खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चंदौली/लखनऊ।
Smart Meter-ये सिर्फ एक फैसला नहीं… ये उस आवाज़ की जीत है जो गलियों से उठी, सोशल मीडिया पर गूंजी और आखिरकार सत्ता के गलियारों तक पहुंची।
उत्तर प्रदेश में Smart Prepaid Meter को लेकर छिड़ी लड़ाई में अब बड़ा मोड़ आ चुका है—
👉 जनता के लगातार विरोध के बाद सरकार को झुकना पड़ा!
अब Smart Meter Prepaid नहीं… Postpaid जैसा सिस्टम!
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश और ऊर्जा मंत्री A. K. Sharma के ऐलान के बाद
👉 प्रदेश में लगे सभी Smart Prepaid Meter अब Postpaid की तरह काम करेंगे।
यानि अब…
💡 पहले बिजली इस्तेमाल होगी
📄 फिर हर महीने बिल आएगा
⏳ और भुगतान के लिए मिलेंगे पूरे 15 दिन

साथ ही…
👉 30 अप्रैल तक के बकाए को 10 किस्तों में जमा करने की सुविधा
👉 महीने के अंदर बिजली काटने पर रोक
यह फैसला सीधे तौर पर लाखों उपभोक्ताओं के लिए राहत का पैकेज बनकर सामने आया है।
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क्यों झुकना पड़ा सरकार को?
सवाल बड़ा है… और जवाब भी साफ है—
👉 जनता का गुस्सा!

प्रदेश में करीब 3.5 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से
👉 87 लाख के यहां स्मार्ट मीटर
👉 और 75 लाख के यहां Smart Prepaid Meter लगाए गए
लेकिन जैसे ही ये मीटर लगे…
👉 शिकायतों का अंबार लग गया

📌 “मीटर तेज चल रहा है…”
📌 “रिचार्ज खत्म तो तुरंत अंधेरा…”
📌 “रिचार्ज के बाद भी सप्लाई नहीं…”
गांव से शहर तक…
हर वर्ग में नाराजगी दिखी…
और यही विरोध धीरे-धीरे एक आंदोलन बन गया।
Smart Meter- सियासत भी समझिए… 2027 का गेम!
अब इस फैसले को सिर्फ राहत के तौर पर देखना अधूरा होगा…
👉 इसके पीछे 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति भी साफ झलक रही है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि—
👉 Smart Meter को लेकर बढ़ता असंतोष
👉 ग्रामीण और मध्यम वर्ग की नाराजगी
👉 विपक्ष का हमला
इन सबको देखते हुए सरकार ने वक्त रहते damage control किया है।
👉 क्योंकि बिजली हर घर की जरूरत है…
👉 और नाराजगी हर वोट में बदल सकती है!
Smart Meter पर दिल्ली का संकेत भी आया था पहले
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री Manohar Lal Khattar पहले ही साफ कर चुके थे—
👉 “Prepaid Smart Meter अनिवार्य नहीं है…”
इसके बावजूद यूपी में तेजी से मीटर लगाए जा रहे थे, जिससे सवाल उठने लगे थे।
Smart Meter पर उपभोक्ता परिषद की बड़ी जीत
इस पूरे संघर्ष में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भी अहम भूमिका निभाई।
अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने लगातार
👉 याचिकाएं डालीं
👉 विरोध दर्ज कराया
👉 और आयोग को सक्रिय किया
👉 आखिरकार… दबाव बढ़ा…
👉 और पावर कॉरपोरेशन को फैसला बदलना पड़ा।
“राहत नहीं… असली दर्द अभी बाकी है!”
Smart Meter पर सरकार के फैसले के बाद राहत की जो तस्वीर दिखाई जा रही है…
वो अधूरी है… बल्कि कहें तो आधा सच है!
क्योंकि ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है—
👉 एक ईमानदार उपभोक्ता की सबसे बड़ी लड़ाई प्रीपेड या पोस्टपेड नहीं है…
👉 असली जंग है तेजी से दौड़ते स्मार्ट मीटर के खिलाफ!
⚡ वही मीटर…
जो पहले 1000 का बिल देता था…
आज वही 3000–4000 का झटका दे रहा है!
अब सवाल ये है—
👉 जब मीटर ही तेज भाग रहा है…
👉 तो बिल सही कैसे आएगा?
और जब बिल ही गलत है…
👉 तो पेमेंट पहले करें या बाद में…
👉 नुकसान तो उपभोक्ता का ही है!
सबसे बड़ा दर्द…
👉 इस गलत बिल को हर हाल में भरना पड़ता है!
क्योंकि—
❌ स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं
❌ शिकायतों पर ठोस कार्रवाई नहीं
❌ और अंत में वही जवाब—
👉 “पहले बिल जमा करो… फिर देखेंगे!”
😡 यानी…
बिजली आपकी…
पैसा आपका…
और सिस्टम की गलती का बोझ भी आप पर!
सीधा सवाल सरकार से
👉 क्या सिर्फ Prepaid को Postpaid करने से समस्या खत्म हो गई?
👉 क्या Smart Meter की रीडिंग अब सही हो गई?
👉 क्या उपभोक्ता को न्याय मिलने लगा?
💥 जवाब अब भी नहीं है!
KHABARI FINAL PUNCH
“ये राहत नहीं… ये सिर्फ गुस्से को शांत करने की कोशिश है!
असली जीत तब होगी—
जब हर घर को मिलेगा सही मीटर… सही रीडिंग… और सही बिल!”
Smart Meter-जनता की जीत या सियासी चाल?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
👉 क्या ये फैसला सिर्फ जनता की जीत है?
👉 या फिर 2027 चुनाव से पहले सियासी संतुलन?
सच जो भी हो…
👉 फिलहाल जनता को राहत जरूर मिली है
👉 और सरकार ने बड़ा रिस्क टाल दिया है
✍️ Editor’s Short Note (K.C. Srivastava, Adv.)
“Smart Meter का फैसला सिर्फ तकनीकी नहीं था… ये जनता की सहनशीलता की परीक्षा बन गया था।
सरकार का यू-टर्न स्वागतयोग्य है, लेकिन असली जीत तब होगी जब हर उपभोक्ता को सही बिल, सही समय और बिना डर के बिजली मिले।
2027 दूर नहीं… और जनता अब हर फैसले का हिसाब रख रही है।”
Smart Meter-FINAL IMPACT
✔ Prepaid से राहत
✔ Postpaid जैसी सुविधा
✔ 15 दिन का भुगतान समय
✔ बकाया पर किस्त सुविधा
✔ चुनावी असर की शुरुआत
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“जहां खबर नहीं… आंदोलन की आवाज बनती है!”




















