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“मां काली मंदिर की जमीन पर खत्म हुआ ‘दावों का खेल’, फिर चर्चा में आया चकिया प्रशासन!”

काली मंदिर से तालाब तक… और तालाब से जनता तक!

चकिया में फिर दिखी ‘एक्शन प्रशासन’ की वापसी, तहसीलदार देवेंद्र बने चर्चा का केंद्र
मां काली मंदिर की सरकारी जमीन पर अवैध दावों का अंत, तालाब-भीटा बचाने की बड़ी कानूनी पहल
कभी प्रेम प्रकाश मीणा की चर्चा होती थी, आज उसी अंदाज में गूंज रहा है एक नाम—देवेंद्र कुमार

विशेष रिपोर्ट | के.सी. श्रीवास्तव एडवोकेट, एडिटर खबरी न्यूज 

चकिया (चंदौली)। प्रशासनिक इतिहास में कुछ फैसले केवल फाइलों में दर्ज नहीं होते, बल्कि जनता की स्मृतियों में जगह बना लेते हैं। चकिया तहसील में इन दिनों कुछ ऐसा ही माहौल दिखाई दे रहा है। एक ओर सदियों पुराने मां काली जी मंदिर और ऐतिहासिक तालाब की सरकारी भूमि पर अवैध दावों को कानून की कसौटी पर खारिज कर विकास का रास्ता साफ किया गया है, तो दूसरी ओर गांव-गांव पहुंचकर तालाब, नाली, रास्ते और सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने का अभियान प्रशासन की नई कार्यशैली की पहचान बनता जा रहा है।

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क्षेत्र में आज सबसे अधिक चर्चा जिस नाम की हो रही है, वह है तहसीलदार देवेंद्र कुमार। वजह केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि कार्रवाई का तरीका है। कहीं फावड़ा हाथ में लेकर खुद रास्ता खुलवाना, कहीं बुलडोजर के साथ अतिक्रमण हटवाना, कहीं तालाब बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ना और कहीं दशकों पुराने विवादों का मौके पर समाधान करना।

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पहले बात मां काली मंदिर और ऐतिहासिक तालाब की

चकिया नगर के हृदय स्थल पर स्थित मां काली जी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और इतिहास का केंद्र है। मंदिर से सटा ऐतिहासिक तालाब वर्षों से श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है।

लेकिन समय के साथ इस भूमि पर निजी स्वामित्व के दावे और विवाद खड़े होने लगे। कई लोग इस सार्वजनिक और सरकारी भूमि को निजी संपत्ति साबित करने की कोशिश में जुट गए।

मामला जब तहसील प्रशासन तक पहुंचा तो तहसीलदार देवेंद्र कुमार ने केवल औपचारिक रिपोर्ट नहीं बनाई बल्कि राजस्व अभिलेखों, खतौनियों, न्यायालयी आदेशों और ऐतिहासिक रिकॉर्ड का गहन अध्ययन कराया।

Dalimss Sunbeam Chakia

रिपोर्ट ने बदल दिया पूरा खेल

तहसीलदार की विस्तृत रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया गया कि—

गाटा संख्या 318 और 319

यह भूमि तालाब और उसके भीटे की है। सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध हिंचलाल तिवारी बनाम कमला देवी फैसले के अनुसार तालाब की भूमि का स्वरूप बदला नहीं जा सकता।

Silver Bells Chakia

इसलिए यह भूमि राज्य सरकार की संपत्ति है और रहेगी।

गाटा संख्या 320 और 321

यह भूमि सार्वजनिक उपयोग और मंदिर परिसर की भूमि है, जिस पर किसी व्यक्ति विशेष का मालिकाना अधिकार नहीं बनता।

रिपोर्ट में पूर्व में किए गए कथित नामांतरणों और दावों को कानूनन शून्य माना गया।

यानी साफ संदेश—

“आस्था की जमीन पर निजी स्वार्थ नहीं चलेगा।”

अब चमकेगा मां काली मंदिर परिसर

नगर पंचायत की वंदन योजना के तहत अब पूरे परिसर के सौंदर्यीकरण का रास्ता साफ हो गया है।

योजना के तहत—

✅ श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं

✅ तालाब संरक्षण

✅ पर्यावरण संरक्षण

✅ बेहतर प्रकाश व्यवस्था

✅ भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था

✅ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा

जैसे कार्य प्रस्तावित हैं।

लंबे समय से प्रतीक्षित इस योजना के आगे बढ़ने से श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है।

DM के आदेश के बाद चकिया में शुरू हुआ मेगा ऑपरेशन

हाल ही में जिलाधिकारी द्वारा राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि—

“किसी दबाव में नहीं, केवल कानून के अनुसार कार्य करें।”

ऐसा लगता है कि चकिया तहसील प्रशासन ने इस निर्देश को मिशन बना लिया।

इसके बाद जो घटनाक्रम शुरू हुआ, उसने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

