सरोवर के पास लगी हाईमास्क लाइट लंबे समय से बंद, पुरानी नगर पंचायत की लाइट भी बेकार – बाढ़ के बीच अंधेरे से हादसे का खतरा
खबरी न्यूज। चकिया, चंदौली। नगर पंचायत चकिया के चिर-परिचित एवं आस्था के प्रमुख केंद्र मां काली मंदिर परिसर में इन दिनों अंधेरा पसरा हुआ है। मंदिर परिसर स्थित सरोवर के समीप काफी लागत से लगाई गई हाईमास्क लाइट लंबे समय से बंद पड़ी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस उद्देश्य से हाईमास्क लाइट लगाई गई थी, वह वर्तमान में महज शोपीस बनकर रह गई है।
कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष श्री प्रकाश मिश्रा ने आरोप लगाया कि यह हाईमास्क लाइट रॉबर्ट्सगंज सांसद छोटेलाल खरवार के प्रयास से लगाई गई थी। उनके मुताबिक, लाइट लगने के कुछ समय बाद ही उसका शिलापट्ट भी टूट गया और अब लंबे समय से हाईमास्क लाइट बंद पड़ी है। इसके चलते मां काली मंदिर परिसर और सरोवर के आसपास रात के समय अंधेरा छाया रहता है।

पुरानी लाइट भी नहीं दे रही रोशनी
स्थानीय लोगों की परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। उनका कहना है कि नगर पंचायत चकिया द्वारा पहले से लगाई गई प्रकाश व्यवस्था भी वर्तमान में काम नहीं कर रही है। ऐसे में मंदिर परिसर जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक एवं धार्मिक स्थल पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने से श्रद्धालुओं और आसपास के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरोवर लबालब, अंधेरा बढ़ा रहा खतरा
वर्तमान समय में क्षेत्र बाढ़ की विभीषिका से प्रभावित है और मंदिर परिसर के समीप स्थित सरोवर पानी से लबालब भरा हुआ है। ऐसे में रात के समय प्रकाश व्यवस्था का बंद होना गंभीर चिंता का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अंधेरे में सरोवर के आसपास आवागमन के दौरान फिसलने, पानी में गिरने अथवा किसी अन्य दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
खासकर श्रद्धालुओं, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए रात के समय यहां पर्याप्त रोशनी होना बेहद जरूरी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो किसी अनहोनी के बाद जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा।
जिम्मेदारों से तत्काल मरम्मत की मांग
दास्थानीय नागरिकों ने नगर पंचायत प्रशासन से मांग की है कि मां काली मंदिर परिसर में बंद पड़ी हाईमास्क लाइट और पुरानी प्रकाश व्यवस्था की तत्काल जांच कराकर उसे चालू कराया जाए। साथ ही सरोवर के आसपास अतिरिक्त रोशनी की व्यवस्था की जाए, ताकि बाढ़ के इस दौर में किसी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके। अभी मात्र केवल सांसद दर्शना सिंह द्वारा दो लाईट लगाई गई है जिसमें से एक केवल जलती है जो हैंडपम्प के पास है। अब सवाल यह है कि जिस हाईमास्क लाइट पर लाखों रुपये खर्च हुए, वह आखिर कब तक शोपीस बनी रहेगी? आस्था के इस प्रमुख स्थल पर अंधेरा कब दूर होगा और जिम्मेदार अधिकारी कब इस समस्या का संज्ञान लेकर कार्रवाई करेंगे—यह देखने वाली बात होगी।

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