खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क नौगढ़, चंदौली।
भीषण गर्मी, रेड अलर्ट और उमस भरी रात… लेकिन सरकारी अस्पताल की हालत ऐसी कि मरीजों से ज्यादा लाचार दिखी पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था। सोनभद्र लोकसभा क्षेत्र के सांसद Chhotelal Singh Kharwar जब देर रात अचानक नौगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो अस्पताल की बदहाली खुलकर सामने आ गई।
“अस्पताल नहीं, अव्यवस्था का अड्डा!”
निरीक्षण के दौरान वार्डों में कई पंखे और एसी बंद मिले। शौचालयों से दुर्गंध उठ रही थी। सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त दिखी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मौके से गायब मिले।

सांसद के पहुंचने पर गार्ड ने फोन कर कर्मचारियों को बुलाया। इस पर सांसद का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कहा कि यह मरीजों की जिंदगी के साथ सीधा खिलवाड़ है।
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“सरकारी दावे जमीन पर फेल!”
सांसद छोटेलाल खरवार ने साफ कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन नौगढ़ CHC उन दावों की पोल खोल रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल रहा और जिम्मेदार अधिकारी मनमानी में व्यस्त हैं।
“इलाज कम, रेफर ज्यादा!”
मरीजों और तीमारदारों ने सांसद के सामने दर्द बयां किया। लोगों ने बताया कि अस्पताल में इलाज के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। गंभीर मरीजों को तुरंत चकिया, रॉबर्ट्सगंज, वाराणसी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर रेफर कर दिया जाता है।

महिला चिकित्सक, आर्थोपेडिक और दंत रोग विशेषज्ञ तक अस्पताल में मौजूद नहीं हैं। ग्रामीण मरीज इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
“आठ साल से तैनाती, लेकिन रात में गायब!”
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अवधेश कुमार सिंह पटेल का अस्पताल में कभी रात्रि प्रवास नहीं होता। दिन में भी उनकी मौजूदगी कुछ घंटों तक सीमित रहती है।

लोगों का कहना है कि अस्पताल की पूरी व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।
“बिजली गई तो अस्पताल अंधेरे में डूबा”
भीषण गर्मी के बीच बिजली कटते ही अस्पताल परिसर अंधेरे में डूब जाता है। जनरेटर और सोलर सिस्टम सिर्फ शोपीस बनकर खड़े हैं।
मरीज गर्मी से बेहाल रहते हैं लेकिन बैकअप व्यवस्था नदारद है। पेयजल की सुविधा भी अस्पताल में लगभग खत्म मिली।
“इमरजेंसी रूम बना स्टोर रूम!”
निरीक्षण के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि अस्पताल का इमरजेंसी कक्ष ही स्टोर रूम के रूप में इस्तेमाल हो रहा है।
करीब आधा दर्जन डॉक्टरों की नियुक्ति के बावजूद एक ही चिकित्सक को लगातार 36 से 48 घंटे तक ओपीडी और इमरजेंसी संभालनी पड़ती है।
“अब आंदोलन होगा!”
सांसद ने मौके पर ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी को फोन कर तत्काल व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द हालात नहीं सुधरे तो अगले सप्ताह क्षेत्रीय जनता बड़ा आंदोलन करेगी।
उन्होंने साफ कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
“स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल”
नौगढ़ CHC का यह औचक निरीक्षण सिर्फ एक अस्पताल की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी सच्चाई है।
कागजों में योजनाएं चमक रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में मरीज बदहाल हैं। सवाल यही है कि आखिर ग्रामीण जनता कब तक रेफर सिस्टम के भरोसे जिंदगी बचाने की लड़ाई लड़ती रहेगी?
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