नीबी कला: तालाब पर कब्जा हटाया

नीबी कला गांव में वर्षों से तालाब की भूमि पर कब्जे की शिकायत मिल रही थी।

राजस्व और पुलिस टीम मौके पर पहुंची।

पैमाइश हुई।

रिकॉर्ड खंगाले गए।

और फिर तालाब की भूमि कब्जामुक्त कराई गई।

गांव के बुजुर्गों ने कहा कि वर्षों बाद प्रशासन ने तालाब को उसकी पहचान लौटाने का प्रयास किया है।

भूसी: नाली खुली तो ग्रामीणों को मिली राहत

ग्राम सभा भूसी में नाली पर अतिक्रमण के कारण जल निकासी बाधित थी।

बरसात में जलभराव की समस्या गंभीर हो जाती थी।

राजस्व टीम ने मौके पर पहुंचकर पैमाइश कराई और अतिक्रमण हटवाया।

परिणाम—

नाली खुली।

जल निकासी का रास्ता साफ हुआ।

ग्रामीणों को राहत मिली।

भूसीकृत पुरवा: रुका विकास फिर चल पड़ा

भूसीकृत पुरवा में सार्वजनिक कार्य बाधित थे।

स्थानीय शिकायतों के बाद प्रशासन मौके पर पहुंचा।

विवाद सुलझाया गया।

और निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया गया।

बलिया कला: वर्षों पुराना विवाद सुलझा

बलिया कला में लंबे समय से चल रहा भूमि विवाद लोगों की परेशानी का कारण बना हुआ था।

प्रशासन ने दोनों पक्षों को सुना।

दस्तावेज देखे।

मौके का निरीक्षण किया।

और समाधान का रास्ता निकाला।

72 घंटे में तीन बड़े एक्शन

पिछले सप्ताह की घटनाओं ने प्रशासनिक सक्रियता की नई तस्वीर पेश की।

रविवार – तकिया महड़ौर

संवेदनशील विवाद को शांत कराया गया।

स्थिति को साम्प्रदायिक रंग मिलने से रोका गया।

मंगलवार – इलिया बाजार

अवैध अतिक्रमण पर बुलडोजर चला।

सरकारी भूमि खाली कराई गई।

बुधवार – ददरा गांव

50 परिवारों के आवागमन का रास्ता बहाल कराया गया।

सबसे बड़ी बात—

तहसीलदार स्वयं फावड़ा लेकर मैदान में उतरे।

याद आ गए प्रेम प्रकाश मीणा

चकिया की राजनीति और प्रशासन को करीब से देखने वाले लोग इन घटनाओं की तुलना वर्ष 2021-22 से कर रहे हैं।

उस समय तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रेम प्रकाश मीणा भी अपने ताबड़तोड़ एक्शन के लिए चर्चा में थे।

सलैया, लालपुर और कई अन्य क्षेत्रों में ताल-तलैया तथा सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया था।

उनकी कार्यशैली का एक अलग प्रभाव था—

निर्णय लेने की क्षमता।

मैदान में मौजूदगी।

और कानून को प्राथमिकता।

आज कई लोग कहते दिखाई दे रहे हैं कि चकिया में वैसी ही सक्रियता फिर दिखाई दे रही है।

फर्क केवल नाम का है।

कल चर्चा में प्रेम प्रकाश मीणा थे।

आज चर्चा में देवेंद्र कुमार हैं।

क्यों हो रही है इतनी चर्चा?

क्योंकि आमतौर पर जनता फाइलों में चलने वाला प्रशासन देखती है।

लेकिन जब अधिकारी खुद मौके पर दिखाई देते हैं—

जब शिकायत पर तत्काल कार्रवाई होती है—

जब तालाब, नाली, रास्ता और सरकारी जमीन बचाने की पहल होती है—

तब चर्चा स्वाभाविक हो जाती है।

चकिया में बदल रही प्रशासन की तस्वीर

मां काली मंदिर से लेकर ऐतिहासिक तालाब तक।

नीबी कला से लेकर भूसी तक।

इलिया से लेकर ददरा तक।

एक संदेश लगातार उभरकर सामने आ रहा है—

“सरकारी जमीन सरकार की, सार्वजनिक रास्ता जनता का और कानून सबसे ऊपर।”

यही कारण है कि इन दिनों चकिया की चौपालों, बाजारों और सोशल मीडिया पर एक ही सवाल सबसे ज्यादा सुनाई दे रहा है—

“क्या चकिया में फिर लौट आया है एक्शन प्रशासन का दौर?”

और यदि हालिया घटनाओं को देखा जाए तो जवाब शायद जनता खुद दे रही है। प्रशासन की सक्रियता, कानून की मजबूती और जनहित के मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई ने चकिया में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है, जिसके केंद्र में आज एक नाम है—तहसीलदार देवेंद्र कुमार।

— के.सी. श्रीवास्तव एडवोकेट
एडिटर, खबरी न्यूज़

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