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पचवनिया में निर्माणाधीन पुल बना किसानों की चिंता का कारण, सिचाई होगी बाधित ? : Pachwania Under Construction Bridge

Pachwania Under Construction Bridge

छलका की ऊंचाई को लेकर भड़का विरोध, 300 बीघा फसल पर खतरा—किसानों ने शासन से की संशोधन की मांग : Pachwania Under Construction Bridge

चकिया, चंदौली:
तहसील चकिया के अंतर्गत पचवनिया गांव में बन रहा निर्माणाधीन पुल अब किसानों के लिए सुविधा से ज्यादा संकट का संकेत बनता नजर आ रहा है। यह पुल न केवल आवागमन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था का एक अहम केंद्र भी है। इसी स्थान से सैकड़ों गांवों की सिंचाई का कंट्रोल होता है। लेकिन निर्माण कार्य में कथित तकनीकी खामियों को लेकर अब स्थानीय किसानों ने विरोध का बिगुल फूंक दिया है।

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दरअसल, किसानों का आरोप है कि पुल के साथ बनाए जा रहे “छलका” (ओवरफ्लो सिस्टम) की ऊंचाई और ढलान सही मानकों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि जिस लेवल पर वर्तमान में छलका  की ढलैया बनाई जा रही है, उससे भविष्य में सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। किसानों के अनुसार, जब नहर खोली जाएगी—खासतौर पर शुरुआती 5 से 10 दिन और अंतिम 10 दिनों में—पानी का स्तर बेहद कम रहता है। ऐसे में यदि छलका  की ऊंचाई वर्तमान स्तर पर ही रखी गई, तो केराडीह माइनर और ठेकहा माइनर तक पानी पहुंच ही नहीं पाएगा।

SRVS Sikanderpur
Brijesh Chauhan Chakia
Brijesh Chauhan Chakia

ग्रामीणों ने बताया कि पुराने पुल में इस समस्या का समाधान पहले से मौजूद था। वहां “स्लॉट” (खांचे) बने हुए थे, जिनमें किसान खुद बास और बल्ली (स्थानीय सामग्री) का इस्तेमाल कर पानी को रोकते और उसका स्तर बढ़ाते थे। इससे पानी का लेवल कुल्बा से लगभग एक फीट ऊपर पहुंच जाता था, जिससे नहर में पर्याप्त दबाव बनता था और दोनों माइनरों में सुचारू रूप से पानी पहुंचता था। परिणामस्वरूप, पूरे सीजन में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो जाता था।

लेकिन अब नए पुल के डिजाइन में इस तरह के स्लॉट का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है। साथ ही, पुल के पिलरों के बीच की चौड़ाई भी अधिक रखी गई है, जिससे पानी का प्रवाह नियंत्रित करना और मुश्किल हो जाएगा। किसानों का स्पष्ट कहना है कि धीमी गति से बहने वाली नहर के दौरान पानी सीधे आगे निकल जाएगा और माइनरों में नहीं मुड़ पाएगा। इसका सीधा असर करीब 300 बीघा कृषि भूमि पर पड़ेगा, जहां फसलें सिंचाई के अभाव में सूख सकती हैं।

किसानों ने इस मुद्दे को लेकर एकजुटता दिखाते हुए शासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि निर्माण कार्य में तत्काल संशोधन किया जाए। उनकी प्रमुख मांग है कि छलका की ऊंचाई कम से कम एक फीट बढ़ाई जाए और पुराने पुल की तरह स्लॉट की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, ताकि पानी का स्तर नियंत्रित किया जा सके।

स्थानीय किसान नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह केवल एक गांव का मुद्दा नहीं रहेगा बल्कि सैकड़ों गांवों की खेती प्रभावित होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर वे आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं।

Dalimss Sunbeam Chakia

वहीं, अभी तक संबंधित विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह से यह मामला तूल पकड़ रहा है, उससे साफ है कि प्रशासन को जल्द ही इस ओर ध्यान देना होगा।

पचवनिया का यह पुल जहां विकास की उम्मीद लेकर आया था, वहीं अब यह किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है। यदि तकनीकी खामियों को नजरअंदाज किया गया, तो इसका खामियाजा सीधे अन्नदाता को भुगतना पड़ेगा। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन किसानों की बात को गंभीरता से ले और समय रहते समाधान सुनिश्चित करे।

Silver Bells Chakia

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