????कलेक्ट्रेट सभागार, चंदौली
✍️ रिपोर्ट : ख़बरी न्यूज़ ब्यूरो
???? शुरुआत एक गरज के साथ – “अब सिर्फ मीटिंग नहीं, एक्शन भी दिखेगा”
कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग की अध्यक्षता में एक हाई वोल्टेज समीक्षा बैठक आयोजित हुई, जिसने पूरे चंदौली जिले के प्रशासनिक तंत्र को हिला दिया। यह कोई आम बैठक नहीं थी—यह थी एक “एक्शन चार्ज मीटिंग”, जहां कामचोर अधिकारियों को सीधे लपेटा गया और ईमानदार काम करने वालों को मिला स्पष्ट समर्थन।




बैठक में मुख्यमंत्री डैशबोर्ड, IGRS शिकायत प्रणाली, और ₹50 लाख से अधिक की लागत वाली निर्माणाधीन परियोजनाओं की गहन समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने शब्दों के तीर नहीं, चेतावनियों की बरसात की और कहा—“सीएम डैशबोर्ड पर खराब प्रदर्शन अब अपराध की तरह देखा जाएगा, और जो अधिकारी सुधार नहीं करेंगे, उनके लिए विभागीय कार्यवाही तय है।”
????️ परियोजनाओं में देरी पर सख्त कार्रवाई की तलवार लटकी!
“जो काम समय से नहीं होगा, वो फिर माफ़ नहीं होगा।“
— जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग
बाबा कीनाराम आश्रम, आईटीआई भवन चकिया, ट्रांजिट हॉस्टल, सीएचसी सेंटर, विद्यालय भवन, ट्रामा सेंटर और सैयदराजा में बालिका आवास जैसी बहुचर्चित परियोजनाओं में धीमी रफ्तार देखकर डीएम की आंखों में क्रोध साफ दिखा। अधिशासी अभियंता, सीएनडीएस, पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग के अफसरों को सीधे कहा गया:
???? “या तो निर्माण में तेजी लाओ, या फिर अपना पद छोड़ने की तैयारी करो!”
???? सीएम डैशबोर्ड पर ‘फिसड्डी’ साबित हुए खंड विकास अधिकारी!
सीएम डैशबोर्ड पर प्रदर्शन के लिए बने पैरामीटर्स पर जब रिपोर्ट सामने आई, तो जिलाधिकारी के चेहरे पर नाखुशी साफ झलकी। कई खंड विकास अधिकारियों द्वारा लगातार खराब प्रदर्शन दिखाने पर उन्होंने बेहद कड़ा संदेश दिया—

“खुद को संभाल लो, अगली समीक्षा में सुधार नहीं हुआ तो जिम्मेदारी तय करके कार्यवाही होगी।”
उन्होंने दो टूक कह दिया कि सीएम डैशबोर्ड को मज़ाक नहीं समझा जाए। यह जनता की नब्ज़ है और इसमें गड़बड़ी का मतलब है – जनता से धोखा।
???? IGRS शिकायतों में भी दिखानी होगी ‘सेंस ऑफ़ रिस्पॉन्सबिलिटी’
IGRS यानी Integrated Grievance Redressal System, जनता की आवाज़ का सबसे जरूरी माध्यम है। जिलाधिकारी ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि—

- प्रतिदिन खुद IGRS पर शिकायतें देखें
- प्रतिदिन कम से कम 5 शिकायतकर्ताओं से सीधा संवाद करें
- गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें
“अगर शिकायतकर्ता असंतुष्ट है, तो आपके विभाग का कोई औचित्य नहीं बचता।” — जिलाधिकारी
????️ बिल्डिंग्स नहीं, भरोसे बनाओ — निर्माण की गति में लाओ बिजली जैसी तेजी!
जिलाधिकारी ने समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि ट्रामा सेंटर, आईटीआई भवन, बालिका छात्रावास, नौगढ़ और चंद्रप्रभा बांध का पुनरोद्धार जैसे कार्य प्रतीक हैं जिले के विकास का। लेकिन अगर यही प्रतीक अधूरे पड़े रहें, तो ये विश्वासघात है जनता से।
PWD अधिशासी अभियंता से जब पूछा गया कि निर्माण कार्य धीमा क्यों है, तो उनका जवाब जिलाधिकारी को बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं लगा। तुरंत फटकार लगाते हुए कहा गया—
“आपका जवाब नहीं, आपकी नीयत झलक रही है। सुधार नहीं किया तो दंड भुगतने को तैयार रहें।”
???? प्रशासनिक समन्वय की मांग – अलग-अलग नहीं, साथ चलें कार्यदायी संस्थाएं
बैठक में मौजूद CNDs, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, सिंचाई विभाग, और अन्य कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिए गए कि अब कोई विभाग अकेला नहीं चलेगा। सबको मिलकर काम करना होगा। “अब विकास व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक जिम्मेदारी है।”
???? बैठक में मौजूद प्रमुख अधिकारी:
- मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत साईं
- मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वाई. के. राय
- अधिशासी अभियंता PWD
- सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी
- CNDs, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित सभी विभागों के प्रतिनिधि
???? निष्कर्ष – अब सिर्फ लक्ष्य नहीं, प्रदर्शन की परीक्षा है ये
यह बैठक सिर्फ रिपोर्टिंग या कागजों की समीक्षा नहीं थी। यह थी एक चेतावनी—साफ शब्दों में कहा गया कि अब नतीजे ही बताएंगे कौन सही है और कौन सिर्फ कुर्सी गर्म कर रहा है।
जिलाधिकारी की स्पष्टवादिता और परिणामोन्मुखी रवैये ने साबित कर दिया कि चंदौली का प्रशासन अब टालमटोल नहीं, बल्कि ट्रैक्शन में है।
???? Khabari News का विशेष संपादकीय टिप्पणी:
“अगर हर जिले में जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग जैसा नेतृत्व हो, तो मुख्यमंत्री डैशबोर्ड की रिपोर्ट जनता का भरोसा बने, और विकास योजनाएं सिर्फ फाइलों में नहीं, ज़मीन पर दिखें।”
— संपादक के.सी. श्रीवास्तव (अधिवक्ता), ख़बरी न्यूज़






















