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“अब बिना रजिस्ट्रेशन खाद नहीं! पीएम प्रणाम संगोष्ठी में गूंजा खेती का नया मंत्र, चकिया के किसानों को मिला बड़ा अलर्ट”

किसान संगोष्ठी
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया‚चन्दौली।

धर्मवीर सिंह की रिर्पोट

  • मुहम्मदाबाद कृभको केंद्र पर उमड़ा किसानों का सैलाब, जागरूकता की नई लहर
  • वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक और जैविक रास्ते पर जोर
  • यूरिया के अंधाधुंध प्रयोग पर चेतावनी-फसल भी कमजोर, मिट्टी भी बीमार”
  • रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: बिना पंजीकरण खाद मिलना लगभग नामुमकिन

 चकिया की मिट्टी से उठी चेतावनी-“अब बदलना ही होगा खेती का तरीका”

चकिया के मुहम्मदाबाद स्थित कृभको केंद्र पर जब पीएम प्रणाम किसान संगोष्ठी का आयोजन हुआ, तो यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं रहा—यह किसानों के लिए एक Wake-Up Call बन गया। आसपास के गांवों से उमड़ी भीड़ इस बात का संकेत थी कि अब किसान भी बदलाव चाहते हैं, लेकिन उन्हें सही दिशा की तलाश है।

SRVS Sikanderpur

खेत-खलिहानों की इस धरती पर आज जो आवाज गूंजी, वो साफ थी—
👉 “अब पारंपरिक सोच नहीं, वैज्ञानिक खेती ही भविष्य है!”

https://khabarinews.com/grand-gateway-inaugurated-at-chakia-block-a-bold-new-symbol-of-development/

 सबसे बड़ा अलर्ट: “No Registration, No Fertilizer”

कार्यक्रम में सबसे बड़ा मुद्दा बना—रजिस्ट्रेशन अनिवार्यता
अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा:
👉 “अगर आपने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया, तो खाद मिलना बेहद मुश्किल हो जाएगा।”

यह घोषणा सुनते ही कई किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखीं।
लेकिन साथ ही एक सख्त संदेश भी गया—
➡️ अब खेती में भी सिस्टम और अनुशासन जरूरी है।

 उर्वरक का संतुलन ही सफलता की कुंजी

कृभको के कृषि अधिकारी आदर्श कुमार सिंह ने किसानों को चेताया:

Dalimss Sunbeam Chakia
  • फसल की जरूरत के हिसाब से ही उर्वरक डालें
  • Bio Fertilizer और Chemical Fertilizer को एक साथ न मिलाएं
  • ज्यादा खाद = ज्यादा नुकसान

उन्होंने स्पष्ट कहा—
👉 “संतुलित खेती ही भविष्य की खेती है, वरना मिट्टी की सेहत खत्म हो जाएगी।”

 डॉ. कपिल देव सिंह का सीधा संदेश: “यूरिया का ओवरडोज़ = फसल बर्बाद”

कृषि विशेषज्ञ डॉ. कपिल देव सिंह ने किसानों को झकझोरते हुए कहा:

Silver Bells Chakia
  • ज्यादा यूरिया डालने से फसल दिखने में हरी होती है, लेकिन अंदर से कमजोर
  • उत्पादन घटता है, बीमारी बढ़ती है

साथ ही उन्होंने बताया:
👉 गेहूं कटाई के बाद मूंग की खेती अपनाएं—डबल इनकम का रास्ता यहीं है

कैटरपिलर और ‘मामा’ की चुनौती—अब पुरानी दवा बेअसर!

किसानों ने खुलकर अपनी समस्या रखी—

  • कैटरपिलर कीट फसल को तेजी से नुकसान पहुंचा रहे हैं
  • “मामा” रोग अब दवाओं से कंट्रोल नहीं हो रहा

इस पर विशेषज्ञों ने साफ कहा:
➡️ समय पर सही दवा और नई तकनीक अपनाना ही समाधान है

मशीनों का अति प्रयोग बना खतरा—फसल लोटने का कारण

विशेषज्ञों ने एक बड़ा खुलासा किया:
👉 ज्यादा रोटावेटर और कल्टीवेटर से मिट्टी कमजोर हो रही है

जिसका नतीजा—

  • फसल खड़ी नहीं रह पाती
  • उत्पादन घटता है

➡️ “Technology का सही इस्तेमाल ही असली स्मार्ट फार्मिंग है”

जैविक खेती की ओर वापसी—पुराना रास्ता ही नया समाधान

संगोष्ठी में बार-बार एक बात दोहराई गई—
👉 “पहले पूरी खेती जैविक थी, और अब फिर उसी दिशा में लौटना होगा”

जैविक खेती से:

  • मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी
  • फसल सुरक्षित और पौष्टिक होगी
  • बाजार में बेहतर दाम मिलेगा

 राजस्थान मॉडल ने बढ़ाया जोश—50-60 क्विंटल प्रति एकड़ संभव!

एक किसान ने जब राजस्थान का उदाहरण दिया, तो माहौल उत्साहित हो गया।
👉 1 एकड़ में 50-60 क्विंटल उत्पादन

डॉ. कपिल देव सिंह ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा:
➡️ “अगर तकनीक सही हो, तो यह कोई सपना नहीं—हकीकत है।”

सरकारी योजनाओं की जानकारी—“मौका है, फायदा उठाइए”

सहायक विकास अधिकारी अजीत कुमार पटेल ने बताया:

  • सरकार किसानों के लिए कई योजनाएं चला रही है
  • सही जानकारी और समय पर आवेदन से आय में बड़ा इजाफा संभव

 नेताओं और किसानों की मजबूत उपस्थिति

इस संगोष्ठी में

  • समिति सचिव रमेश चंद्र शुक्ला
  • पूर्व अध्यक्ष मंगला राय
  • किसान नेता बीरेन्द्र पाल
  • ओमप्रकाश पटेल, शैलेन्द्र चौहान सहित दर्जनों किसान मौजूद रहे

👉 उनकी भागीदारी ने कार्यक्रम को जमीनी ताकत दी

 KHABARI NEWS EDITOR K.C.Srivastava Ad. IMPACT: “अब खेती सिर्फ परंपरा नहीं, प्रोफेशन

यह संगोष्ठी सिर्फ जानकारी नहीं थी—
यह एक कृषि क्रांति का ट्रेलर था।

चकिया के किसानों को अब साफ समझ में आ गया है:

  • बिना रजिस्ट्रेशन कुछ नहीं
  • बिना संतुलन खेती नहीं
  • बिना तकनीक तरक्की नहीं

 फाइनल मैसेज (Public Call):

👉 “अगर आप किसान हैं, तो आज ही रजिस्ट्रेशन कराएं”
👉 “खेत को बचाना है, तो मिट्टी को समझना होगा”
👉 “वैज्ञानिक खेती अपनाइए, वरना पीछे छूट जाइए”

 KHABARI NEWS की यह ग्राउंड रिपोर्ट साफ कहती है—
👉 अब खेती भावनाओं से नहीं, विज्ञान और सिस्टम से चलेगी!

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