गायघाट भगड़ा में अवैध खनन पर चला प्रशासन का बुलडोजर मूड, महिलाओं की भीड़ और हंगामे के बीच फरार हुई जेसीबी
चकिया/शिकारगंज।
पूर्वांचल में अवैध खनन के खिलाफ अब प्रशासन का रुख पूरी तरह आक्रामक होता नजर आ रहा है। शिकारगंज क्षेत्र के ग्राम गायघाट भगड़ा में शुक्रवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब वन विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने अवैध मिट्टी खनन की सूचना पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर दी। कार्रवाई के दौरान हंगामा, महिलाओं की भीड़, सड़क जाम की कोशिश और जेसीबी लेकर चालक के फरार होने की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी।
लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस चेतावनी की हो रही है, जो मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कथित खनन माफियाओं को लेकर दी। अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा—

“माफियाओं से जाकर कह दो, अब प्रशासन उनके सपनों में भी खौफ बनकर पहुंचेगा।”
यही बयान अब इलाके में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है।
बताया जा रहा है कि वन विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि गायघाट भगड़ा क्षेत्र में वन भूमि और उसके आसपास जेसीबी मशीनों से अवैध मिट्टी खनन कराया जा रहा है। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग की टीम प्रशासनिक सहयोग के साथ मौके पर पहुंची।
टीम ने जैसे ही कार्रवाई शुरू की, इलाके में खलबली मच गई। मौके पर एक जेसीबी मशीन खनन कार्य करते हुए पकड़ी गई। वन विभाग के अधिकारियों ने मशीन को कब्जे में लेने की कोशिश की, तभी मशीन मालिक और उसके समर्थक वहां पहुंच गए।
मशीन मालिक का कहना था कि खनन निजी भूमि पर हो रहा था और वन विभाग बिना वजह कार्रवाई कर रहा है। वहीं वन विभाग का दावा था कि मशीन वन भूमि में चल रही थी और नियमों का खुला उल्लंघन किया जा रहा था।

देखते ही देखते मामला गरमा गया। गांव से बड़ी संख्या में महिलाएं मौके पर पहुंच गईं और प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। महिलाओं ने शोर-शराबा करते हुए टीम को घेरने की कोशिश की। कुछ लोगों ने सड़क जाम करने की भी कोशिश की, जिससे कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण बन गई।
इसी अफरा-तफरी का फायदा उठाकर जेसीबी चालक मशीन लेकर मौके से फरार हो गया। प्रशासनिक टीम के सामने यह सबसे बड़ी चुनौती बन गई। हालांकि अधिकारियों ने तत्काल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुला लिया।

मौके पर पुलिस क्षेत्राधिकारी रघुराज, प्रभारी कोतवाल अर्जुन सिंह समेत कई थानों की फोर्स पहुंच गई। पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए हंगामा कर रहे लोगों को खदेड़ा और सड़क जाम की कोशिश को नाकाम कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रशासनिक अधिकारियों का तेवर इस बार बिल्कुल अलग दिखाई दिया। अधिकारियों ने साफ कहा कि अब अवैध खनन के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति पर काम होगा और महिलाओं की आड़ लेकर सरकारी कार्रवाई में बाधा डालने वालों को भी बख्शा नहीं जाएगा।
खनन माफियाओं में मचा हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में खनन से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से रात के अंधेरे में मिट्टी खनन का खेल चल रहा था, लेकिन इस बार प्रशासन ने सीधे मौके पर पहुंचकर बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।
सूत्रों की मानें तो फरार जेसीबी चालक और खनन से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर ली गई है। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम लगातार दबिश दे रही है। जल्द ही कई नाम सामने आ सकते हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ प्रशासन का तेवर
घटना के बाद इलाके में प्रशासनिक सख्ती की चर्चा सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है। लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह कार्रवाई जारी रही तो अवैध खनन के नेटवर्क पर बड़ा असर पड़ सकता है।
वहीं दूसरी ओर कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि छोटे लोगों पर कार्रवाई होती है, जबकि बड़े खनन माफिया अब भी सिस्टम से बच निकलते हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि इस बार किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
अब आगे क्या?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ एक दिन की सख्ती बनकर रह जाएगी या फिर अवैध खनन के पूरे नेटवर्क पर बड़ा प्रहार होगा। फिलहाल गायघाट भगड़ा की घटना ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि प्रशासन अब सीधे टकराव के मूड में है।
और अधिकारियों की एक लाइन पूरे इलाके में गूंज रही है—
“अब खनन माफियाओं को प्रशासन का डर सिर्फ सड़कों पर नहीं, सपनों में भी दिखाई देगा…”






















