रात भर गरजती जेसीबी, मौत बनकर दौड़ते ट्रैक्टर
ग्रामीण बोले- “अब और कितनी लाशें गिरेंगी तब जागेगा प्रशासन?”
खनन माफियाओं के आगे बेबस दिख रहा सिस्टम
चहनियां, चंदौली | खबरी न्यूज नेटवर्क
मनोज मिश्रा की रिर्पोट

बलुआ थाना क्षेत्र इन दिनों अवैध खनन माफियाओं के कब्जे में दिखाई दे रहा है। खेतों की मिट्टी बेधड़क काटी जा रही है और सड़कों पर ओवरलोड ट्रैक्टर मौत बनकर दौड़ रहे हैं। मारूफपुर, जमालपुर, सरौली, शेरपुर, चकबूलन, गुरेरा, डेरवा, टांडा कला, रमदत्तपुर और रामगढ़ समेत दर्जनों गांवों में दिन-रात मिट्टी खनन का खेल जारी है।
दो युवकों की मौत के बाद फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
शनिवार को मिट्टी लदे तेज रफ्तार ट्रैक्टर की चपेट में आने से दो युवकों की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह हादसा नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही से हुई हत्या है।
बिना परमिशन दौड़ रहे जेसीबी और ट्रैक्टर
स्थानीय लोगों के मुताबिक क्षेत्र में कई ईंट भट्ठों तक मिट्टी पहुंचाने के लिए बिना अनुमति या फर्जी कागजों के सहारे जेसीबी और ट्रैक्टर लगाए गए हैं। रात के अंधेरे में खेतों की खुदाई हो रही है और प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।
ओवरलोड ट्रैक्टर और अश्लील गानों से दहशत
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ट्रैक्टरों पर क्षमता से दोगुनी मिट्टी लादी जा रही है। चालक तेज आवाज में अश्लील गाने बजाते हुए सड़कों पर खतरनाक तरीके से वाहन दौड़ा रहे हैं। इससे आए दिन हादसे हो रहे हैं।

“सेटिंग-गेटिंग” के आरोपों से घिरा प्रशासन
ग्रामीण सुरेंद्र, रमेश, भगवान, महेंद्र, रामजीत और अवधेश ने आरोप लगाया कि खनन विभाग, तहसील प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय पुलिस सबकुछ जानते हुए भी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि विभागीय मिलीभगत के कारण माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
ग्रामीणों की चेतावनी- अब नहीं रुका खनन तो होगा आंदोलन
लगातार बढ़ते हादसों से नाराज ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि अवैध खनन और ओवरलोड ट्रैक्टरों पर रोक नहीं लगी तो बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा।

सवाल बड़ा है… आखिर जिम्मेदार कौन?
दो युवकों की मौत के बाद अब पूरे इलाके में एक ही सवाल गूंज रहा है—
“क्या प्रशासन और कितनी मौतों का इंतजार कर रहा है?”
खबरी न्यूज का नजरिया | एडिटर इन चीफ की कलम से
“जब मिट्टी का अवैध कारोबार इंसानी जिंदगी निगलने लगे, तब यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सामाजिक अपराध बन जाता है। चहनियां में दो युवकों की मौत एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की खामोशी का परिणाम है। सवाल यह नहीं कि ट्रैक्टर कौन चला रहा था, सवाल यह है कि मौत की इस रफ्तार को संरक्षण कौन दे रहा है? अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाला वक्त और भयावह हो सकता है।”
— के.सी. श्रीवास्तव एडवोकेट
एडिटर इन चीफ, खबरी न्यूज


















