???? हत्या नहीं, एक ‘चीरहरण’ था संतोष की ज़िंदगी का!
शनिवार की सुबह लगभग दस बजे चकिया की शांत गलियों में जो हुआ – वह केवल एक युवक की हत्या नहीं थी, वह चकिया की आत्मा पर हमला था।
संतोष मौर्या, जो सरल स्वभाव और सौम्य व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे, जिनका हृदय हर किसी के लिए धड़कता था, उनकी नृशंस हत्या ने उस घर को नहीं, पूरे मोहल्ले, पूरे शहर को बेसुध कर दिया।
“मां बार-बार बेहोश हो रही थीं, पिता की आंखें पत्थर हो गई थीं, और भाई डॉ. प्रदीप मौर्या को जैसे कोई काटता रहा हो… एक-एक करके जो भी उनके घर पहुंचा, फफक कर रो पड़ा।”

पिता राधेश्याम व माता सावित्री देवी की आँखें पथरा गई
पिता राधेश्याम तो जैसे बेसुध हो चुके है माता सावित्री देवी की आँखे पथरा सी गई है। जैसे न कुछ बोल पा रही है न कह पा रही है। एकदम जिन्दा लाश बने हुए है माता पिता।

हत्या के बाद मौर्या निवास पर मातम पसरा है।
मिलने-जुलने वालों का ऐसा सैलाब उमड़ा है मानो पूरा चकिया अपना एक बेटा खो बैठा हो।

सोमवार की रात, जैसे ही अंधेरे ने चकिया को घेरा – पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. महेन्द्रनाथ पांडेय संतोष की आत्मा की शांति के लिए सांत्वना व्यक्त करने पहुंचे। साथ में थे –
- भाजपा विधायक कैलाश खरवार
- चकिया चेयरमैन गौरव श्रीवास्तव
- भाजपा जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह
- महामंत्री उमाशंकर सिंह
- व ग्रीन गार्डियन डॉ. परशुराम सिंह
- पूर्व विधायक राजेश बहेलिया
- अन्य भाजपा पदाधिकारी
इन सभी ने शोकाकुल परिवार से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया,और तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की लेकिन…
“जिन आंखों में बेटे की चिता जलती हो, वहां शब्द बेअसर हो जाते हैं… वहां केवल सन्नाटा बोलता है।”
???? चकिया की आत्मा रो रही है…
इस वीभत्स कांड ने चकिया के बीते वर्षों के इतिहास को भी झकझोर दिया।
सामाजिक ताने-बाने में भय की गांठ पड़ गई है।
बाजारों की रौनक बुझ गई, गलियों में सन्नाटा है और स्कूल जाते बच्चों की आंखों में डर है।

“पहले बच्चों को स्कूल भेजना आम बात थी, आज मां-बाप एक पल में दस बार सोचते हैं… कहीं हमारा बच्चा भी तो…”
???? भाई का खो जाना – डॉ. प्रदीप मौर्या की आंखें कह रही हैं सब कुछ…
जब भाजपा जिलाउपाध्यक्ष और सम्मानित नेता डा. प्रदीप मौर्या ‘बंगाली’ ने अपने छोटे भाई की लाश देखी, तो सारा शहर उनकी चीख में शामिल हो गया।
“भाई… उठ जा… सबको छोड़ कर मत जा…” – ये शब्द उन्होंने बार-बार दोहराए।
उनके दुख ने सियासत की परिभाषा को बदल दिया – जहां नेता पहले होते हैं, वहाँ सिर्फ एक टूटे हुए भाई को देखा गया।

???? शोकसभाएं… मोमबत्तियां… लेकिन सवाल अब भी खड़े हैं…
हर रोज़ शोकसभाएं हो रही हैं।
मोमबत्ती मार्च निकाला गया।
फूल चढ़ाए जा रहे हैं… मगर:

“क्या इन फूलों से संतोष लौट आएंगे?”
“क्या हत्यारे पकड़े जाएंगे?”
“क्या चकिया को फिर वही सुरक्षा का भाव मिलेगा?”
???? क्या कहती है पुलिस… और क्या कहती है जनता?
पुलिस प्रशासन का कहना है कि जांच तेज़ी से चल रही है और हत्यारे को पकड लिया गया है वह हास्पीटल में है । पब्लिक ने उसकी इतनी घुनाई कर दी है कि वह भा जीवन और मौत से जूझ रह है।
लेकिन आम जनमानस सशंकित है:
“क्या ये कोई साजिश थी?
क्या किसी को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया?
क्या चकिया में फिर कोई सुरक्षित है?”
इन सवालों के जवाब न पुलिस के पास हैं, न प्रशासन के पास… लेकिन जनता अब जवाब चाहती है।

???? सांत्वना देने पहुँचे पर्यावरण योद्धा डॉ. परशुराम – ‘धरती रोती है, जब निर्दोष का खून बहता है’
ग्रीन गार्डियन व लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्डी डॉ. परशुराम सिंह भी मौर्या निवास पहुंचे।
उन्होंने परिजनों को गले लगाकर सान्त्वना दी और कहा:
“संतोष जैसे शांत और सौम्य युवक की हत्या केवल एक व्यक्ति की नहीं, हमारे सामाजिक मूल्यों की हत्या है।
आज पेड़ रो रहे हैं, पंछी मौन हैं और आसमान काला है – क्योंकि एक निर्दोष की चीखें वहां गूंज रही हैं।”
???? चकिया की चेतावनी – अब और नहीं!
इस घटना ने सिर्फ संतोष को नहीं छीना, इसने चकिया के सीने में एक स्थायी घाव छोड़ दिया है।
लेकिन इस शहर ने ठान लिया है:
“अब न कोई संतोष मरेगा, न कोई परिवार उजड़ेगा।
चकिया चुप नहीं रहेगा, ये न्याय पाएगा!”
????️ अंतिम शब्द – एक दीप, एक संकल्प, एक न्याय
संतोष अब इस दुनिया में नहीं हैं…
लेकिन उनकी याद, उनका मुस्कुराता चेहरा और उनके अधूरे सपने चकिया की हर गली में जिंदा हैं।
खबरी न्यूज़ की ओर से हम यह संकल्प करते हैं:
“हम तब तक नहीं रुकेंगे, जब तक संतोष को न्याय नहीं मिलेगा।
हम चुप नहीं बैठेंगे, क्योंकि यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, पूरी इंसानियत की परीक्षा है।”
???? खास अपील – अगर आपने कुछ देखा, सुना या जानते हैं इस हत्या के बारे में, तो कृपया सामने आइए। आपके एक शब्द से किसी परिवार को न्याय मिल सकता है।
???? संतोष मौर्या को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि ????
????️ ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को यह अपार दुःख सहने की शक्ति दें।
???? ये रिपोर्ट यदि आपके दिल को छूती है, तो इसे साझा कीजिए। आवाज़ बनिए न्याय की!
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????️ रिपोर्ट: खबरी न्यूज टीम, चकिया | सम्पादन: K.C. Shrivastava (एडवोकेट)
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