रिपोर्ट: खबरी न्यूज़ वाराणसी | संपादक: के.सी. श्रीवास्तव (एड०)
“सच वही, जो जनभावना कहे”



???? “सितारे ज़मीन पर” का पोस्टर फूंका, आमिर के खिलाफ नारेबाज़ी – जनता बोली: ‘ये सिनेमा नहीं, साज़िश है!’
वाराणसी – जहाँ एक ओर काशी की गलियों में शंख और घंटियों की गूंज होती है, वहीं दूसरी ओर आज इन गलियों में गुस्से की गूंज सुनाई दी। बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान की आने वाली फिल्म “सितारे ज़मीन पर” का काशी में ज़बरदस्त विरोध हुआ।

प्रणाम वंदे मातरम् समिति के बैनर तले अध्यक्ष अनूप जायसवाल के नेतृत्व में सैकड़ों युवाओं और देशभक्तों ने फिल्म के पोस्टर को आग के हवाले कर दिया और नारेबाजी करते हुए साफ कहा –
“जिसे देश से डर लगता है, उसे देश की ज़मीन पर कमाने का हक़ नहीं!”
???? “देशभक्ति बिकाऊ नहीं!” – विरोध का असली कारण क्या है?
इस विरोध की जड़ें महज़ एक फिल्म नहीं, बल्कि आमिर खान की पिछली गतिविधियों और बयानों में गहराई से छुपी हैं।
अनूप जायसवाल ने कहा –
“यह वही आमिर खान हैं जिन्होंने कुछ साल पहले कहा था कि उन्हें भारत में डर लगता है। मगर वही इंसान अब फिल्मों में ‘देशभक्ति’ का मुखौटा पहनकर दर्शकों की भावनाओं से खेल रहा है।”
उन्होंने आगे कहा:
“क्या ये सिर्फ़ एक इत्तेफाक है कि आमिर खान अक्सर तुर्की और पाकिस्तान जैसे भारत विरोधी देशों के समर्थन में दिखाई देते हैं? और जैसे ही फिल्म आती है, वो ‘राष्ट्रप्रेम’ का राग अलापते हैं। ये क्या कोई इमोशनल स्क्रिप्ट है?”
????️ पोस्टर जला, भीड़ गरजी – “बायकॉट बॉलीवुड गैंग!”
काशी के गोदौलिया चौराहे पर जैसे ही आमिर खान की फिल्म का पोस्टर जलाया गया, माहौल ज्वालामुखी की तरह फट पड़ा।

भीड़ में मौजूद लोगों ने कहा:
“ये फिल्में सिर्फ पर्दा दिखाती हैं, असलियत में ये हमारे बच्चों के दिमाग में जहर भरती हैं। आज हम चुप हैं, कल ये हमारी संस्कृति को निगल जाएंगी।”
सोमनाथ विश्वकर्मा ने जोर देकर कहा –

“हम आमिर खान की इस फिल्म का बायकॉट करते हैं। और देशवासियों से भी आग्रह करते हैं कि वो ऐसे कलाकारों की फिल्मों पर एक भी पैसा खर्च न करें।”
???????? 26/11 पर चुप्पी, लेकिन ‘डर’ भारत से!
गौरतलब है, आमिर खान ने जब यह बयान दिया था कि “भारत में डर लगता है,” तब पूरे देश की भावना आहत हुई थी।
प्रदर्शनकारियों ने पूछा:
“जब 26/11 के हमले हुए, तब आमिर ने पाकिस्तान का नाम तक नहीं लिया, और अब उन्हें भारत से डर लगता है? क्या ये डर सच्चा है या फिल्मों की स्क्रिप्ट का हिस्सा?”
???? सोशल मीडिया पर भी उबाल – #BoycottAamirKhan ट्रेंडिंग!
काशी में विरोध की आग सोशल मीडिया तक जा पहुंची।
X (पूर्व में Twitter) पर #BoycottAamirKhan और #DeshdrohiCinema ट्रेंड करने लगे।
लोगों ने पोस्ट किया:
“जो भारत को बदनाम करता है, वो हमारी जेब से कमाएगा? नहीं चलेगा!”
“This is not cinema, this is a soft attack on nationalism!”
???? क्या फिल्म ‘सितारे ज़मीन पर’ में कुछ आपत्तिजनक है?
अभी तक फिल्म का ट्रेलर सामने नहीं आया है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि –
“नाम से ही फिल्म इमोशनल ट्रैप की तरह लगती है। इसमें कोई भी राष्ट्रविरोधी संदेश हुआ, तो देशभर में विरोध तेज़ होगा।”
???? दीपक आर्य की अपील – “अबकी बार राष्ट्रवाद की मार!”
समिति के दीपक आर्य ने कहा –
“हम अब और चुप नहीं बैठ सकते। जब भी कोई कलाकार भारत के खिलाफ बोलेगा, उसे हर शहर में इसी तरह जवाब मिलेगा। ये काशी है – यहां संस्कृति की रक्षा और राष्ट्र की भक्ति दोनों सिखाई जाती है।”
????️ फिल्म के बहाने भावनाओं से खेल – ये कला है या चाल?
आमिर खान की फिल्मों में हमेशा इमोशनल और प्रेरणादायक कहानियाँ रही हैं। लेकिन लोगों का मानना है कि इन फिल्मों के पीछे कहीं राजनीतिक एजेंडा या सॉफ्ट नैरेटिव प्रोपेगेंडा तो नहीं?
“क्या आमिर खान बार-बार अपने विरोधी बयानों से सुर्खियाँ बटोरते हैं ताकि उनकी फिल्में चर्चा में रहें?”
“क्या यह राष्ट्रवाद को बेचने की स्क्रिप्टेड कोशिश है?”
???? जनता की आवाज़ – “अब बस!”
वाराणसी की जनता ने इस प्रदर्शन में स्पष्ट संदेश दे दिया कि
“अब बॉलीवुड से देशभक्ति का ढोंग नहीं चाहिए, अब चाहिए ईमानदारी और सच्चा भारतीय समर्थन।”
???? निष्कर्ष – अब जनता का गुस्सा जाग गया है!
यह विरोध महज़ एक फिल्म का नहीं, यह विरोध उस सोच का है जो
– देश से डरती है,
– देश को कोसती है,
– लेकिन कमाई भी भारत की मिट्टी से ही करती है।
काशी से उठी यह चिंगारी अगर नहीं बुझी, तो जल्दी ही यह पूरे देश में फैलेगी।
???? “ये आवाज़ काशी से उठी है, अब पूरे भारत में गूंजेगी!”





















