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???? “मगध की माटी से उठी कविताई सुगंध”: अंतरराष्ट्रीय मगही चौपाल-351 में बही भाषा, भाव और भारत की बयार

✒️ रिपोर्ट: ख़बरी न्यूज़ नेशनल न्यूज , नई दिल्ली ब्यूरो

“मगही भाषा, अब केवल बोली नहीं — यह बन चुकी है एक आंदोलन। चौपालों की सीढ़ियाँ अब विश्वपटल की ओर बढ़ चुकी हैं।”
— संपादकीय टिप्पणी, के.सी. श्रीवास्तव, प्रधान संपादक, ख़बरी न्यूज़

???? अंतरराष्ट्रीय मगही चौपाल-351:

“गांव से ग्लोबल” की ओर बढ़ता भाषा आंदोलन

SRVS Sikanderpur

29 जून 2025 की रात, जब शहरों की चकाचौंध धीमी पड़ चुकी थी, तब मगध की आत्मा अपने सबसे सुंदर रूप में जाग रही थी — कविता के सुरों में।
विश्व मगही परिषद्, नई दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित “अंतरराष्ट्रीय मगही चौपाल (वेबिनार)-351” ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि मगही केवल संवाद नहीं, एक संस्कार है।

यह कोई साधारण कवि सम्मेलन नहीं था, यह था —
???? संवेदनाओं का विस्फोट
???? भाषाई आत्मगौरव की घोषणा
???? गांव-गिरांव की महकती मिट्टी से निकले स्वर

???? सरस्वती वंदना से आरंभ, विचारों की वंदना तक

कार्यक्रम का शुभारंभ गीतकार कविवर राजकुमार जी की सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने वातावरण को भक्तिमय और सृजनशील बना दिया।

प्रो. डॉ. राजेंद्र राज की बहुचर्चित ग़ज़ल संग्रह “घास पर नमी नहीं” का लोकार्पण भी इसी अवसर पर किया गया। यह संग्रह 91 ग़ज़लों का अद्भुत संकलन है, जो ग्रामीण जीवन के राग-विराग को बखूबी उकेरता है।

Dalimss Sunbeam Chakia

???? मंच पर मौजूद गरिमामयी साहित्यिक हस्तियाँ

???? मुख्य अतिथि: श्री दीपक कुमार (जहानाबाद)
???? अध्यक्ष: श्री लालमणि विक्रांत
???? महासचिव: प्रो. डॉ. नागेन्द्र नारायण
???? विशिष्ट वक्ता: डॉ. शिवेन्द्र नारायण सिंह

???? विचारों की गूंज: मगही की आत्मा को स्वर

श्री दीपक कुमार ने कहा:

Silver Bells Chakia

“मगही कविता केवल भावों की नहीं, आत्मा की भाषा है। यह मातृभूमि की स्मृतियों में समाई हुई धड़कन है।”

अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री लालमणि विक्रांत बोले:

“351वीं चौपाल इस बात का प्रमाण है कि मगही कविता अब जनांदोलन बन चुकी है। यह केवल सांस्कृतिक क्रिया नहीं, भाषायी पुनर्जागरण की क्रांति है।”

महासचिव प्रो. नागेन्द्र नारायण ने कहा:

“हमारा उद्देश्य है — ‘गांव से ग्लोबल’ तक मगही की प्रतिष्ठा। चौपालें हमारे समर्पण, संवाद और संस्कार का संगम हैं।”

डॉ. शिवेन्द्र नारायण सिंह का कथन रहा:

“यह कवि सम्मेलन काव्य यात्रा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक नवजागरण का मिशन है।”

???? कविताई का सागर: भावों की धार और गांव की पुकार

इस डिजिटल चौपाल में भाग लेने वाले प्रतिभागियों की रचनाएं मानवता, प्रकृति, प्रेम और जनजागरण से सराबोर रहीं।

???? प्रमुख विषय:

  • मानसून और खेतों की गंध
  • नारी सशक्तिकरण और आत्मसम्मान
  • सामाजिक कुरीतियाँ और बदलाव की पुकार
  • देशभक्ति और राष्ट्रगौरव
  • गाँवों की संघर्ष-कथा
  • प्रेम, विरह और मानवीय संवेदनाएं

✍️ प्रतिभागी कवियों की झलक:

इस मंच ने रंग जमा दिया जब निम्न कवियों ने अपनी काव्य वर्षा की:

  1. अरविंद अंजान – पावस प्रेम और धरती का रोमांच
  2. सुमंत – मगध की परंपरा और मातृभाषा की पुकार
  3. राजकुमार कवि जी – लोकगीतों में छुपा इतिहास
  4. राजेन्द्र राज – शब्दों की नमी से सजी संवेदना
  5. सोनिया शर्मा – नारी चेतना और ग्रामीण विमर्श
  6. महेन्द्र प्रसाद देहाती – खेत-खलिहानों की बोलती कविता
  7. गौतम परासर – समाज सुधार की आह्वान
  8. डॉ. रविशंकर शर्मा – राष्ट्रभक्ति से लबालब
  9. गुड़िया – नारी जीवन की पीड़ा और प्रकाश
  10. दयानंद प्रसाद गुप्ता – गाँव के टूटते रिश्तों पर चिंतन
  11. जैनेन्द्र प्रसाद रवि – प्रकृति और आत्मा का मिलन
  12. भागीरथ वर्मा – मगध के ऐतिहासिक स्वरों का सजीव चित्रण
  13. पूनम कुमारी – प्रेम और आत्मसम्मान की कविता

???? आगामी प्रकाशन: चौपाल से छपाई तक

डॉ. शिवेन्द्र नारायण सिंह ने यह ऐलान किया कि शीघ्र ही परिषद् की ओर से एक अंतरराष्ट्रीय मगही कविता संग्रह प्रकाशित किया जाएगा, जिसमें 351 चौपालों में प्रस्तुत रचनाएं संग्रहित होंगी।

???? ‘गांव से ग्लोबल’ – आंदोलन की अगली मंज़िल

विश्व मगही परिषद् ने इस चौपाल के अंत में भावुक अपील करते हुए कहा:

“हम सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों, कवियों, पत्रकारों, साहित्य प्रेमियों और प्रवासी भारतीयों से आग्रह करते हैं कि मगही भाषा के नवजागरण में सहभागी बनें। यह आंदोलन अब सिर्फ मगध की सीमाओं तक सीमित नहीं, यह हमारी पहचान और आत्मा का हिस्सा बन चुका है।”

???? सोशल मीडिया अपील:

#मगही_चौपाल #कविता_का_गौरव #मगध_का_मान
“मगही बोले के संकोच छोड़ दीं, अभिमान से कहीं – हम मगही हईं।”

???? अंतिम पंक्तियाँ:

जब भाषाएं विलुप्त होती हैं, तब संस्कृति विलीन होती है। लेकिन जब मगही जैसी भाषा अपने कवियों और चौपालों के माध्यम से फिर जीवित होती है — तब न केवल साहित्य को नई सांस मिलती है, बल्कि पूरी पीढ़ी को अपनी जड़ें पहचानने का अवसर मिलता है।

????️ ख़बरी न्यूज़ के संपादकीय मंडल द्वारा प्रमाणित
???? विशेष प्रस्तुति: एडवोकेट के.सी. श्रीवास्तव (प्रधान संपादक, ख़बरी न्यूज़)
???? हैशटैग्स: #MagahiChaupal #MagahiKavita #BhojpuriPride #SanskritikJagran #KhabariNews

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