डीडीयू नगर, चन्दौली | खबरी न्यूज
आफताब आलम की रिर्पोट

डीडीयू नगर में अतिक्रमण हटाओ अभियान का पांचवां दिन शहरवासियों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं रहा। सुबह से लेकर शाम तक जीटी रोड पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जहां आम राहगीरों से लेकर रेल यात्री, मरीज़ और स्कूल के बच्चे तक जाम के झाम में फंसे नजर आए। हालात ऐसे रहे कि “सफर” एक संघर्ष बन गया और शहर की रफ्तार थम सी गई।
जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त कार्रवाई के तहत लगातार बुलडोजर चलाए जा रहे हैं। प्रशासन की सख्ती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नगर के प्रमुख बाजारों में लगभग सभी दुकानें बंद रहीं और कई स्थानों पर खुद व्यापारियों ने ही अपने प्रतिष्ठानों को तोड़ना शुरू कर दिया। वजह साफ है—प्रशासन का अल्टीमेटम कि यदि स्वयं अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो बुलडोजर से कार्रवाई की जाएगी।

दहशत में व्यापारी, सड़क पर धूल और डर का माहौल
पूरा नगर इन दिनों धूल, मलबे और अनिश्चितता के बीच जी रहा है। जहां एक ओर प्रशासन इसे “व्यवस्था सुधार” का कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर व्यापारियों में भारी रोष है। उनका कहना है कि कम से कम एक माह का समय दिया जाना चाहिए था ताकि वे व्यवस्थित तरीके से अपने प्रतिष्ठान हटा सकें।

एक स्थानीय दुकानदार ने कहा, “ऐसा लग रहा है जैसे कोई आपदा आ गई हो। हर तरफ तोड़फोड़ हो रही है, समझ नहीं आ रहा कि आगे क्या होगा।”
डीडीयू जंक्शन के यात्री भी बेहाल

एशिया के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में गिने जाने वाले डीडीयू जंक्शन पर रोजाना हजारों यात्रियों का आवागमन होता है। लेकिन मौजूदा हालात में स्टेशन से बाहर निकलते ही यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। न तो आसपास खाने-पीने की दुकानें खुली हैं और न ही सुचारू यातायात व्यवस्था।
रेल से उतरने वाले यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए या तो लंबा इंतजार करना पड़ रहा है या फिर पैदल ही रास्ता तय करना पड़ रहा है।
मरीज और छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित
इस अभियान का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ा है जिन्हें तत्काल आवागमन की जरूरत होती है—जैसे मरीज और छात्र। एंबुलेंस तक जाम में फंसी देखी गईं, जबकि कई स्कूली बच्चे समय पर स्कूल नहीं पहुंच सके।
एक अभिभावक ने नाराजगी जताते हुए कहा, “बच्चे घंटों जाम में फंसे रहे, पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्रशासन को कम से कम वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी।”
व्यवस्था बनाम असुविधा—कहां है संतुलन?
अतिक्रमण हटाना निश्चित रूप से शहर की व्यवस्था के लिए जरूरी कदम है, लेकिन जिस तेजी और तरीके से यह अभियान चलाया जा रहा है, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या प्रशासन को पहले वैकल्पिक इंतजाम नहीं करने चाहिए थे? क्या व्यापारियों और आम जनता को पर्याप्त समय नहीं मिलना चाहिए था?
सुधार की राह में संवेदनशीलता भी जरूरी
डीडीयू नगर में चल रहा यह अभियान यह तो दिखा रहा है कि प्रशासन व्यवस्था सुधारने के लिए गंभीर है, लेकिन साथ ही यह भी साफ हो गया है कि इस प्रक्रिया में आम जनता की परेशानियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
शहर आज बुलडोजर और जाम के बीच जूझ रहा है—अब देखना होगा कि प्रशासन इस असंतुलन को कैसे साधता है।





















