खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया‚चन्दौली।
Dr. Vinay Prakash Tiwari, Founder – Daddy’s International School, Bishunpura Kanta, Chandauli
“गुल्लक में पैसा सोता है, SIP में पैसा बढ़ता है…”
यह सिर्फ एक लाइन नहीं, बल्कि बदलते भारत की नई आर्थिक सोच है। जिस देश में कभी बच्चों को सिक्कों की खनक से बचत सिखाई जाती थी, आज उसी देश में छोटी उम्र से “Investment” और “Money Management” की शिक्षा जरूरी होती जा रही है।
मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल इंडिया के दौर में अब केवल पैसे जमा कर लेना काफी नहीं है। सवाल यह है कि आपका पैसा “काम” कर रहा है या नहीं?
यही सोच आज परिवारों, स्कूलों और समाज के सामने सबसे बड़ा आर्थिक सवाल बन चुकी है।
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Daddy’s International School के Founder डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने बच्चों की आर्थिक शिक्षा को लेकर जो संदेश दिया है, वह आज के समय में बेहद प्रासंगिक माना जा रहा है। उनका साफ कहना है कि आने वाले समय में वही बच्चा आर्थिक रूप से मजबूत होगा, जिसे कम उम्र में ही Saving और Investment का फर्क समझ आ जाएगा।


पहले गुल्लक थी सपना, अब SIP है भविष्य
एक समय था जब बच्चे त्योहारों, रिश्तेदारों और जेब खर्च से मिले पैसे गुल्लक में डालकर खुश हो जाते थे। उन्हें लगता था कि उनका पैसा बढ़ रहा है।
सच कहें तो वह दौर भावनाओं का था। गुल्लक सिर्फ मिट्टी का बर्तन नहीं, बल्कि अनुशासन और बचत की पहली पाठशाला हुआ करती थी।
लेकिन समय बदल चुका है।
आज महंगाई इतनी तेजी से बढ़ रही है कि यदि पैसा सिर्फ घर में पड़ा रहे, तो उसकी “खरीदने की ताकत” कम होती जाती है।
उदाहरण के तौर पर—
आज ₹100 में मिलने वाली चीज कुछ साल बाद ₹200 तक पहुंच सकती है। यानी पैसा वही रहेगा, लेकिन उससे मिलने वाली सुविधाएं आधी हो जाएंगी।
यहीं से SIP की ताकत शुरू होती है।

SIP आखिर है क्या?
SIP यानी Systematic Investment Plan।
सरल भाषा में समझें तो हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम निवेश करना।
यह तरीका खास इसलिए माना जाता है क्योंकि इसमें पैसा केवल रखा नहीं जाता, बल्कि उसे बढ़ने का मौका दिया जाता है।

यदि कोई माता-पिता अपने बच्चे के नाम हर महीने सिर्फ ₹500 की SIP शुरू करते हैं और यह निवेश 15 साल तक जारी रहता है, तो तस्वीर बदल सकती है।
आंकड़ों में समझिए खेल
| तरीका | 15 साल में कुल जमा राशि | संभावित परिणाम |
|---|---|---|
| गुल्लक में ₹500 महीना | लगभग ₹90,000 | सिर्फ जमा पैसा |
| SIP में ₹500 महीना | ₹2 लाख से ₹3 लाख+ तक संभव | Compounding का फायदा |
(रिटर्न बाजार के अनुसार बदल सकते हैं)
यानी फर्क सिर्फ “पैसा रखने” और “पैसा बढ़ाने” का है।
Compounding: पैसे का जादू
दुनिया के बड़े निवेशक कहते हैं कि “Compounding दुनिया का आठवां अजूबा है।”
इसका मतलब आसान है—
आपके पैसे पर जो कमाई होती है, आगे चलकर उस कमाई पर भी कमाई होने लगती है।
यानी शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन समय उसे बड़ा बना देता है।
और यही वजह है कि वित्तीय विशेषज्ञ बच्चों के लिए जल्दी SIP शुरू करने की सलाह देते हैं।
बदलते भारत में बदल रही है सोच
अब माता-पिता केवल डॉक्टर-इंजीनियर बनाने की बात नहीं कर रहे।
वे चाहते हैं कि उनका बच्चा आर्थिक रूप से भी समझदार बने।
चंदौली जैसे जिलों में भी अब लोग Mutual Fund, SIP और Financial Planning जैसी चीजों को समझने लगे हैं। पहले जहां निवेश का मतलब सिर्फ जमीन, सोना या FD माना जाता था, वहीं अब युवा पीढ़ी Digital Investment की ओर तेजी से बढ़ रही है।
स्कूलों में भी जरूरी है Financial Education
सबसे बड़ा सवाल यही है कि बच्चों को स्कूल में क्या सिर्फ किताबें पढ़ाना काफी है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि बच्चों को छोटी उम्र में ही “Inflation”, “Budget”, “Investment” और “Money Management” जैसी बातें आसान भाषा में सिखाई जाएं, तो वे भविष्य में आर्थिक फैसले बेहतर तरीके से ले सकेंगे।
आज का बच्चा मोबाइल चलाना जल्दी सीख जाता है, लेकिन पैसे की वैल्यू समझने में पीछे रह जाता है।
यही गैप भविष्य में आर्थिक समस्याओं की वजह बनता है।
भावनात्मक जुड़ाव भी जरूरी
गुल्लक की अहमियत आज भी खत्म नहीं हुई है।
वह बच्चों को अनुशासन और बचत की आदत सिखाती है। लेकिन अब समय यह कह रहा है कि गुल्लक के साथ-साथ निवेश की समझ भी दी जाए।
क्योंकि आने वाला भारत सिर्फ “कमाने” वालों का नहीं, बल्कि “सही निवेश करने” वालों का होगा।
और शायद इसलिए आज की सबसे बड़ी सीख यही है—
“बचत अच्छी आदत है… लेकिन सही निवेश बेहतर भविष्य है।”
खबरी न्यूज विशेष | आर्थिक जागरूकता अभियान




















