलाके में जाल बिछा दिया।
बताया जा रहा है कि जैसे ही बाइक पर सवार असद और उसका साथी पुलिस के सामने पहुंचे, उन्हें रुकने का इशारा किया गया। लेकिन गिरफ्तारी से बचने के लिए असद ने कथित तौर पर पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी मोर्चा संभाल लिया।
करीब 50 राउंड फायरिंग से पूरा इलाका गोलियों की आवाज से गूंज उठा। मुठभेड़ के दौरान एक पुलिस कांस्टेबल भी घायल हो गया। आखिरकार गोलियों की इस जंग में असद ढेर हो गया, जबकि उसका साथी मौके का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहा।’

एक मां की चीख: “मुझे उसके शव की तस्वीर दिखाई जाए”
एनकाउंटर की खबर मिलते ही सूर्या चौहान के परिवार में भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा। मां सरोज चौहान ने कहा कि उनके बेटे के साथ जो हुआ, वह कभी भुलाया नहीं जा सकता।
उनकी आंखों में आंसू थे लेकिन शब्दों में आग थी।

उन्होंने कहा—
“जिस तरह मेरे बेटे को मारा गया, उन्हें भी उसी तरह मारकर लाया जाना चाहिए था। मैं अभी तक अपने बेटे का चेहरा नहीं देख पाई हूं। मुझे असद की लाश की तस्वीर दिखाई जानी चाहिए।”
एक मां का यह दर्द केवल शब्द नहीं है, बल्कि उस टूटे हुए दिल की आवाज है जिसे कोई अदालत, कोई फैसला और कोई एनकाउंटर पूरी तरह शांत नहीं कर सकता।
बुलडोजर की मांग ने बढ़ाई सियासी और सामाजिक बहस
सूर्या की मां ने केवल एनकाउंटर पर संतोष नहीं जताया बल्कि आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने की भी मांग की है।
उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधियों को केवल जेल या मौत नहीं, बल्कि ऐसा संदेश मिलना चाहिए जिससे भविष्य में कोई भी मासूम की जिंदगी से खेलने की हिम्मत न कर सके।
यह बयान अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। लोग सोशल मीडिया पर भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
कौन था सूर्या ?
सिर्फ 17 साल की उम्र…आंखों में हजारों सपने…मां-बाप की उम्मीद…घर का चिराग…
लेकिन अपराधियों की नफरत और हिंसा ने उन सपनों को हमेशा के लिए बुझा दिया।
बकरीद के दिन हुई यह वारदात केवल एक हत्या नहीं थी, बल्कि समाज के सामने खड़ा एक बड़ा सवाल थी कि आखिर युवा पीढ़ी इतनी हिंसक क्यों होती जा रही है?
सूर्या की मौत के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया था। स्थानीय लोगों ने सख्त कार्रवाई की मांग की थी और पुलिस पर दबाव लगातार बढ़ रहा था।
पुलिस के लिए बड़ी सफलता, लेकिन जांच अभी जारी
गाजियाबाद पुलिस इस एनकाउंटर को बड़ी सफलता मान रही है। हालांकि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।
असद का साथी अब भी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। मौके से पुलिस ने एक पिस्टल और बाइक भी बरामद की है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है ताकि घटना में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान की जा सके।
खबरी न्यूज की बात
कानून अपना काम करता है, पुलिस अपनी कार्रवाई करती है, अदालतें फैसले सुनाती हैं। लेकिन जब किसी मां का जवान बेटा उसकी आंखों के सामने दुनिया छोड़ देता है, तब न्याय केवल कानूनी शब्द नहीं रह जाता, वह एक भावनात्मक संघर्ष बन जाता है।
आज असद का अंत हो गया। फाइलों में एक आरोपी का नाम बंद हो गया।
पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई कर दी। लेकिन सूर्या की मां की सूनी आंखें अब भी पूछ रही हैं—
“क्या मेरा बेटा वापस आ जाएगा?”
यही सवाल इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सच है।
और शायद यही वजह है कि गाजियाबाद का यह एनकाउंटर केवल एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि एक ऐसे परिवार की दर्दनाक कहानी का अध्याय है, जिसकी गूंज आने वाले समय तक सुनाई देती रहेगी।
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