“जहां गोलियों की गूंज थी, वहां अब विकास की दस्तक…”
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया‚चन्दौेली।
चंदौली के नौगढ़ इलाके से आई यह खबर सिर्फ एक सरकारी दफ्तर के दोबारा खुलने की नहीं, बल्कि उस डर, दहशत और नक्सली साए पर लोकतंत्र की वापसी की कहानी है, जिसने कभी पूरे इलाके को दहला दिया था।

जिस मझगाई रेंज कार्यालय पर 17 नवंबर 2004 की शाम नक्सलियों ने बम ब्लास्ट और अंधाधुंध फायरिंग कर खूनी हमला किया था, उसी कार्यालय में अब 22 साल बाद फिर से सरकारी कामकाज शुरू हो गया है। नारियल फूटा, फीता कटा और जंगल के उस सन्नाटे में विकास की नई आवाज सुनाई दी, जहां कभी सिर्फ गोलियों की गूंज सुनाई देती थी।
जब दहशत ने रोक दी थी सरकारी व्यवस्था
17 नवंबर 2004…
शाम का वक्त…
मझगाई रेंज जंगलों में अचानक धमाके की आवाज गूंजी। नक्सलियों ने मझगाई रेंज कार्यालय को निशाना बनाते हुए बम से हमला किया। विस्फोट के बाद ताबड़तोड़ फायरिंग हुई। इस हमले में मझगाई रेंज के दो फॉरेस्ट गार्ड और यूपी पुलिस का एक जवान शहीद हो गया।
उस दौर में नौगढ़ और आसपास का इलाका नक्सली गतिविधियों का बड़ा केंद्र माना जाता था। सरकारी अमला भय में था, ग्रामीण खौफ में थे और जंगलों में कानून से ज्यादा बंदूक की हुकूमत दिखाई देती थी।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई…

इस घटना के महज 24 घंटे बाद 19 नवंबर 2004 को नक्सलियों ने यूपी की सबसे बड़ी नक्सली वारदात को अंजाम दिया। नौगढ़ तहसील के हिनौत घाट में पीएसी जवानों से भरे ट्रक को विस्फोट से उड़ा दिया गया। इस हमले में 16 जवान शहीद हो गए थे।
उस घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर दिया था।

प्रभारी मंत्री संजीव गोंड़ ने मृतकों के परिजनों को सौंपा राहत चेक, गांव-गांव पहुंचकर बांटा भरोसा
22 साल बाद बदली तस्वीर
अब वही मझगाई रेंज कार्यालय फिर से अपने मूल स्थान पर लौट आया है। नवनिर्मित भवन का शुभारंभ रेंजर द्वारा नारियल फोड़कर और फीता काटकर किया गया।
यह सिर्फ भवन उद्घाटन नहीं था, बल्कि उस भय पर जीत का प्रतीक था जिसने दशकों तक जंगल और गांवों को जकड़ रखा था।
प्रभारी मंत्री संजीव गोंड ने इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था और सुशासन के कारण समाज भयमुक्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि 2017 के बाद प्रदेश में माहौल तेजी से बदला और जिन इलाकों में कभी सरकारी व्यवस्था पहुंचने से डरती थी, वहां अब विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं।
“अब वनवासी डर में नहीं, विकास के साथ जीएंगे”
मझगाई रेंज के रेंजर ने कहा कि कार्यालय के दोबारा खुलने से वन क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी और वनवासी परिवारों को बड़ा लाभ मिलेगा। अब उन्हें छोटी-छोटी समस्याओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
वन विभाग की योजनाएं सीधे गांव तक पहुंचेंगी।
जंगल संरक्षण बेहतर होगा।
और सबसे बड़ी बात — लोग भयमुक्त माहौल में अपनी जिंदगी जी सकेंगे।
जंगलों में अब बंदूक नहीं, भरोसे की आवाज
मझगाई रेंज कभी नक्सली हमलों के कारण वीरान हुआ मझगाई रेंज कार्यालय आज फिर से आबाद हो गया है। यह कहानी सिर्फ चंदौली की नहीं, बल्कि उस बदलते उत्तर प्रदेश की तस्वीर है जहां सरकार अब उन इलाकों तक पहुंच रही है जिन्हें कभी “रेड जोन” कहा जाता था।
22 साल पहले जिस जगह मातम पसरा था, आज वहीं उम्मीद का दीप जल रहा है…
और शायद यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत है।





















